Maa or Ashiq Ne Mil Kar Bacho Ko...| Salman Qureshi Ne Lahore Ichra Case Ki Haqiqat Bta Di | Aik
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लोग इसे गुर्बत गर्दनते हुए दिखाई दे रहे
हैं कि गुर्बत की वजह से ऐसे वाक्यात जो
है वो रूुमा होते हैं कि उसको खिलाने के
लिए पिलाने के लिए कुछ नहीं था। वहां पे
चाचा भी कमाता था। दादी भी कमाती थी।
बुजुर्ग औरत घरों में काम करती थी। ये खुद
भी कमाती थी। इसका शौहर भी कमाता था। साथ
एक शरीरियार नामी लड़के की एंट्री होती
है। पुलिस की तफ्तीश में अब तक सामने बात
आई है। शरीरियार से इसका ताल्लुक जरूर था।
इसके बकोल इसने तो पहले इल्जामात की
बौछाड़ कर दी अपने शौहर पर। ये उसे जिस्म
फरोशी पर मजबूर करता है। बहुत से लोगों को
कहा कि उनके साथ ताल्लुकात बनाओ। शहरी यार
को भी कहा शरीर के साथ भाई बन गया या जो
दौराने तफतीश इसने वहां पर इल्जामात लगाए
रमजान पर कि शहरी यार को फंसाने के लिए
कहा लेकिन मैंने उसे मना कर दिया। [संगीत]
लेकिन ये शरीर यार को पसंद करती थी।
अब इनकी घरेलू नाचाकी में ये बातें भी
होती तो वो अक्सर औकात उसे कहा करता था कि
ये जो बच्चे हैं ये मेरे नहीं है जिसकी
वजह से वो बहुत ज्यादा वो कहती है कि मैं
तंग थी और उस तंग होने की वजह से उसने
प्लानिंग की और उससे वारदात से जो वारदात
हुई है एक दिन कबल 11:00 बजे उसने इरा के
इलाका से एक छुरी खरीदी चुरियां और भी थी
प्रॉपर उसने प्लानिंग के साथ जब दादी भी
काम पर गई हुई थी चाचा भी काम पर गया हुआ
था। वो घर में बच्चों के साथ अकेली थी।
उसका शौहर भी बाहर गया हुआ था। तब उसने
मौके का फायदा उठाते हुए तसल्ली [संगीत]
के साथ पहले बच्चों को कत्ल किया। कत्ल
करने के बाद अपने शौहर को कहा कि मेरा
बीपी लो हो रहा है। मुझे प्रॉब्लम हो रही
है तो आप आओ।
छुरियां बच्चों के हाथों में पकड़ा दी और
ये वो साबित करना चाहती थी कि बच्चों ने
खुद ही एक दूसरे को छुरियां मार दी।
सीसीडी के हवाले कर दिया गया है। हो सकता
है कि इसे भी इबरत का निशान बनाया जाए। अब
वो भी मजीद तफ्तीश करेंगे। उसमें मजीद
हकायक सामने आएंगे। शरिया नामी एक लड़का
इसका जंग से ताल्लुक है। वो भी है। फिर
इसने दौराने तफ्तीश एक और इल्जाम ऐद किया
कि इनका कोई पीर साहब है जंग में। उससे भी
शौहर कहता था कि उनके साथ जाके रहो वो
प्राइस बॉन्ड देंगे। इस तरह की ये बातें
करके तमाम मलबा जो है वो मासूम बनके अपने
शौहर पर डालने की कोशिश करती रही।
बिस्मिल्लाह रहमा रहीम। अस्सलाम वालेकुम
नाजरीन आप देख रहे हैं एक न्यूज़ और मैं
हूं बिलाल जफर नाजरीन गुस्ता दो रोज पहले
इचरे में बहुत अफसोसनाक वाकया पेश आता है
और जिसके बाद पता लगता है कि अपने तीन
बच्चों को मारने वाली सखी मां जो है वो
पकड़ी जाती है और जब पकड़ी जाती है उसके
बाद बहुत सारी बातें की जाती है कि इसने
मार दिया उसने मार दिया लेकिन बाकायदा तौर
पे पुलिस के डीआईजी इन्वेस्टिगेशन प्रेस
कॉन्फ्रेंस करते हैं और उसमें बताते हैं
कि सखी मां ही अपने बच्चों के कातिल है एक
छुरी घर में मौजूद थी एक छुरी बाहर से
लेके आई और उसके साथ जो जो तफ्तीश हुई जो
बातें हुई मैंने सुना था कि सीनियर साहबी
सलमान कुरैशी साहब को एक-एक बात पता है।
ये उस मौका पर जो है पुलिस के साथ राबते
में थे तो इनसे वो बातें जानते हैं और आप
तक पहुंचाते हैं जो अब तक आपने बातें नहीं
सुनी होंगी। असला वालेकुम सलमान भाई।
वालेकुम सलाम।
सर बहुत शुक्रिया आपने हमें टाइम दिया।
बहुत शुक्रिया आपका।
सलमान भाई क्या कहना चाहेंगे? ऐसी कौन सी
चीजें हैं जो लोगों को अब तक नहीं पता? इस
खातून के बारे में इसके क्या मुआशरे चल
रहे थे? क्या इसकी अपने खावंद से लड़ाईयां
चल रही थी? आज बता दें आवाम जानना चाहती
है।
देखिए बिलाल बदकिस्मती से औरत एक मां के
रूप में होती है। सबसे अहम रूप है उसका और
आप भी समझते हैं कि मां का क्या मुकाम
होता है कि उसके कदमों के तले जन्नत रख दी
गई है। लेकिन कुछ बदनसीब
खवातीन भी इस मुआशरे में हैं। और मैं क्या
कहूं कि जो हवस में इतनी अंधी हो जाती है
वो किसी भी किस्म की हवस होती है। चाहे
पैसों की हवस हो, चाहे वो किसी मर्द की
हवस हो, किसी और नौजवान की तरफ उनकी
अट्रैक्शन हो और मुसलसल जब आप किसी भी चीज
में घिर जाते हैं और उस रास्ते पर चल
निकलते हैं जो बुराई की तरफ जाता है।
मुसलसल बुराई में रहने की वजह से अक्सर
औकात ऐसे ही भयानक अंजाम का सामना करना
पड़ता है। ये कोई पहला वाकया नहीं है।
इससे पहले भी पंजाब के मुख्तलिफ इजला में
इस तरह के बहुत से वाक्यात रिपोर्ट हो
चुके हैं। मांओं ने अपने मासूम बच्चों को
मुसलसल ईंटें मार मार के संसार भी कर
दिया। सियालकोट का एक खौफनाक वाक्या था
जिसमें एक छोटी सी बच्ची जिसकी उम्र उम्र
महज छ या सात बरस थी उसने अपनी वालिदा को
आशिक के साथ देख लिया। तो अब उसे खौफ था,
डर था कि वो अब वालिद को ना बता दे। उसकी
वजह से उसने अपनी बेटी को कत्ल करने का
मंसूबा बनाया। आशिक को भी साथ लिया। फिर
साथ उस बहन को कत्ल होते हुए एक चार साल
का बच्चा भी देख रहा था। जब उन्होंने देखा
कि यह बच्चे ने भी देख लिया उसे भी फरी
तौर पर मौत के घाट उतार दिया गया और फिर
बैन डाले गए।
औरत
मकर में भी सबसे आगे होती है। आपको पता है
और इसी तरह का किरदार जो है वो इस रिदा
नामी खातून की जानिब से भी निभाया गया। जो
इतरा के इलाका में ये तकरीबन आज से 10 साल
कब यहां पर शिफ्ट हुए थे। जंग से ताल्लुक
है रमजान का और रमजान जो है वो
इलेक्ट्रिशियन का काम करता था। बीच में
उसका एक्सीडेंट हो जाता है। रमजान की
वालिदा और रमजान का एक भाई है असद वो भी
इसी के साथ यहीं पर रिहाइश पजीर थे और ये
तीन बच्चे इनकी जिंदगी तो गुजर बसर हो रहा
था लेकिन उसमें घरेलू नाचाकी आप कह सकते
हैं वो थी। लोग इसे गुर्बत गर्दनते हुए
दिखाई दे रहे हैं कि गुरबत की वजह से ऐसे
वाक्यात जो है वो रूुमा होते हैं कि उसको
खिलाने के लिए पिलाने के लिए कुछ नहीं था।
था। वहां पे चाचा भी कमाता था, दादी भी
कमाती थी। बुजुर्ग औरत घरों में काम करती
थी। यह खुद भी कमाती थी। इसका शौहर भी
कमाता था। वो ठीक हो चुका था। इधर-उधर काम
करता था। सात कारखाने थे, फैक्ट्रियां थी
और वो अपना गुजर बसर कर रहे थे। लेकिन साथ
एक शरीरियार नामी लड़के की एंट्री होती
है। कहा यह जा रहा है जो पुलिस की तफ्तीश
में अब तक सामने बात आई है। शरीर से इसका
ताल्लुक जरूर था। इसके बकोल इसने तो पहले
इल्जामात की बौछाड़ कर दी अपने शौहर पर कि
ये उसे जिस्म फरोशी पर मजबूर करता है
और बहुत से लोगों को कहा कि उनके साथ
ताल्लुकात बनाओ। शहरीर को भी कहा शरीर के
साथ भाई बन गया जो दौराने तफ्तीश इसने
वहां पर इल्जामात लगाए रमजान पर के शहरीर
को फंसाने के लिए कहा लेकिन मैंने उसे मना
कर दिया। लेकिन ये शरीरियार को पसंद करती
थी। अब इनकी घरेलू नाचाकी में यह बातें भी
होती थी जब औरत शादीशुदा औरत हो और उसका
किरदार जो है वो मशकूक हो तो अक्सर औकात
लड़ाई झगड़े घरेलू नाचाकियां बढ़ जाती हैं
और वो अक्सर औकात उसे कहा करता था कि ये
जो बच्चे हैं ये मेरे नहीं है जिसकी वजह
से वो बहुत ज्यादा कहती है कि मैं तंग थी
और उस तंग होने की वजह से उसने प्लानिंग
की और उससे जाए वक जाए वारदात से जो
वारदात हुई है एक दिन कबल 11:00 बजे उसने
उसने इरा के इलाका से एक छुरी खरीदी।
छुरियां और भी थी। वहां से वो छुरी लेके
आई और प्रॉपर उसने प्लानिंग के साथ जब
दादी भी काम पर गई हुई थी, चाचा भी काम पर
गया हुआ था और वो घर में बच्चों के साथ
अकेली थी, उसका शौहर भी बाहर गया हुआ था।
तब उसने मौके का फायदा उठाते हुए तसल्ली
के साथ पहले बच्चों को कत्ल किया। कत्ल
करने के बाद अपने शौहर को कहा कि मेरा
बीपी लो हो रहा है। मुझे प्रॉब्लम हो रही
है तो आप आओ और मुझे डॉक्टर के पास लेके
जाओ। उसके साथ खुद डॉक्टर पे गई है।
डॉक्टर से आने के बाद वो नीचे एक मीटर को
छेड़ने लग गया। उनकी बिजली कोई खराब हुई
हुई थी। वो ऊपर गई है तो ऊपर जाकर उसने
शोर डाल दिया। फिर दादी चाचा भी आ गए। सब
ने मौका पर देखा। फिर इसने वहां पर लोगों
को भी कहा जो आ रहे थे कि हम तुम भाग जाओ।
छुरियां बच्चों के हाथों में पकड़ा दी और
यह वो साबित करना चाहती थी कि बच्चों ने
खुद ही एक दूसरे को छुरियां मार दी। पहले
तासुर यही दिया गया था कि बच्चों ने
हां वहां पर एक फुटेज भी वायरल होती है
मौका पर जहां पर उनसे तफ्तीश हो रही है और
वहां के इन्वेस्टिगेशन अफसरान पूछ रहे हैं
कि आप कहां गए थे कोई और रास्ता घर में
दाखिल होने का है ताला आपने खुद खोला है
तो वो कह रही थी जी उसका यही था कि वो
किसी तरह साबित कर दे कि बच्चों ने
छुरियां खुद मानी बिल आखिर फिर एक बहुत कम
वक्त में लाहौर पुलिस ने इस केस को हल कर
लिया इन्वेस्टिगेशन पुलिस ने और मुलजमा ने
एतराफ पे जुर्म कर लिया और साथ इल्जामात
भी आयद किए। यह मुझे मजबूर करता था जिस्म
फरोशी पर और साथ जो है वो त ये जो मुझे
ताने दिया करता था ये बच्चे मेरे नहीं। तो
इस तरह से इसने ये कत्ल की खौफनाक और
भयानक वारदात की। इन्वेस्टिगेशन पुलिस
इसकी तफ्तीश कर रही थी। अब ये केस जो है
वो सीसीडी के सुपुर्द कर दिया गया। अब
देखना यह है कि क्या सीसीडी के पास जैसे
केसेस होते हैं मुलजमान का अंजाम होता है।
क्या इसका भी यह होगा? क्योंकि
क्या इसके साथी भी छुड़वाने के लिए आएंगे?
ऐसा हो सकतायत जो है खवातीन के साथ ऐसा
नहीं होता था क्योंकि कानून में भी ऐसा
नहीं है कि खातून जो है उसे सजा-ए-मौत या
फांसी की सजा जो हो सके फांसी होती नहीं
है। मतलब सजा हो जाए अमल दरामद इस पर नहीं
होता। खवातीन के लिए नहीं होता। लेकिन अब
देखना ये है क्योंकि सीसीडी के हवाले कर
दिया गया है। हो सकता है कि इसे भी इबरत
का निशान बनाया जाए। अब वो भी मजीद तफ्तीश
करेंगे। उसमें मजीद हकायक सामने आएंगे।
शरीरिया नामी एक लड़का जिसका झंग से
ताल्लुक है वो भी है। फिर इसने दौराने
तफ्तीश एक और इल्जाम आयद किया कि इनका कोई
पीर साहब है झंग में उससे भी शौहर कहता था
कि उनके साथ जाके रहो वो प्राइस बॉन्ड
देंगे। इस तरह की ये बातें करके तमाम मलबा
जो है वो मासूम बनके अपने शौहर पर डालने
की कोशिश करती रही। लेकिन बिलिखिर पकड़ी
गई तमाम लोगों को पुलिस ने जो
इन्वेस्टिगेशन पुलिस थी उन्होंने छोड़
दिया और इसमें सबसे अहम काम यह हुआ है कि
इसमें मुदई मुकदमा बच्चों के बाप को नहीं
बनाया गया बच्चों की दादी को नहीं बनाया
गया चाचा को नहीं बनाया गया बल्कि स्टेट
पुलिस खुद इस केस की मुदई बनी है के इनको
जो है इसके किए की करार वाकया सजा मिल सके
लेकिन ऐसे वाक्यात उभरते क्यों चले जा रहे
हैं इसमें एक तो दीन से दूरी है फिर
बेहयाई है फिर यह सोशल मीडिया का आजकल का
जो दौर है और TikTok पे उसकी शहरियार नामी
लड़के के साथ दोस्ती होती है। तो यह
TikTok ये इस तरह के प्लेटफार्म जो है वो
इस्तेमाल हो रहे हैं जिसकी वजह से ऐसा
नुकसान मुआशरे में होता हुआ दिखाई दे रहा
है। तो इन सारी चीजों को रोकने के लिए
तमाम लोगों को अपना-अपना किरदार अदा करना
होगा। अपनी बच्चियों को तरबियत देनी होगी
कि बेटा जब आपकी शादी हो जाती है तो आपका
सब कुछ जो है वो आपका शौहर ही होता है।
उसके साथ ही जिंदगी बसर करनी होती है और
छोटी-मोटी घरेलू चाकी अगर आप एक दूसरे से
बात करके या अपने घर वालों को बताकर हल कर
सकते हैं। नहीं तो ऐसा अंजाम भी भुगतना
पड़ सकता है जिस तरह के ऐसे वाक्यात हो
रहे हैं। तो ये कोई दिमागी भी प्रॉब्लम्स
हो सकते हैं और भी इसमें बेहयाई का आंसर
भी बहुत ज्यादा है और रोजरोज़ की एक लड़ाई
जो है वो घर के सुकून को तबाह बर्बाद कर
देती है। अब उन बच्चों का क्या कसूर था?
बहुत से ऐसे वालदैन हैं जिनकी शादियां हो
चुकी हैं। वालिदैन नहीं मतलब मर्द और
खवातीन है और अरसा गुजर जाता है। वो इन
बच्चों की लिए दुआ गो रहते हैं। अल्लाह
पाक से बार-बार मांगते हैं। मनते मांगते
हैं। लेकिन उनके यहां औलाद नहीं होती।
लेकिन कुछ लोग हैं जिनके पास वफर औलाद
होती है, नेमत भी होती है, रहमत भी होती
है और वो खुद ही उन्हें कत्ल कर देते हैं
बेदर्दी के साथ। तो इन चीजों को देखने की
जरूरत है। मुआशरे में सुधार पैदा करने की
जरूरत है। और अब केस जो है वो सीसीडी के
सुपुर्द कर दिया गया।
आखिर में एक मेरा सवाल है कि क्या इस औरत
ने जंग वाले शहरियार के कहने पे अपने
बच्चों को मारा या अपने खावंद के डीएनए के
टेस्ट के इल्जाम के बाद जो जिस जो उसप
कहता था कि मेरे बच्चे ने उस खार में मारा
या कोई और वजह क्या बात क्या सामने आई कि
इसने बच्चों को क्यों मारा? अच्छा देखें
आपका बड़ा क्वेश्चन वैलिड है। ये बार-बार
मैंने वहां के जो अफसरान हैं गुलबर्ग
इन्वेस्टिगेशन के डीएसपी हैं कमर अब्बास
उनसे भी पूछा। उनका यह कहना था कि शरीर की
इसमें इनवॉल्वमेंट नहीं है। हां शरीरियार
सीडीआर में जरूर साबित हुआ है कि उसके साथ
राबते में था लेकिन कत्ल की वारदात उसने
नहीं करवाई। अब देखिए केस ही दूसरी तरफ
चला गया। सीसीडी के सुपुर्द कर दिया गया।
हो सकता है इसकी नए सिरे से तफ्तीश हो।
उसमें मजीद इंकशाफात भी मुतवको है। अभी तक
उसमें नहीं था। अच्छा दूसरा यह कहती होती
थी अपने शौहर को कि मेरा डीएनए करवा लो
बच्चों का और मेरा डीएनए करवा लो। लेकिन
वो फिर भी ताने दे देता था। कुछ लोग जो है
वो इस तरह के इल्जामात आयद कर देते हैं।
उसका अंजाम उन्हें इस तरह का भी भुगतना
पड़ता है। लेकिन उसी के साथ वो जा रही है
जो इल्जाम आयद करता था। उसी के पीछे बैठी
हुई है। वो जो एक वीडियो वायरल हो रही है
और वहीं पे बैठ के कह रही है कि अंदर इनके
हाथों में छुरियां थी। कोई भी नहीं आया।
हमने खुद ताला खोला है। तो उसी की आगोश
में बैठ के छुप रही है जो इल्जामात लगाता
था। तो उनका क्या कसूर था जिन्हें जिस
मासूमों को अभी यह भी नहीं पता था कि
उन्हें कौन क्यों और किस वजह से कत्ल कर
रहा है और उनकी मां ही उन्हें कत्ल कर रही
है। तो उन उनका तो एक बच्चों का तो जिंदगी
चली गई और सारी जिंदगी के लिए इनके घर पे
एक समझे कि लड़की वालों के लिए भी एक
धब्बा बदनामी का वो छोड़ गई। अपने ससुराल
वालों के लिए भी वो धब्बा बदनामी का छोड़
गई। खुद भी बच्चों को मार दिया। पछतावा
उसे उस तरह से मैंने पुलिस से पूछा नहीं
है। कॉन्फिडेंस उसका पूरा था। बातें वो कर
रही थी। हो सकता है बाद में अकेली बैठे तो
जाकर पछतावा हो। लेकिन देर से पछतावा होने
की क्या जरूरत है इतना बड़ा नुकसान करने
की? और ऐसे वाक्यात जो है वो बढ़ते चले जा
रहे हैं। इसमें सब लोगों को अपना-अपना
किरदार अदा करना होगा और खवातीन को यह
बताना होगा कि ये जो आप किसी के साथ जब
शादी कर लेती हैं, निकाह में चली जाती है
तो उसी की इज्जत आपके साथ वाबस्ता हो जाती
है। उसके साथ ही जिंदगी को गुजर बसर करें।
नहीं तो आपको भी ऐसे भयानक नताज भुगतने
पड़ सकते।
ऐसे भयानक नताज भुगतने पड़ेंगे। सलमान
कुरैशी साहब की बात बड़ी ऑथेंटिक है कि
जिस वक्त एक वीडियो बयान कल उसका जारी
होता है इन्वेस्टिगेशन पुलिस की तरफ से
किया जाता है कि अपने खावंद की आगोश में
बैठ के उसकी बाजू हाथ पर पकड़ के कहती है
कि हम लोग वहां पे नहीं थे। मतलब अपनी जान
बचाने के लिए इतनी सोच उसके ज़हन में इतना
सेंस उसकी थी कि हम इस तरह बच सकते हैं।
मैं अपने खांद के अग बैठ के बात करूंगी तो
शायद पुलिस हम पे शक भी नहीं करेगी। तो ये
भी नहीं कहा जा सकता कि वो दिमागी तौर पे
अपसेट थी। यह बाकायदा तौर पे अपनी जिस्म
की लज्जत के लिए और अपनी जिंदगी की
अय्याशी के लिए उसने अपने तीन बच्चों की
जान ली है। देखना यह है कि इसके साथ अब
क्या सलूक होता है। मिलते हैं नए टॉपिक नए
स्टोरी के साथ। तब तक के लिए इजाजत दीजिए।
अल्लाह हाफिज।
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यह वीडियो लाहौर के इचरा इलाके में एक मां द्वारा अपने ही तीन मासूम बच्चों की निर्मम हत्या की दुखद घटना पर आधारित है। एक न्यूज़ रिपोर्ट के माध्यम से बताया गया है कि आरोपी मां ने पहले अपने पति पर झूठे आरोप लगाए और फिर सुनियोजित तरीके से बच्चों की हत्या कर उन्हें 'खुदकुशी' का रूप देने की कोशिश की। तफ्तीश में सामने आया कि महिला के अवैध संबंधों और घरेलू कलह ने इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इसे सुलझा लिया है और मामला अब CCD के सुपुर्द कर दिया गया है।
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