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Drug Dons of Pakistan Exposed | How Doctors & Pharma Companies Loot Sick Patients Daily @raftartv

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Drug Dons of Pakistan Exposed | How Doctors & Pharma Companies Loot Sick Patients Daily @raftartv

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722 segments

0:01

क्लीनिक में खामोशी छाई हुई थी। डॉक्टर की

0:04

आंखें रिपोर्ट पर और उसके सामने बैठी

0:07

खातून की नजरें डॉक्टर पर जमी हुई थी।

0:10

खातून को अपनी सेहत की नहीं बल्कि सेहत पर

0:13

होने वाले खर्चे की भी फिक्र थी। उसके

0:15

हुलिए से वाज़ था कि उसका ताल्लुक इंतहाई

0:18

पसमांदा तबके से है और था भी बिल्कुल ऐसा

0:21

ही। वह लोगों के घरों में काम करके अपना

0:24

अपने बच्चों और उनके बाप का पेट पालती थी।

0:27

कुछ देर बाद डॉक्टर की आवाज ने कमरे की

0:30

खामोशी को तोड़ा। आप में आयरन की शदीद कमी

0:33

है जिसे दूर करने के लिए एक इंजेक्शन

0:36

लगवाना लाजमी है। बेचारी खातून भारी कदमों

0:39

के साथ फार्मेसी का रुख करती है और वहां

0:42

इंजेक्शन की कीमत जानकर उसकी आंखें खुली

0:45

की खुली रह जाती है। यह कोई फर्जी कहानी

0:48

नहीं बल्कि खातून फरहान साहब की मेड है।

0:51

आइए आगे की कहानी उन्हीं की जबानी सुनते

0:53

हैं।

0:54

वो लेके आई पर्चा कह रही है फरहान भाई

0:57

₹10,000 का इंजेक्शन लिख के दे दिया

0:59

डॉक्टर ने। जरा देखिए यह क्या है। जब

1:02

मैंने चेक किया तो वह एक खून बढ़ाने का

1:05

इंजेक्शन था।

1:07

लेकिनकि हमें थोड़ी सी अंडरस्टैंडिंग थी।

1:09

हमने उसी इंजेक्शन का फार्मूला देखा और

1:12

फार्मूला देख के जब उसको सर्च किया ऑनलाइन

1:15

तो उससे एक चौथाई या 1/3 कीमत पे भी बहुत

1:18

सारे ऑप्शंस मौजूद थे रिस्पेक्टेबल फार्मा

1:20

कंपनीज़ के। लेकिन डॉक्टर साहब ने उसको वही

1:22

10,000 वाला लिख के दे दिया। क्योंकि

1:24

ब्रांड नेम का चक्कर है वही लिख के दे

1:26

दिया।

1:26

यह मसला सिर्फ एक केस का नहीं है।

1:29

पाकिस्तान में अक्सर डॉक्टर्स फरहान साहब

1:31

की मेड के डॉक्टर की तरह प्रिस्रिप्शन में

1:33

दवा का नुस्खा नहीं बल्कि दवा का ब्रांड

1:36

लिखते हैं और मरीज बेचारा लालमी में मारा

1:39

जाता है। बल्कि कई मरीज तो इस वजह से दवा

1:41

लेना छोड़ देते हैं और मजीद बीमारियों में

1:43

मुब्तला हो जाते हैं। मगर दवाई के नुस्खे,

1:46

दवाई के नाम और ब्रांड में फर्क क्या है?

1:48

यह कहानी क्या है? आम लोगों को इसके

1:50

मुतालिक क्यों नहीं मालूम और डॉक्टर्स और

1:53

फार्मासटिकल कंपनीज इस लालमी से कैसे

1:56

फायदा उठा रही हैं? आइए जानते हैं। मगर

1:58

आगे बढ़ने से पहले वही दरख्वास्त कि

2:01

सब्सक्राइब जरूर करें और हमारा

2:03

एक्सक्लूसिव कंटेंट देखना चाहते हैं तो

2:05

पेट्रऑन मेंबर बने। चलें अब ड्रग डॉन्स की

2:08

कहानी की तरफ चलते हैं।

2:11

[संगीत]

2:16

पाकिस्तान में 700 से ज्यादा फार्मासटिकल

2:18

कंपनीज़ काम कर रही हैं। लेकिन यहां कोई भी

2:22

ओरिजिनल दवाई नहीं बनाई जाती। अच्छा जैसा

2:24

कि फार्मा कंपनीज़ के बारे में मैंने कहा

2:27

कि उनकी दो किस्म की प्रोडक्ट्स हो सकती

2:29

हैं। एक ओरिजिनल जो कि रिसर्च प्रोडक्ट्स

2:31

होती हैं। तो एक फर्ज करें फाइजर कंपनी है

2:34

या नोवास है जो जो जीएस के ये जो ग्लोबल

2:37

कंपनीज़ हैं ये रिसर्च करती है 810 साल के

2:40

बाद कोई एक ड्रग जो है वो एफडी अप्रूव कर

2:43

देता है किसी बीमारी के लिए। यह इनकी

2:46

ओरिजिनल प्रोडक्ट हो गई जो यह सिर्फ यही

2:48

कंपनी बेच सकती है और यह रिसर्च प्रोडक्ट

2:51

है ओरिजिनल प्रोडक्ट है तो यह फिर पूरी

2:54

दुनिया में बेच बेचते हैं वो जो हमारे

2:56

यहां दवाइयां बनती है इनको हम जेनेरिक्स

2:58

कहते हैं ये उन ओरिजिनल की समझे कॉपीज

3:02

होती हैं जो मतलब लीगली बनाते हैं वो

3:05

लेकिन ये ओरिजिनल प्रोडक्ट नहीं होती इसका

3:07

मतलब ये हुआ कि पाकिस्तान जैसे मुल्क में

3:11

30-30 40-40 फार्मर कंपनीज़ एक ही प्रोडक्ट

3:15

बना होती है। यानी पाकिस्तान में मौजूद

3:17

सैकड़ों कंपनीज़ एक ही फार्मूले को कॉपी

3:20

करके दवाई बनाते हैं। इन तमाम कंपनीज़ के

3:23

प्रोडक्ट कमोपेश एक ही तरह की तासीर रखते

3:26

हैं। मगर इसके बावजूद कुछ कंपनीज़ की

3:28

प्रोडक्ट महंगी और कुछ की सस्ती होती है।

3:30

और यह सिर्फ पाकिस्तान में या फार्मा

3:32

इंडस्ट्री में नहीं दुनिया भर में होता

3:34

है। हर कंपनी अपनी कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन और

3:37

दीगर अखराजात के मुताबिक ही अपनी प्रोडक्ट

3:39

की कीमत का तायुन करती है।

3:41

एक ब्रांड है Panol। पेनाडोल इज द ब्रांड

3:45

नेम। उसको एक कंपनी बना रही है। लेकिन

3:47

एक्चुअल में जो आपको ट्रीट कर रही है वो

3:50

उसका फार्मूला है जिसको हम जेनेरिक कहते

3:52

हैं और उसका नाम है पैरासिटामॉल। तो

3:54

मोस्टली जो मिसकंसेप्शन होती है वो यह

3:56

होता है कि लोग ब्रांड को ही मेडिसिन समझ

3:58

लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं होता। असल में जो

4:00

चीज आपको ट्रीट करी है वो उसका फार्मूला

4:02

है।

4:02

मगर जो चीज यहां मुख्तलिफ होती है वो यह

4:04

कि दुनिया भर में डॉक्टर्स मरीजों को किसी

4:07

मखसूस कंपनी का नाम या ब्रांड लिखकर नहीं

4:10

बल्कि दवा का फार्मूला लिखकर देते हैं और

4:12

मरीज अपनी मर्जी की कंपनी की दवा ले लेता

4:14

है। पाकिस्तान में डॉक्टर्स दवा नहीं

4:17

ब्रांड लिखकर देते हैं। चाहे वो जितना भी

4:19

महंगा हो।

4:20

अच्छा पाकिस्तान के अंदर ड्रैप का एक

4:23

डायरेक्टिव मौजूद है जिसमें यह कहा गया है

4:25

कि जो भी प्रिस्राइबर है, फिजिशियंस हैं

4:28

वो केमिकल नेम लिखें जो भी वो ट्रीटमेंट

4:31

प्लान लिख रहे हैं। लेकिन जब हम रिटेल के

4:34

ऊपर प्रिस्रिप्शनंस को डील करते हैं तो

4:35

पाकिस्तान में जितनी भी प्रिस्क्रिप्शनंस

4:37

हमारे पास आती हैं उन सब पर ब्रांड नेम

4:39

लिखा होता है। अगर वो नहीं मिलता तो

4:41

कस्टमर उसको ढूंढता ही रहता है। ढूंढता ही

4:43

रहता है कि मुझे यही चाहिए। जबकि उसका

4:44

ट्रीटमेंट हो सकता था। यूनिवर्सिटी ऑफ

4:46

लंदन के एक वर्किंग पेपर के मुताबिक

4:48

पाकिस्तान में 6 सालों के दौरान लो इनकम

4:51

घरानों में दवाइयों पर खर्चा डबल हो गया

4:53

है। यह डाटा 10 साल पुराना है। आज

4:56

इनफ्लेशन में ज्यादती और रुपए की कदर में

4:58

कमी के बाद सूरत हाल मजीद खराब हो गई है।

5:01

एक तरफ दवाइयों की कीमतों में इजाफा हो

5:03

रहा है और दूसरी तरफ डॉक्टर्स की ब्रांडेड

5:06

प्रिस्रिप्शन की वजह से मरीज मजीद महंगी

5:09

दवाइयां लेने पर मजबूर हो रहे हैं। नतीजा

5:12

यह है कि दवाओं की कीमतें आम आदमी की

5:15

पहुंच से इतनी दूर हो चुकी हैं कि लोगों

5:17

ने दवाइयां लेना ही छोड़ दी हैं या इंतहाई

5:20

सबस्टैंडर्ड या आधी अधूरी दवाई लेने पर

5:23

मजबूर हो गए हैं जिसकी वजह से आज

5:26

पाकिस्तान एक बीमार कौम बन गई है। अच्छा

5:29

अब हम देखते हैं कि जब एक डॉक्टर एक

5:31

फिजिशियन एक प्रिस्क्रिप्शन के ऊपर

5:33

ब्रांड्स लिखते हैं। अच्छा ये रियल टाइम

5:34

एक केस है। हम डील कर रहे थे। मैंने खुद

5:36

डील किया इस कस्टमर को। वो डायबिटिक का

5:39

डायबिटीज का पेशेंट था। वो क्या करता था?

5:41

एक महीने इंसुलिन के पैसे जोड़ता था और एक

5:43

महीने वो टेबलेट के पैसे जोड़ता था कि एक

5:46

[नाक से की जाने वाली आवाज़] महीने मैं यह

5:47

लूंगा और एक महीने यह लूंगा। उससे

5:48

प्रॉब्लम क्या जनरेट हुई कि वो अल्टीमेटली

5:51

रिलैप्स हुआ। जो उसका ओरल मेडिकेशन या कम

5:54

खर्चे के ऊपर वो काम हो सकता था वो अब

5:56

हॉस्पिटलाइज हुआ। रिलैप्स पड़ा। इसी तरीके

5:59

से रिलैक्सेस पड़ते हैं। आपके प्राइवेट

6:01

सेक्टर जो पहले ही पेशेंट अफोर्ड नहीं कर

6:02

रहा वो प्राइवेट सेक्टर में तो जा नहीं

6:04

सकता। अब आपका जो अल्टीमेट बर्डन है वो

6:06

किस पे आया? पब्लिक सेक्टर के ऊपर। इसकी

6:08

एक और मिसाल देखते हैं। अगर हम ब्लड

6:10

प्रेशर की दवा एम्लो डिपिनर वेल्टन 10/10

6:14

को देखें तो कवा कंपनी की 14 गोलियां

6:16

तकरीबन ₹688 में दस्तियाब है। जबकि इसी

6:19

दवा का एक और ब्रांड एक्स स्टोर तकरीबन

6:22

₹55 में मौजूद है। मज़द अगर हम हयानून के

6:25

ब्रांड बायfर्ज को देखें तो इसकी 14

6:27

गोलियां तकरीबन ₹240 में पड़ती हैं। अब

6:31

सिर्फ इतने से मुआजने से एक मरीज खुद

6:34

अंदाजा लगा सकता है कि मालूमात ना होने की

6:37

वजह से वो अपनी महाना दवा पर कितनी इजाफी

6:40

रकम खर्च कर रहा हो सकता है। पाकिस्तान

6:42

किस हद तक बीमार है यह अंदाजा लगाने के

6:45

लिए कुछ बीमारियों के स्टैटिस्टिक्स देखते

6:47

हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रीसेंट

6:49

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हर

6:51

तीसरा शख्स डायबिटिक है। मजमुई तौर पर 3

6:54

करोड़ से ज्यादा पाकिस्तानी इस मर्ज से

6:56

किसी ना किसी तरह से मुतासिर हो रहे हैं।

6:58

एक और मौजी मर्ज टीबी के भी स्टैटिस्टिक्स

7:01

इंतहाई खतरनाक हैं। WHO के मुताबिक

7:04

पाकिस्तान में हर साल 6.5 लाख से ज़्यादा

7:06

टीबी के केसेस सामने आते हैं। हर साल इस

7:09

बीमारी से 5ज़ अफराद अपनी जान से जाते हैं।

7:12

यानी पाकिस्तान में हर रोज 140 अफराद टीबी

7:16

की वजह से मौत के मुंह में जाते हैं। और

7:19

तो और हमारे बच्चे भी बीमारियों से महफूज़

7:21

नहीं है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि

7:23

पाकिस्तान में 40% बच्चे स्टंटेड ग्रोथ का

7:26

शिकार हैं। यानी इस मुल्क के तकरीबन हर

7:29

दूसरे बच्चे की नशोनुमा ही मुकम्मल नहीं

7:31

होती और यह तो हम सब जानते ही हैं कि पूरी

7:34

दुनिया में पोलियो सिर्फ दो मुालिक में

7:36

बाकी हैं और उसमें से एक वतने अजीज है। एक

7:39

तरफ पाकिस्तान में पब्लिक हेल्थ की यह

7:41

सुरते हाल है। आवाम बीमार हो रहे हैं।

7:44

दूसरी तरफ फार्मासटिकल कंपनीज़ रोज-बरोज

7:46

सेहतमंद हो रही हैं और फल फूल रही हैं।

7:52

[संगीत]

7:57

[संगीत]

8:05

[संगीत]

8:15

और आने वाले वक्त में इंशाल्लाह ताला

8:18

पाकिस्तान की इकॉनमी की जो बैकबोन होगी

8:23

वो पाकिस्तान का हेल्थ केयर निजाम होगा।

8:26

फार्मासटिकल इक्विपमेंट और मेडिसिंस की

8:29

एक्सपोर्ट अराउंड $1 बिलियन यूएस डॉलर है।

8:33

आइंदा आने वाले सालों में इंशाल्लाह ताला

8:35

हम इसको हमारा टारगेट 30 बिलियन यूएस डॉलर

8:38

तक लेकर जाने का है। पाकिस्तान के वज़र

8:41

सेहत का ये बैन कुछ एक्सजेजुरेटेड लग रहा

8:43

है। क्योंकि वो 5 साल में सिर्फ एक सेक्टर

8:45

की एक्सपोर्ट्स को पाकिस्तान के मौजूदा

8:47

टोटल एक्सपोर्ट्स के बराबर करने की बात कर

8:50

रहे हैं। यह टारगेट तो वाकई ओवर एंबिशियस

8:52

है। लेकिन मुस्तफा कमाल की ये खुशफहमी

8:55

बेबुनियाद नहीं है। पिछले कुछ सालों में

8:58

पाकिस्तान की फार्मा इंडस्ट्री ने गैर

9:00

मामूली ग्रोथ देखी है। 2024 में

9:02

फार्मासटिकल कंपनीज़ के प्रॉफिट्स में 200%

9:04

इजाफा हुआ है और 2025 में पाकिस्तान की

9:07

फार्मा एक्सपोर्ट्स 34% बढ़ी हैं। अगर

9:10

आपको यह परसेंटेजेस कंफ्यूजिंग लग रही

9:12

हैं, तो चल आपको कुछ चार्ट्स दिखाता हूं।

9:14

जिससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि पिछले 2 से

9:17

3 सालों में फार्मा कंपनीज ने कितना ग्रो

9:20

किया है। यह पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की

9:22

वेबसाइट पर मौजूद चंद फार्मासटिकल कंपनीज़

9:25

के शेयर्स का चार्ट है। पाकिस्तान स्टॉक

9:27

एक्सचेंज के रिकॉर्ड के मुताबिक जीएसके

9:29

कंपनी का शेयर 2023 में तकरीबन ₹75 का था

9:33

और आज इसकी कीमत बढ़कर ₹350 से ज्यादा है।

9:37

यह हाई नोन कंपनी का रिकॉर्ड है। 3 साल

9:40

पहले इसके एक शेयर की कीमत ₹350 थी जो कि

9:43

आज ₹1000 को टच कर रही है और यह सिरल

9:46

कंपनी है। इसके भी एक शेयर की कीमत 3

9:49

सालों में ₹35 से बढ़कर तकरीबन ₹90 पर

9:52

पहुंच गई है। 2025 में पाकिस्तान की

9:55

फार्मासटिकल्स की सेल्स ₹1 खरब से ज्यादा

9:58

की हुई है और सिर्फ लिस्टेड कंपनीज़ को ₹42

10:01

अरब का प्रॉफिट हुआ है। आप शायद यह सोच

10:04

रहे हो कि लोग ज्यादा बीमार हो रहे हैं तो

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जाहिर है कि दवाइयां भी ज्यादा फ़रोख्त हो

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रही हैं और इसीलिए फार्मासटिकल कंपनीज़ भी

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फल फूल रही हैं। लेकिन असल सवाल तो यह है

10:13

कि कहीं लोगों को बीमार करने और बीमार

10:16

रखने में इन कंपनीज़ का तो कोई किरदार नहीं

10:18

है। यह फार्मा इंडस्ट्री की एक डार्क साइड

10:21

है। एक ऐसा भयानक रुख जिसमें सेहतियाबी का

10:24

नुस्खा मौत का परवाना बन जाता है। जिसमें

10:27

इलाज करने वाला मसीहा इंसानी जान का

10:30

सौदागर बन जाता है। जिसमें मरीजों की आहें

10:34

नोटों की खनक में खो जाती हैं और दर्द

10:37

बेहतरीन कमोडिटी बन जाता है। आइए इस डार्क

10:40

साइड से पर्दा हटाते हैं और जानते हैं

10:43

फार्मा इंडस्ट्री कैसे काम करती है।

10:51

[संगीत]

10:53

फार्मा इंडस्ट्री बाकी तमाम इंडस्ट्रीज से

10:55

मुख्तलिफ है। प्रोडक्ट बनाने से इसको

10:58

मार्केट करने तक फार्मा कंपनीज़ की चेन

11:00

किसी भी दूसरी कंपनी से मुख्तलिफ होती है।

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चलिए मिसाल से समझते हैं। आप कोई भी

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इंडस्ट्री उठाकर देख लें। कोल्ड ड्रिंक

11:07

बनाने वाली C कोलाa नेक्स्ट को ही ले लें।

11:09

यह अपना प्रोडक्ट यानी कोल्ड ड्रिंक बनाते

11:11

हैं और उसको बेचने के लिए टीवी चैनल्स और

11:13

बिल बोर्ड्स पर इश्तहारात लगाते हैं। लोग

11:15

इश्तहार देखकर अट्रैक्ट होते हैं। किसी भी

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करीबी दुकान से इनकी कोल्ड ड्रिंक खरीदते

11:20

हैं जिससे कंपनी प्रॉफिट कमाती है। और यूं

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प्रोडक्शन से कंज्यूमर तक पहुंचने और

11:25

प्रॉफिट कमाने का साइकिल मुकम्मल हो जाता

11:27

है। लेकिन दवाइयां बनाने वाली कंपनीज अपने

11:30

प्रोडक्ट कैसे बेचते हैं? आपने कभी किसी

11:33

एंटीबायोटिक, कफ सिरप या किसी आई ड्रॉप या

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किसी भी दवाई का इश्तहार नहीं देखा होगा।

11:38

फिर सवाल पैदा होता है कि इन दवाइयों की

11:40

मार्केटिंग कैसे होती है और लोगों तक इनको

11:44

कैसे पहुंचाया जाता है? आखिर फार्मासटिकल

11:46

कंपनीज़ को भी तो प्रॉफिट हासिल करना है।

11:48

फार्मा इंडस्ट्री के लिए यह काम मेडिकल

11:51

प्रोफेशन के मिडलमैन करते हैं। यानी

11:54

डॉक्टर्स। आसान अल्फाज में फार्मासटिकल

11:57

कंपनीज के कस्टमर मैं और आप नहीं बल्कि

12:00

डॉक्टर्स होते हैं। और यही कॉमन सेंस है

12:02

क्योंकि हम दवाई अपनी मर्जी से नहीं

12:04

डॉक्टर के मशवरे से ही लेते हैं। कंज्यूमर

12:07

उनका है मरीज लेकिन वो अपनी प्रोडक्ट को

12:10

डायरेक्टली मार्केट कंज्यूमर तक नहीं

12:12

करती। उसके लिए एक यू नो इंटरमीडियरी है

12:15

जो कि डॉक्टर है क्योंकि डॉक्टर

12:17

प्रिस्राइब करता है और वो प्रिस्रिप्शन जो

12:19

है वो फिर मरीज जो है वो किसी भी फार्मेसी

12:22

से लेता है जाके। लेकिन इस चैन की सबसे

12:25

अहम बात यह है कि इन तीनों फैक्टर्स,

12:27

फार्मा कंपनीज़, डॉक्टर्स और मरीज के

12:30

ताल्लुक की बुनियाद और मकसद मरीज की तकलीफ

12:33

दूर करना है। जहां यह बुनियाद हिलती है

12:36

वहां से मसाइल शुरू हो जाते हैं। ये जो

12:38

थ्री पीस की जो ट्राईप्टाइड रिलेशनशिप है,

12:41

इसको एथिकल होना चाहिए। अब इसकी एथिकल

12:45

होने की जो प्रिंसिपल्स क्या हैं?

12:47

प्रिंसिपल्स ये है कि जी फार्मा इंडस्ट्री

12:50

और डॉक्टर्स

12:52

वो ये इंश्योर करें कि इस रिलेशनशिप के

12:55

अंदर मरीज को फायदा होगा और मरीज के

12:59

इंटरेस्ट जो है वो सेफगार्ड किए जाएंगे।

13:01

बिकॉज़ दिस रिलेशनशिप एकिस्ट्स बिकॉज़ ऑफ़ द

13:05

पेशेंट। तो अल्टीमेट बेनिफिशरी जो है वो

13:09

मरीज है और मरीज होना चाहिए। लेकिन

13:11

पाकिस्तान में यह अखलाकी बुनियाद अपनी जगह

13:14

से हिल गई है। हमने इस वीडियो के शुरू में

13:16

बताया था कि डॉक्टर्स दवाई का जेरिक

13:18

फार्मूला लिखने के बजाय मखसूस ब्रांड्स के

13:20

नाम लिखते हैं। जिसकी वजह से मरीज महंगी

13:23

दवाई लेने पर मजबूर होता है। इस प्रैक्टिस

13:26

की वजह फार्मास्यूटिकल ब्रांड्स और

13:28

डॉक्टर्स के दरमियान एक नेक्सेस है। होता

13:31

यह है कि कुछ फार्मासटिकल कंपनीज़ के

13:33

नुमाइंदे डॉक्टर्स के पास आते हैं और इनके

13:36

साथ डील करते हैं कि आप हमारी दवा लिखेंगे

13:38

तो हम आपको अपने प्रॉफिट में से इतना

13:41

परसेंटेज देंगे और बात परसेंटेज पर नहीं

13:44

रुकती। जितना डॉक्टर फार्मा कंपनी को

13:47

बिजनेस देता है, उतना ही फार्मा कंपनी इस

13:50

डॉक्टर को मुराद देती है। यह मराहत

13:52

क्लीनिक की रनोवेशन कराने से लेकर गाड़ी

13:54

देने और फॉरेन टूर्स कराने से लेकर हर

13:56

किस्म के जाती फायदे देने तक हर शक्ल में

14:00

दी जाती है। इसकी तफसीलात आप खुद ही

14:02

डॉक्टर्स और फार्मा कंपनीज़ के मालिकान से

14:05

सुने।

14:06

पूरी एक बुक होती है। इस तरह ला करती थी।

14:08

उसके अंदर पैकेजेस थे कि अगर आप ये वाला

14:11

पैकेज लेना चाहते हैं। आपने अ जाना है

14:16

थाईलैंड जाना है। अब थाईलैंड कोई नमाज

14:20

पढ़ने तो नहीं जाएगा। उनकी सारी मेडिसिन

14:22

होती है। उसके अंदर लिखा होता है अगर आप

14:23

इतने का बिज़नेस देंगे तो आपका यह पैकेज

14:26

है। आप इतने का बिज़नेस देंगे तो यह पैकेज

14:29

है। अच्छा वो दोनों तरीके से करते हैं।

14:33

फिर वो कहते हैं कि आपने जो है ना 30 40%

14:36

आपने बिजनेस [संगीत] हमें पहले दे देना है

14:38

और बाकी जो होगा वो फिर बाद में आके

14:40

दीजिएगा। आपको हम ये विजिट करा देंगे। ये

14:43

चीज कर देंगे।

14:43

वो हर चीज ऑफर करती हैं डॉक्टर्स को।

14:47

अखलाकी गैर अखलाकी

14:50

ऐसी चीजें जो हम बयान नहीं कर सकते या यह

14:53

है कि डॉक्टर उनसे खुद हर चीज मांगना शुरू

14:55

कर देते हैं और एक डील बन जाती है उनकी और

14:58

वो डील एक-ए साल की भी बन सकती है।

15:00

अब मरीज के पास खौफ है। कंपनी के पास इलाज

15:04

है। बीच में कस्टमर डॉक्टर है। एक फार्मा

15:07

कंपनी डॉक्टर से डील करती है। एक

15:09

अंडरस्टैंडिंग है कि डॉक्टर साहब ये हमारी

15:12

प्रोडक्ट है। एक या तीन प्रोडक्ट्स हैं।

15:14

ये आप एक साल तक अगर लिखेंगे तो हम आपको 1

15:18

2 3 4 ये चार चीजें देंगे जिसके अंदर कोई

15:21

गाड़ी भी हो सकती है जिसके अंदर इंटरनेशनल

15:23

ट्रिप्स हो सकते हैं विद फैमिली जिसके

15:26

अंदर पर्सनलाइज्ड बहुत सारे फेवर्स हो

15:29

सकते हैं जिसकी बुनियाद पर फिर वो डॉक्टर

15:32

अनफॉर्चूनेटली

15:34

ऑब्लाइज्ड फील करता है या करती है एक

15:37

सोसाइटियां बनी हुई है गैस्ट्रोलॉजी

15:39

सोसाइटी हेपोटोोलॉजी सोसाइटी तो फ्रांस

15:41

सोसाइटी फ्रांस सोसाइटी सारी सोसाइटियां

15:42

बनी हुई है पूरा पूरा एक कार्टिल बन गया

15:44

है हमारे मसीहाओं का। वो कार्टिल जो है

15:47

कंपनी से नेगोशिएट करता है। कंपनी उनके

15:49

लिए कॉन्फ्रेंस [संगीत] अरेंज करती है। वो

15:50

एंजॉय करते हैं। ये तो पब्लिक के सामने ये

15:53

साइंटिफिक कॉन्फ्रेंस हो रही है। उसने

15:55

बताया कि ये डॉक्टर ऐसा करता है

15:58

कि जाकर

16:01

पहले मेडिकल स्टोर पे जो उसने दवाई लिखनी

16:06

है [संगीत] या जिस कंपनी से उसकी डील है

16:07

वो काउंट करता है कि कितने सिरप रखे हुए

16:11

हैं और कितने इंजेक्शन रखे हुए हैं और

16:15

वापस आते हुए जब उसकी ड्यूटी खत्म हो जाती

16:18

है फिर जाकर वो सारी पर्चियां जमा करके

16:21

उसके सामने ले जाता है और वहां काउंट करा

16:23

देता है मैंने इतने ने इतनी मेडिसिन लिखी

16:25

मेरा इतना कमीशन लिया [संगीत] मुझे दे दे।

16:27

हमने डॉक्टर्स और फार्मा एसोसिएशंस के

16:29

नुमाइंदों के सामने ये सुरते हाल रखी तो

16:31

उन्होंने इस हकीकत को कुबूल जरूर किया।

16:34

ये

16:36

सेंसिटिव सब्जेक्ट होगा। कई लोगों के लिए

16:38

मेरे लिए तो बिल्कुल भी सेंसिटिव नहीं है।

16:40

बिकॉज़ आपने जो बात की ये बात अगर यहां

16:43

पहुंची है तो ये नहीं हो सकता कि इसमें

16:44

सदाकत ना हो। यह नहीं हो सकता कि वी हैव

16:47

नॉट कम अक्रॉस इट। यह बिल्कुल है। अच्छा

16:50

अब मैं आपको इसके कुछ पैराडाइम्स पे जवाब

16:52

दूंगा ताकि आपको एक अंडरस्टैंडिंग मिले।

16:54

इज दिस अ फिनोमिना दैट इज़ इन पाकिस्तान?

16:57

उसका जवाब है नहीं। इट्स अ ग्लोबल

16:59

फिनोमिना। ग्लोबल फिनोमिना में क्या है?

17:02

ये अमेरिका में भी होता है। ये काम कनाडा

17:05

में भी होता है। ये काम न्यूजीलैंड में भी

17:08

मिलेगा। ये काम जापान में भी मिलेगा।

17:09

जैसे मैंने आपसे कहा कि उसकी बुनियादी वजह

17:11

जो है वो ये है खौफ खुदाई की कमी। और अब

17:14

जो वो लूप होल है वो सिर्फ यह है कि जाहिर

17:16

है किसी भी जगह पे बहुत इंटरेक्शन होता है

17:18

तो बेनिफिट्स और फ्रेंच बेनिफिट्स और फिर

17:21

ये चीजें आहिस्ता आहिस्ता माशरे में जड़

17:22

पकड़ लेती है।

17:24

लेकिन इन दोनों हजरात ने कहा कि यह मसला

17:26

इतना बड़ा नहीं है जितना इसको बना दिया

17:28

गया है। शोर ज्यादा है और बेकायदगी इंतहाई

17:31

कम है।

17:32

हम कहते है ना सारी उंगलियां एक जैसी नहीं

17:34

होती। तो आपको ब्लैक शिप हर जगह मिलेगा।

17:37

कोई कारोबार नहीं हो सकता और यह सिर्फ

17:40

फार्मासटिकल की बात नहीं है। आप किसी

17:42

किस्म का कारोबार उठा लें खुल के जाहिर है

17:45

कोई एक्चुअल स्टैटिस्टिक्स तो नहीं होती

17:47

[संगीत]

17:47

लेकिन ये के मेरा ख्याल है कि 10-15% से

17:51

ज्यादा जो है वो डॉक्टर्स इस इस जो

17:53

बिल्कुल एक्सट्रीम जिसको आप कहना कि जी ये

17:56

फॉरेन ट्रिप्स हैं या बहुत एक्सपेंसिव

17:57

गिफ्ट्स हैं इस तरह की चीजें हो तो उसमें

17:59

इन्वॉल्व [संगीत] नहीं होते यूजली और वो

18:02

कर भी नहीं सकते मेरा ख्याल है। वो कृष्ण

18:03

बिहारी नूर है ना वो सच को डिफाइन करने के

18:06

लिए एक शेर पढ़ते हैं। सच घटे या बढ़े

18:09

[संगीत] सच ना रहे और झूठ की कोई इंतहा ही

18:13

नहीं। चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो।

18:16

आईना झूठ बोलता ही नहीं। यार आप किसी को

18:19

भी ले जाएं। 10% अगर डॉक्टर अच्छे हैं तो

18:25

फिर भी तब भी यह बहुत बड़ी बात होगी।

18:27

फार्मा कंपनीज़ का पैकेजेस ऑफर करना और

18:30

डॉक्टर्स का रिश्वत लेना किस हद तक आम हो

18:32

चुका है? इस पर हमारे मुख्तलिफ मेहमानों

18:34

ने मुख्तलिफ बातें की। लेकिन मजे की बात

18:36

यह है कि इस मौजू पर एक मुकम्मल रिसर्च हो

18:38

चुकी है। इस तहकीक में पाकिस्तान के साबिक

18:41

वजीर सेहत डॉक्टर जफर मिर्जा की

18:43

कंट्रीब्यूशन भी थी। जी ये आगा खान

18:46

यूनिवर्सिटी ने एक प्रोजेक्ट किया था और

18:49

आगा खान यूनिवर्सिटी के साथ इसमें पार्टनर

18:51

था लंदन स्कूल ऑफ हजीन एंड ट्रॉपिकल

18:53

मेडिसिन और यह कराची के अंदर जीपीस में यह

18:57

स्टडी की गई थी कि अगर उनको यह इन चीजों

19:01

के बारे में

19:03

बताया जाए कि किस तरह फार्मासटिकल

19:06

इंडस्ट्री डिफरेंट टैिक्स यूज करती है और

19:08

जिसकी वजह से उनके नुस्खे जो है वो एक खास

19:12

सिमथ [संगीत] में चलना शुरू हो जाते हैं।

19:13

खास तरह की दवाइयां लिखते हैं और इसके

19:16

बारे में उनको लेक्चर्स दिए गए। उनको

19:19

सेमिनार्स दिए गए। उनको मुख्तलिफ वीडियोस

19:23

दिखाई गई और एक ग्रुप ऐसा था कि जिनके

19:26

जिनके साथ ये सब कुछ नहीं [संगीत] किया

19:28

गया। तो ख्याल ये था कि जिन लोगों के ऊपर

19:30

ये मेहनत की गई है और उनको इसके बारे में

19:32

सेंसिटाइज किया गया है उनकी जो

19:35

प्रैक्टिससेस हैं और उनका जो नॉलेज है वो

19:38

इस सिलसिले में बढ़ जाएगा और उनका

19:39

बिहेवियर चेंज हो जाएगा इन टर्म्स ऑफ

19:42

राइटिंग मेडिसिंस [संगीत]

19:45

मोर रैशनली रादर देन अंडर द प्रेशर ऑफ द

19:48

फार्मासटिकल इंडस्ट्री। लेकिन उस तहकीक ने

19:52

यह साबित किया कि नथिंग वर्क्स। यह चीजें

19:55

बिल्कुल काम नहीं करती। तहकीक का नतीजा

19:58

हैरानक था। दोनों ग्रुप्स के तकरीबन 40%

20:01

डॉक्टर्स ने रिश्वत कबूल कर ली। यानी हर

20:04

दूसरे से तीसरा डॉक्टर फार्मासटिकल कंपनी

20:07

से रिश्वत लेने में मुलव्विस निकला। मजीद

20:09

हैरानगी की बात यह है कि तहकीक के मुताबिक

20:12

जिन डॉक्टर्स ने रिश्वत कबूल करने से

20:14

इंकार किया, उसकी वजह कोई अखलाकी उसूल

20:17

नहीं था। बल्कि वजह यह थी कि उन्होंने

20:19

दूसरी कंपनीज के साथ बेहतर डील्स की हुई

20:22

थी। हमने तहकीक एसोसिएशंस के नुमाइंदों के

20:24

सामने रखी तो उनका रिएक्शन कुछ यूं था।

20:28

[हंसी]

20:29

अच्छा पहली बात है कि मैंने ये रिपोर्ट

20:31

देखी नहीं है [संगीत] तो मैं इस पर कमेंट

20:32

नहीं कर सकता कि रिपोर्ट क्या कह रही है?

20:34

इट्स अ शॉकिंग डाटा जो आपने बताया कि अगर

20:37

50% का ऐसा डाटा है। मगर वो डाटा किस

20:40

सरकमस्ट्ससेस में है। कितना [संगीत]

20:41

सीरियस कोई इसको देख रहा था। या शुगर में

20:43

एक्सरसाइज थी। अब देखिए ना सबसेट इज़

20:45

वेरीेंट। अगर आ खान के डॉक्टर ने रिसर्च

20:47

की है और एक हॉस्पिटल या कोई ऐसी चीज उठा

20:50

ली है जो बिल्कुल ही किसी आपके फारफल

20:52

एरिया का है। आई डोंट नो व्हाट काइंड ऑफ

20:54

लेकिन ना आप पाकिस्तान में वैसे ही जनरली

20:57

[संगीत]

20:58

आप वी आर एज गुड एज अ एवरीबॉडी अराउंड अस।

21:04

ठीक है? पाकिस्तान में करप्शन लेवल हाई

21:07

है। ये कैसे हो सकता है कि करप्शन लेवल एक

21:10

जगह पे हाई है, वो दूसरी जगह नहीं आएगा।

21:12

सो कुछ ना कुछ तो उसकी रिफ्लेक्शन आपको

21:14

करप्शन की मिलेगी। डॉक्टर फार्मानेक्सिस

21:16

में अब एक नया मोड़ आ गया है। पहले

21:19

डॉक्टर्स को रिश्वत ऑफर होती थी। अब

21:21

उन्होंने रिश्वत लेने के लिए ब्लैकमेल

21:23

करना शुरू कर दिया है।

21:24

छोटे-छोटे ग्रुप बन गए डॉक्टरों के किसी

21:27

स्पेशलिटी के मतलब आई स्पेशलिस्ट हो गए या

21:29

फलाने हो गए। उन्होंने हर शहर में अपनी

21:32

कॉन्फ्रेंस करने लगे और कंपनियों को मजबूर

21:35

किया कि आप हमारी कॉन्फ्रेंस में स्टॉल

21:37

लगाएं और स्पोंसर करें और अब तो एक स्टॉल

21:41

के डेढ़-ढ़ करोड़ और दो ₹2 करोड़ भी

21:43

मांगने लगे हैं।

21:44

तो आपको ऐसे प्रिस्रिप्शंस भी मिलेंगे।

21:47

मैंने भी देखे क्योंकि मैं इस फील्ड में

21:49

काम करता हूं और यह मेरा एरिया है रिसर्च

21:51

का भी कि जहां पर एक प्रोफेसर साहब का एक

21:54

प्रिस्रिप्शन मैं अगर आपको दिखाऊं तो

21:57

उन्होंने एक मरीज को तकरीबन मैंने देखा

22:00

हुआ है खुद अपनी आंखों से शायद आठ के करीब

22:03

दवाइयां थी वो सारी एक कंपनी की थी एक

22:05

कंपनी की यह हो नहीं सकता आप एक मरीज को

22:10

अगर आपको जरूरत है इतनी सारी दवाई देने की

22:13

और वो सिर्फ एक कंपनी की ही बेस्ट हो

22:14

अक्सर तो मैं आपको बताऊं इसमें से क्विक्स

22:16

होते आपको पता है कोएक्स डॉक्टर से ज्यादा

22:18

कोक्स इवन कराची जैसे शहर के अंदर भी तो

22:22

कोक्स को टारगेट वो कहलाते तो डॉक्टर ही

22:24

है ना लिखा हुआ तो डॉक्टर होता है उनके

22:25

ऊपर पाकिस्तान में ये सब कुछ तो हो रहा है

22:27

ना किसको नहीं पता किसके घर में डॉक्टर

22:29

नहीं है किसके घर में डॉक्टर को उमरे पे

22:32

नहीं भेजा जा रहा हर जगह है ना किसको

22:34

गाड़ी नहीं मिल रही किसको पैसे नहीं मिल

22:36

रहे कौन सा होटल ऐसा है जहां पर

22:38

कॉन्फ्रेंस नहीं हो रही कौन सा मुल्क ऐसा

22:41

है जहां पर यह कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे

22:43

जाकर कॉन्फ्रेंस के नाम पर पैसा खर्च नहीं

22:45

होता किसने हर जगह नजर आ रहा है। ये तो

22:47

छुपी हुई

22:50

हकीकत ना खुलम खुल्ला हकीकत है।

22:52

लेकिन मेरा ख्याल है कि एकिस्टिंग जो है

22:54

वो सिवाय इसके कि आपका सेल्फ कॉन्शियस और

22:57

उसके अलावा कोई चीज ऐसी नहीं है कि जो

22:59

इसको जो है वो मतलब इस पे कोई बाकायदा कोई

23:03

लॉ हो और वो उसको इनफोर्स हो सके।

23:05

डॉक्टर्स को रिश्वत ऑफर करने के कुछ तो

23:07

रिवायती तरीके हैं जिनका हमने जिक्र कर

23:10

दिया। लेकिन बाज औकात इंतहाई सटल तरीके से

23:12

डॉक्टर्स को अब्लाइज किया जाता है और इसकी

23:15

एक बड़ी मिसाल मेडिकल कॉन्फ्रेंसेस हैं।

23:17

मेडिसिन एक ऐसा शोबा है जिसमें मुस्तकिल

23:19

जिद्दत आती रहती है और डॉक्टर्स के लिए

23:21

जरूरी होता है कि वो नए दरियाफ्त होने

23:24

वाले इलाज और नई फैलने वाली बीमारियों के

23:26

मुतालिक इनफॉर्मड रहें और एक दूसरे से

23:29

मुस्तकिल इंटरेक्शन करते रहें। इस

23:30

इंटरेक्शन का एक तरीका मेडिकल

23:33

कॉन्फ्रेंसेस है। डॉक्टर फार्मा नेक्सिस

23:35

की जब भी बात होती है तो इन कॉन्फ्रेंसेस

23:37

का जिक्र जरूर होता है। अब इसके अंदर एक

23:40

डिस्टिंशन पे आ जाए। बहुत से लोग बात को

23:42

गलत अंडरस्टैंड करते हैं। हर चीज को समझते

23:45

हैं कि यह डॉक्टर के साथ ब्राइप चल रही

23:47

है। आपको पता है इंटरनेशनलली देयर इज अ

23:50

कांसेप्ट ऑफ सीएमई। ठीक है? कंटीन्यूअस

23:53

मेडिकल एजुकेशन। डॉक्टर्स को बाहर ले

23:56

जाना, उनको अगर पढ़ाना है, उनको नई थेरेपी

24:00

से इंट्रोड्यूस करना है और पेशेंट वेलफेयर

24:03

पर काम करना है। इसमें कतन पूरी दुनिया

24:06

में मुमानियत नहीं है। ये सारा जो पैसा

24:08

खर्च हो रहा है पढ़ने के ऊपर कॉन्फ्रेंस

24:10

में ले जाने के ऊपर ये सब उस पर हो रहा है

24:13

जो प्रिस्राइब करता है दवा को। उस

24:16

साइंटिस्ट पे तो नहीं कर रहे। कभी सुना

24:18

मैंने कंपनी एक्स चार कराची यूनिवर्सिटी

24:20

से साइंटिस्ट को ले गई हो और बाहर पढ़ने

24:22

के लिए

24:23

तो मेडिकल कॉन्फ्रेंसेस के जाहिर है भाई

24:25

स्टॉल उसी चीज का लगेगा ना जिसकी वहां पे

24:27

मार्केट होगी तो वहां पे 50 स्टॉल लगे हुए

24:29

हैं या 25 स्टॉल लगे हुए हैं। आप हर एक तो

24:31

ये नहीं कर सकता कि वो हर डॉक्टर हर एक की

24:34

प्रोडक्ट लिखेगा। वो अपनी चीजों को

24:35

प्रेजेंट करते हैं, प्रोजेक्ट करते हैं और

24:38

उसके अगेंस्ट जो है वो उस एसोसिएशन को या

24:40

उस इंस्टट्यूट को जिसकी वो कॉन्फ्रेंस हो

24:43

रही है उसको जो है वो जो स्टॉल के होते

24:45

हैं वो आपको पैसे देते हैं जो कि पेशेंट्स

24:48

के बेनिफिट में और एजुकेशन के लिए जो है

24:50

फदर इस्तेमाल होते हैं।

24:51

तो ये जो कॉन्फ्रेंसेस हैं अगर ये फाइव

24:55

स्टार होटलों पर पाबंदी लग जाए कि कोई

24:57

मेडिकल कॉन्फ्रेंस

25:00

फाइव स्टार होटल में नहीं होगी। मेडिकल

25:02

कॉलेजेस में होंगी या मेडिकल यूनिवर्सिटी

25:04

में कॉन्फ्रेंस होगी। तो आप यह अंदाजा

25:07

लगाएं कि फिर वो प्योर साइंस होगी। फिर

25:09

वहां कोई सैर करने नहीं आएगा। डॉक्टर आएगा

25:11

तो सुनने के लिए आएगा क्योंकि वहां कोई

25:14

घूम फिर नहीं सकता फाइव स्टार होटल की

25:16

तरह।

25:16

बात यह है कि मेडिकल रिसर्च के लिए फार्मा

25:19

कंपनीज़ की फंडिंग जायज भी है और जरूरी भी।

25:22

इस सिलसिले में बाज औकात डॉक्टर्स को

25:24

फॉरेन टूर्स भी कराए जाते हैं। लेकिन क्या

25:27

यह वाकई मेडिकल रिसर्च और डॉक्टर्स की

25:29

काबिलियत को बढ़ाने के लिए होते हैं या

25:31

फार्मासटिकल कंपनीज़ के प्रॉफिट्स को

25:33

बढ़ाने के लिए। क्या आप यहां से उठा के

25:36

किसी को बाहर ले जाएं या उसको टिकट के

25:38

पैसे दे दें या उसको पैसे दे दें कि वो

25:40

जाके सैर करके आ जाए या किसी को आपने कैश

25:42

कंसीडरेशन पकड़ा दी। इस किस्म का कोई काम

25:44

किया है। दिस इज एब्सोलटली रेडिकुलस।

25:48

बिल्कुल अनएथिकल है। मगर जहां आप एक हेल्थ

25:52

केयर प्रैक्टिशनर की एजुकेशन में इजाफा कर

25:55

रहे हैं। यह अमेरिका में भी अलाउड है।

25:58

कनाडा में भी अलाउड है। दुनिया के किसी

26:00

डेवलप्ड कंट्री में चले जाएं। हर जगह

26:02

अलाउड है। हमने बहुत सारी खबरें पढ़ी

26:04

अखबारों में कि फलानी कंपनी है उसका 150

26:08

डॉक्टर बाहर लेके जा रही है। यार इस चीज

26:10

को मत देखें। 150 गए, 250 गए, 50 गए। करना

26:13

क्या-क्या है? जो लोग प्रिसेप्शन नहीं

26:15

लिखते उनको भी ले जाएं ना कभी। नर्स को भी

26:17

तो ले जाएं।

26:19

वो भी तो अस्पताल में ही काम करते हैं।

26:21

टीचर्स को भी ले जाएं जो फार्मसी में पढ़ा

26:23

रहे हैं जो मेडिकल कॉलेज में पढ़ा रहे

26:24

हैं। वो प्रैक्टिस नहीं करते। डॉक्टर्स के

26:27

फॉरेन टूअर से लेकर उनकी कॉन्फ्रेंसेस,

26:30

गाड़ियों और ऑफिस की रनोवेशन तक। फार्मा

26:32

कंपनीज़ की जानिब से जो भी मुराद दी जाती

26:35

है, उसका मकसद एक ही होता है कि डॉक्टर

26:38

अपने नुस्खे में उनकी दवाइयां लिखें।

26:40

रिसीविंग एंड पर मैं और आप होते हैं जो इस

26:42

नुस्खे को आसमानी सहीफा समझते हैं और जो

26:45

दवाई डॉक्टर ने लिखी है उसी को हरफ आखिर

26:48

और वाहिद ऑप्शन समझते हैं। लेकिन कुछ दवा

26:51

साज कंपनीज़ ऐसी हैं जो इस मसले का अमली हल

26:54

पेश कर रही हैं। देखिए दवा हेल्थ केयर पे

26:57

अगर हमारे पास कोई भी पेशेंट आता है या

26:59

उनके अटेंडेंट आते हैं तो हम उनकी

27:01

प्रिस्रिप्शन को अपने सिस्टम के अंदर एंटर

27:02

करते हैं और हमने एक इनोवेटिव एक सिस्टम

27:04

जनरेट किया जो कि उसको थ्री विंडो

27:06

सॉल्यूशन हम कहते हैं। हम उसकी जब

27:08

प्रिस्रिप्शन एंटर करते हैं तो पहली विंडो

27:10

में उसको उसका प्रिस्रिप्शन ब्रांड दिखाया

27:11

जाता है। मतलब आप मेरे पास एक ब्रांड लेने

27:13

थे ए आपको मैं उसी की कॉस्ट दिखाऊंगा कि

27:15

इसमें आपको मैं जो मैक्सिमम जो आपकी

27:18

डिस्काउंट कर सकता हूं उसके बाद आपको

27:19

कॉस्ट क्या पड़ेगी। अगर आप उसको अफोर्ड कर

27:22

सकते हैं आप बिल्कुल वही लेके चले जाएं।

27:24

लेकिन हम आपको दो और ऑप्शन देते हैं।

27:26

ऑप्शन बी में अब आपको दिखाते हैं कि पहले

27:28

ब्रांड के मुकाबले में सेकंड कॉस्ट

27:30

इफेक्टिव ऑप्शन आपके पास कौन सा है। और

27:32

थर्ड विंडो के अंदर हम आपको दिखाते हैं कि

27:34

मोस्ट कॉस्ट इफेक्टिव ऑप्शन कौन सा है। तो

27:36

इसमें ये होता है जो रियल टाइम के अंदर कि

27:38

आपकी कॉस्ट अराउंड 40 टू 50% तक रिड्यूस

27:41

हो जाती है जो कि आप ओरिजिनल ब्रांड लेने

27:43

आए हुए थे उससे। जैसे एग्जांपल के तौर पे

27:45

मैं हम देखते हैं कि ओमेप्राजोल बहुत

27:47

ज्यादा यूज़ होने वाला एक पीपीआई है। उसके

27:49

अंदर मैं अभी इनोवेटर की बात नहीं कर रहा।

27:51

मैं आपको जेनेरिक ब्रांड की बात कर रहा

27:52

हूं जो पाकिस्तान में बन रहा है। उसका एक

27:55

बॉक्स आपको मिलेगा अराउंड ₹800। अब आप

27:58

डल्थ केयर में आते हैं तो मैं आपको 800

28:00

वाला ऑप्शन डेफिनेटली आपको विंडो ए में दे

28:02

रहा हूं। लेकिन अगर आप थर्ड विंडो तक

28:04

जाएंगे तो यही मेडिसिन आप 250 से ₹300 में

28:06

लेके जा सकते हैं। तो आप समझ सकते हैं

28:08

कहां पे ₹800 आप पे कर रहे थे और कहां

28:10

₹300 के अंदर आपको सशन मिल गया। पाकिस्तान

28:12

की फार्मा इंडस्ट्री खूब तरक्की कर रही है

28:15

और इसकी तरक्की से पाकिस्तान के एक्सपोर्ट

28:17

भी बढ़ रहे हैं और मईत भी चल रही है। मगर

28:20

कुछ प्रैक्टिसेस ऐसी हैं जिससे ना सिर्फ

28:22

फार्मा इंडस्ट्री का फायदा डबल हो सकता है

28:24

बल्कि वो प्रैक्टिससेस अपनाने से

28:26

फार्मासटिकल कंपनीज़ के असल मकसद यानी

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बीमारियों में कमी और इलाज तक रसाई को भी

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पूरा होने में मदद मिलेगी। इसमें सबसे

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अच्छी मिसाल हमारा पड़ोसी मुल्क भारत है।

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भारत के अंदर पिछले चंद सालों के अंदर

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जेनेरिक दवाइयों के थ्रू उन्होंने पूरा

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रेवोल्यूशन अपने मुल्क के अंदर लेकर आए।

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जिसके तहत स्पेशली वो क्लास जो कि आज

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अफोर्डेबिलिटी ना होने की वजह से हमारी

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प्रिस्रिप्शन क्लास के अंदर मौजूद ही नहीं

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है। उनको उन्होंने ऐड किया। अब एक पेशेंट

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किसी भी अफोर्डेबिलिटी किसी भी मजबूरी की

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वजह से जिसमें उसके पास या तो पैसे नहीं

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है कोई और मजबूरी है उसके तहत जब वो हमारी

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दवा खरीद ही नहीं रहा तो हमारी इंडस्ट्री

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का पार्ट नहीं है। जेनेरिक रेवोल्यूशन

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लाकर या जेनेरिक की अवेयरनेस देकर हम

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पाकिस्तान के अंदर एक बहुत बड़ा तबका वो

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ऐड कर सकते हैं जो आज हमारी दवाई खरीद ही

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नहीं रहा और उसके खरीदने से हमारी इसी

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इंडस्ट्री को वापस बेहतरीन हासिल होगी।

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फार्मासटिकल इंडस्ट्री में तीन फरीकों का

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किरदार होता है। मरीज, डॉक्टर और

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फार्मासटिकल कंपनियां। मरीज के लिए जरूरी

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है कि वह यह जरूर चेक करें कि डॉक्टर ने

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नुस्खे में जो दवा तजवीज की है, इस

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फार्मूले की कितनी ब्रांड्स किस-किस कीमत

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पर दस्तियाब है। ताकि वह अपनी जेब के

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मुताबिक दवा खरीद कर ट्रीटमेंट यकीनी बना

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सकें। डॉक्टर्स दवा तजवीज करते वक्त अपने

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मरीज की माली हालत का जरूर ख्याल रखें।

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क्योंकि अगर दवा महंगी हुई तो वह इलाज से

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भी महरूम हो सकता है। फार्मा इंडस्ट्री को

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चाहिए कि वो मुतबादिल दवा की खरीदारी का

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ऑप्शन मौजूद होने की आगाही पैदा करें।

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अफोर्डेबल दवाओं की दस्तियाबी से आवाम के

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साथ फार्मा इंडस्ट्री को भी जरूर फायदा

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होगा। दुनिया भर में किसी भी कारोबार का

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मकसद पैसा कमाना होता है। मगर कुछ बिजनेस

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ऐसे होते हैं जिसमें आपको पैसे के साथ

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इज्जत भी कमाना होती है। अखलाकियात की

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पासदारी भी करना होती है। मेडिकल और

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फार्मा भी ऐसे ही शोबे हैं जिसमें प्रॉफिट

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के साथ एथिक्स का ख्याल करना भी बहुत

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जरूरी है। वरना सिर्फ पैसे कमाने की

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सलाहियत को अगर कामयाबी का मेरार बना लें

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तो पावलो एस्कोबार हमारी पूरी फार्मा

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इंडस्ट्री से ज्यादा बड़ा और कामयाब था।

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[संगीत]

Interactive Summary

यह वीडियो पाकिस्तान में फार्मास्यूटिकल उद्योग, डॉक्टरों और दवाओं की प्रिस्रिप्शन के बीच के जटिल और अक्सर अनैतिक संबंधों की पड़ताल करता है। वीडियो में बताया गया है कि कैसे दवा कंपनियां डॉक्टरों को महंगे ब्रांड लिखने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे मरीजों पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है और कई लोग इलाज छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। इसमें जेनेरिक बनाम ब्रांडेड दवाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है और यह तर्क दिया गया है कि डॉक्टरों को केवल केमिकल फार्मूला लिखना चाहिए ताकि मरीज अपनी जेब के अनुसार सस्ता विकल्प चुन सकें। अंत में, यह सुझाव दिया गया है कि नैतिकता और मरीज के कल्याण को मुनाफे से ऊपर रखने की आवश्यकता है।

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