The Dirty Secret Behind Karachi's Collapse (Loved Jiye Bhutto? Then You MUST Watch This)
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मैं कोटा गया। कोटा वास् क्लीनर देन
कराची।
मुल्तान गया। पंजाब से तो मैं मुकाबला ही
नहीं करता भाई।
शर्म का मुकाम नहीं है कि आप अगर एक नहीं
टर्शरी सिटी ऑफ़ जी।
पीपल्स पार्टी को क्या प्रॉब्लम है कराची
के साथ?
कोई प्रॉब्लम नहीं है। पीपल पार्टी कांट
यू बेटर।
एमक्यूम पीपल्स पार्टी। कराची वालों ने
उनको वोट नहीं दिया। क्या इस चीज की भी
सजा मिलती है कराची को? नहीं नहीं। अगर आप
वोट देते भी तो फिर बहुत ज्यादा फर्क नहीं
होता।
दो इलाके सबसे बुरी तरह बर्बाद हो गए।
उसमें नार्थ नाज़ाबाद फेडरल एरिया ये
एरियाज मतलब डिस्ट्रॉयड अब्सोल्यूट वाह
मोइस अब्सोल्यूटली कराची में जितने का
बीमार का फ्लैट लेते हैं ना आप लाहौर में
500 गज का डीएचए में घर ले ले लेते
आपने वो घर देखा है
बेहतरीन घर होता
आपने उस घर की खिड़की से मनाजर क्या होता
है एक तो वो हमें डीएचए भी ठीक नहीं मिला
कराची
वालों की कराची वालों का गिला होता है ना
90ज में आपने डीएमसी एसएमसी एनईडी वही
पूरे-पूरे बैच गायब गायब हां गायब आउट कोई
डॉक्टर कोई इंजीनियर नहीं है कराची में
इसका
एक तो वडेरे हैं जो इंटीरियर सिंध में एक
कराची में जो सेकंड इंचार्ज था वो भी एक
वडेरा होता। पीपल्स पार्टी का बंदा आके
अपनी टीवी पे बैठ के पहले अपनी घड़ी छुपा
रहा है। भाई क्यों तो वो बड़े साहब ना देख
लें। पीपल्स पार्टी की 18वीं तरमीम पास
हुई और उनके सूबे में एक्चुअली सीरियस मनी
आना शुरू हुआ। एक जीआईटी कायम की गई थी और
उनके खिलाफ जो ये सिलसिला शुरू हुआ था वो
बदनियती पर मम्नी था। उनको उनके मंतकी
अंजाम तक पहुंचाने के लिए नहीं था।
नहीं था। कराची को सूबा बनाया जाएगा।
विफाक का दिवालिया निकल चुका है। पैसे
चाहिए। पैसे कहां है? सुबह के पास है। कुछ
ना कुछ तो इसका होगा। बिलावल भुट्टो ने
गिल्गित बल्तिस्तान में अपनी तकरीर के
दौरान कहा साजिश हो रही है कि कराची को
वफाक से कंट्रोल किया जाए। इज दैट अ सशन?
इट्स अ सशन टू द पीपल्स पार्टी। आ बट इट्स
नॉट अ सशन।
जजारी साहब कितने पॉपुलर हैं। आई डोंट
नोवे।
अगर जजारी साहब बिल्कुल भी पॉपुलर नहीं
है।
हम
और अगर ये सिस्टम बस एक पावर बेस्ड सिस्टम
है तो पावर तो इससे ज्यादा है वहां पे। हम
अगर यह शतरंज का खेल है तो बोर्ड तो किसी
और के पास है ना वो जेल में बैठा है। इस
खेल में तायु मरातिब है जरूरी। शातिर की
इनायत से तू फर्जी मैं प्यादा।
हाय।
बेचारा प्यादा तो है मोहरा ए नाचीज। पर
फर्जी से भी पोशीदा है शातिर का इरादा।
क्या बात है।
अस्सलाम वालेकुम।
पिछले जुम्मे को रफ्तार ने एक
डॉक्यूमेंट्री अपलोड की है। जेए भुट्टो।
उसका टाइटल है कि कराची के साथ क्या हुआ?
कराची कैसे तबाह हुआ और किसने तबाह किया?
बहुत सारे लोगों ने डॉक्यूमेंट्री देखी
है। बहुत अच्छा फीडबैक आया है। बहुत लोगों
ने पसंद किया है। थैंक यू सो मच फॉर दैट।
प्लीज कीप सपोर्टिंग रफ्तार। हमें सिर्फ
आपकी सपोर्ट की जरूरत है और किसी की नहीं।
लेकिन उस डॉक्यूमेंट्री में बहुत सारे ऐसे
सवालात उठे उस डॉक्यूमेंट्री के नीचे आने
वाले कमेंट्स को कि जिसको हमने सोचा कि
शायद इनको भी डिस्कस करना जरूरी है और
उसके लिए मैंने अपने एक दोस्त और
पाकिस्तान के एक टॉप लॉयर अब्दुल मोइज
जाफरी को आज हमारे स्टूडियो से बुलाया है।
मोइ जाफरी को आप अक्सर टेलीविजन चैनल्स पे
बड़ा संजीदा एनालिसिस देते हुए देखते
देखते रहे होंगे। लेकिन इनकी एक और साइड
है और वो है जब आप इनका एक्स को फॉलो
करें। अगर आप Twitter पे इनके Twitter
अकाउंट को फॉलो करें एक्स अकाउंट को तो आप
देखेंगे कि मोइस जाफरी लॉ से ज्यादा कराची
की सड़कों के बारे में बात कर रहे होते
हैं। अस्सलाम वालेकुम मोइस
सलाम वालेकुम
कैसे हैं?
ठीक-ठाक थैंक यू फॉर हैविंग मी। मैं कचरे
का क्रॉनिकलर हूं अकॉर्डिंग टू
कचरा क्रॉनिकल
अकॉर्डिंग टू नाकद्दीन
मोइस क्या प्रॉब्लम है आपको? आप कोर्ट जा
रहे होते हैं। आप और अब यू जस्ट डू इट
रिलेंटलेसली।
यार फरहान साहब वो शुरू इसलिए हुआ था
इसलिए कि मैं एक ही रास्ते से जाता हूं।
अह ज्यादातर मेरा 90% यूज़ एक ही रास्ते की
है। ज्यादातर लोगों की रूटीन
वही केएमसी बिल्डिंग केएमसी बिल्डिंग के
बराबर करी
और मतलब ये एक सेंस ऑफ़ हेल्पलेसनेस आप फील
करते हैं रिपीटेडली जब यू नो करेक्टेबल
चीजें आप देख रहे हैं बार-बार और आपके
अंदर ये बिल्ड अप हो रहा है तो मैंने एक
दिन सोचा मैं क्या कर सकता हूं तो आई डोंट
नो मैंने किसी को कोई एडवाइस दी थी कभी कि
बोलो तो मैंने सोचा यार ये मतलब मैं भी कर
सकता हूं तो आई स्टार्टेड मेकिंग वीडियोस
एंड देन यू नो यू गो टू सी अ चाइल्ड्स
डॉक्टर एंड 70 करोड़ का घर है उसके सामने
कचरे का अंबार है और वो मतलब मुसलसल है
रेगुलर रेगुलर बात है। वो 70 करोड़ का घर
क्यों है? ये एक अलग कहानी है। उसके सामने
कचरे का अंबार क्यों है? ये एक अलग कहानी
है। और इसकी ठीक होने के लिए क्या होता
है? आपने तस्वीर जब ले ली तो उसके बाद शोर
मचाया और किसी ने आके सफाई कर दी। अब उसके
बाद वो एक महीने बाद फिर वैसे
ये इट वास जस्ट आई जस्ट फ्ट इट वाज़ंट गुड
इनफ।
देखिए एक और चीज मैं मोइ का आपको एक और इन
ड्रॉप कर रहा हूं। देखिए मैं अक्सर ये
कहता हूं कि दुनिया में जितने अजीम लोग
गुजरे हैं उनका ताल्लुक नॉर्थ नाजाबाद या
उसके गिर्दो नवा से रहा है। मैंने उसमें
नाजाबाद को भी शामिल कर लिया और मोइस
जाफरी के लिए मैंने उसकी थोड़ी सी हुदूद
को बढ़ाते हुए फेडरल भी एरिया को भी शामिल
कर लिया है। तो दुनिया में जितने अजीम लोग
गुजरे हैं वो जिला बस्ती के ही कुछ इलाकों
से आए हैं। और मोइस का ताल्लुक भी फेडरल
वी एरिया से है। वॉइस इज़
जी माय ग्रैंडफादर बोट अ हाउस देयर और
हालांकि
अ ब्यूटीफुल एरिया हां एंड मेरे ख्याल में
प्लान नहीं था वहां रिटायर हो के जाने का
वो कुछ आई थिंक ही वांट टू स्टे ऑन इन
लाहौर बट देन देयर वर सम पर्सनल
सरकमस्टसेस जिसकी वजह से वो यहां आए बट ही
इट एंड एवरीवन हु लिव्ड देयर लव्ड इट एज
वेल इनिशियल
बॉयज वो जो सड़क तुम्हारे घर के सामने वाली
सड़क है और जो पूरा एरिया है वो इतनी चौड़ी
सड़कें
अब अब नहीं है
पूरे अच्छा
कचरा है वहां
नहीं वहां पे ये एसबीसीए के जमाने में जो
हमारे यहां एलमेंट आई वो ये थी कि घरों को
तीन-तीन हिस्सों में तकसीम करने की इजाजत
यस चाइना कटिंग
तो जब तीन-तीन हिस्सों की तकसीम की इजाजत
दे दी तो फ्रंट का जो ओपन मैंडेटरी एरिया
है वो भी मैंडेट खत्म हो गई तो जब घर
दीवार तक आ रहा है तो फिर सड़क उतनी बड़ी
नहीं लगती फिर सड़क जो है वो क्राउड होना
शुरू हो जाता है
लेकिन वो क्या मतलब 10 15 20 साल पहले
ब्यूटीफुल एरिया टू ग्रो अप एंड मतलब मैं
अक्सर ये कहता हूं कि जो दो इलाके सबसे
बुरी तरह बर्बाद हुए उसमें नॉर्थ नाजाबाद
फेडरल एरिया ये एरियाज मतलब दे वर
डिस्ट्रॉयड
जी
एंड एंड नाज़बाद तो चलो इट वाज़ द इट वाज़ द
उसका तो ग्राउंड उसका प्लान ही इट वाज़
अंडरस्टुड टू बी लाइक द कैपिटल द आइडिया
ऑफ़ वेयर फेडरल है। हां लेकिन फेडरल बी
एरिया वाज़ यू नो मोर ग्रिड्स एंड प्लान्स।
नाज़बाद का तो जो बेस डिज़ाइन है वो ही विथ
द रोड्स बीइंग डायगोनल विथ द वे इट वाज़
स्ट्रक्चर्ड विथ द पार्कक्स एंड विथ द
मतलब इट वाज़ प्लंड। इट वाज़ प्लंड टू बी
समथिंग दैट इट्स नॉट टुडे। बट इट वाज
प्लंड।
उफ! इज़ यू सेइंग दैट। मैं सच बता रहा हूं।
इट गिव्स मी गूस पंप्स।
हां? जस्ट लुकिंग एट दैट एरिया टुडे यकीन
करो मोइस इतना सख्त
इट्स सो सैड टू सी द होल एरिया इट वास द
एरिया ऑफ़ द मिडिल क्लास
डिस्ट्रयड अब्सोलुटली तबाह मोइज़
अब्सोलुटली मोइज़ आप वहां से पैदल गुजर
नहीं सकते मोइज़
सर मस्जिदों के आगे गटर बट रहे हैं नर्थ
नाज़बाद वाज़ मिडिल क्लास बट आई थिंक नाज़बाद
वाज़ फर्मली इलीट चार हजार गज के वहां घर
होते थे जो बिल्डिंग्स हैं मतलब इट वाज़ अ
वेरी वेरी वेल प्लंड एरिया। इट वाज़ अ
ब्यूटीफुल एरिया। अंटिल इवन 20 इयर्स एगो
मतलब
तबाह
तबाह हो रहा था उस वक्त भी लेकिन फिर भी
एक खूबसूरत इलाका था। अब्सोलुटली ऑल
डिस्ट्रॉयड। बट मोदी जी जो डिस्ट्रक्शन है
कराची की कराची की दो तरह की डिस्ट्रक्शन
है ना। एक तो पॉलिटिकल डिस्ट्रक्शन हमने
देखी है। लॉ एंड ऑर्डर की डिस्ट्रक्शन।
फिर एक इंफ्रास्ट्रक्चर की डिस्ट्रक्शन
अनरैवल होते हुए देखी है। जब हम 80 से बात
करें बहुत सारे लोगों के ज़हन में वो कराची
नहीं होगा। मोबाइल नहीं चाहिए। मोबाइल तो
खैर होते ही नहीं लेकिन स्ट्रीट्स वर सेफ
70ज की अभी हमने आलमगीर की डॉक्यूमेंट्री
बनाई तो उसमें मुझे सबसे बड़ी जो मेरे लिए
कल्चरल एक चीज थी कि टीवी से बड़ा ब्रेक
लोगों की पार्टीज में जिन सिंगर्स को मिल
जाता था वो होता था। फ्लट क्लब में
पार्टीज हो रही हैं। तो आलमगीर का सबसे
बड़ा ब्रेक जियाद्दीन के शो पे आना नहीं
था।
उसका एक बर्थडे पार्टी में गाना गाना उसका
सबसे बड़ा ब्रेक था कराची की इलीट की। एंड
दैट इज व्हाई रियल टैलेंट यूज्ड टू कम
आउट। सो देयर वाज़ अ ग्रेट सोशल सीन
पार्टीज लॉ एंड ऑर्डर सुकून अमन सुसाइड
कल्चरली थिंग्स वर मूविंग एंड देन जियाउल
हक केम एंड देन एमक्यूएम केम नहीं द अफगान
वॉर केम अफगान वॉर केम या जियाउल केम
अफगान वॉर केम एंड पॉलिटिकली कराची ने
अनर्रेवल होना शुरू हुआ 80 में। फरान साहब
जिया के आने से और एमक्यूएम के आने से अगर
ये इंडिविजुअल इवेंट्स होती ना तो शेयर सह
लेते हैं ऐसी चीजें। बिलकुल ठीक है।
यह जो एक कंपाउंड इंटरेस्ट इफ़ेक्ट था ना
अफगान वॉर का, हेरोइन ट्रेड का, मास
माइग्रेशन का अह उस ऑन टॉप ऑफ़ ऑल दैट
डिक्टेटोरियल रिजीम ऑन टॉप ऑफ़ ऑल दैट एक
फैशिस्ट सिटी वाइड पॉलिटिकल पुश ये सब का
जो कनकक्शन था ये मेरे ख्याल से कराची
कराची से नहीं। खौफनाक और फिर 90ज में
आपने पॉलिटिकल डिस्ट एक पूरी नस्ल मोइज़
मतलब डीएमसी एसएमसी एनईडी मोइज़ पूरे पूरे
बैच गायब गायब हां गायब आउट पूरे पूरे कोई
नहीं है उनका कोई डॉक्टर कोई इंजीनियर
नहीं है कराची में इस वक्त सारे के सारे
अच्छा बाय द वे अभी फिर हम उस तरह की एक
मास इमीग्रेशन देख रहे हैं फॉर द लास्ट
फ्यू इयर्स लेकिन वही सब चले गए हां
मतलब जो जा सकता था जो जा सकता था चला गया
सो एक सबसे बड़ा एक लॉस्ट जिसकी हम बात
नहीं करते वो हमारा ब्रेन ड्रेन हो गया।
हां।
हमारे वो दिमाग जो अच्छे टैलेंटेड लड़के
लड़कियां थे चले गए। कंपनीज़ चली गई।
एयरलाइंस चली गई।
यू नो। सो कराची जो एक मुआशी और टैलेंट का
और एक काम करने वाला शहर था उसके अंदर से
ह्यूमन रिसोर्स ही निकाल लिया।
नहीं और उस वजह से जो उसके एंसेलरीज होते
हैं मतलब आप दुनिया जहां के लोग देखते हैं
वो आते जाते हैं। करते हैं।
80 में नजर आते थे आप।
जो जो मिडवे होटल था मिडवे होटल 11 फॉरेन
एयरलाइंस का तो मैंडेटरी स्टॉप ओवर था। अब
वो मैंडेटरी स्टॉप ओवर ही नहीं हो सकता
क्योंकि यू आर नॉट सेफ इनफ। आप जहाज पे ही
बैठ के घूम के निकलते हैं वापस। लेकिन एज
ग्रोइंग अप यानी आपको जो बचपन की कहानियां
लोग सुनाएंगे वो बताएंगे कि हम नेशनल
स्टेडियम जाते थे क्रिकेट देखने। फिर
मिडवे जाके स्विमिंग करते थे। जब आप एक
मतलब एक आज के कराची आइट को मुल्क से बाहर
जाने से पहले किसी सयाम अमरी से उसकी
मुलाकात ही नहीं हो पाएगी। मुमकिन नहीं
होगा कि वो उससे मिल सके। उसके कल्चर का
कुछ सोच सके, सुन सके। समझ भी सके कि ये
टीवी के बाहर भी रहता है।
मतलब उससे कंप्लीट कंपैरेटिव अगर वो करे
तो शी कम्युनिटी ऑफ़ बिलारी से शायद कर
सके। लेकिन वरना वो उसी का एक्सपीरियंस
कोई एक्सपोज़र नहीं है। बट आई और ये अहम
होता है।
बहुत अहम होता है। चाइल्ड ग्रोइंग अप।
भाई किस बात का मेट्रोपॉलिटन शहर? हां।
किस बात का इंटरनेशनल शहर? इंटरनेशनल और
मतलब वन ऑफ़ द फैबुलर मोस्ट ब्यूटीफुल
थिंग्स अबाउट द ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट एंड द
फिफ्थ इन मैनहाटन इज कि आप 1 कि.मी. वॉक
करेंगे और आपको दुनिया की हर नेशनलिटी का
कोई ना कोई आदमी मिल जाएगा। में भी ये हो
जाएगा।
कि कोई भी तमीज़ की शहर
कोई भी तमीज़ की शहर के शहर और कराची में
जब आप ज़ैनब मार्केट और जिमसे स्ट्रीट पे
80 में जाते थे तो आपको ये नजर आता था
आपको मुख्तलिफ रंगों नस्ल मजहब के लोग
अब्सोलुटली कोई नजर नहीं आता।
नहीं आप पता है लाहौर जाएं तो आपको
अशराफिया के अंदर फिर भी थोड़ी सी पेपरिंग
ऑफ़ फॉरेनर्स नज़र आ जाते हैं। एक स्टोरीड
सिटी है। लेकिन मतलब ना
पाकिस्तान में नहीं है। 100
लेकिन पाकिस्तान में भाई ये तो पाकिस्तान
से ही चले गए। जी। तो खैर मोहित ये तो
हमने देख लिया। इस पे हम बहुत सारी
डॉक्यूमेंट्रीज बना चुके हैं। लेकिन फिर
मुशर्रफ साहब आए। कराची का आर्मी चीफ
ना
मुहाजिर आर्मी चीफ अल्ताफ भाई से दोस्ती।
शुरू में लड़ाई अलफा थोड़ी सी जरूरत।
अल्ताफ भाई की जरूरत मुशर्रफ को अल्ताफ
भाई की जरूरत। अल्ताफ को मुशरफ की जरूरत
नहीं। अल्ताफ को तो हर एक की जरूरत है।
अल्ताफ को तो की जरूरत थी। लेकिन एक
रिलेशनशिप वर्किंग रिलेशनशिप कायम हो गया
एस्टैब्लिशमेंट का और
मुत्तहदा का।
जी। और लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि
मुशर्रफ का इंटरेस्ट इन कराची स्ट्रेस्ड
बिय्ड मैं एमक्यूएम बिकॉज़ उसने नेमतुल्लाह
को भी फंड्स दिए। नेमतुल्लाह के साथ भी
काम किया। उस जमाने में भी कराची
मतलब उसने एक कैपिटल सिटी एक मेट्रोपॉलिटन
सिटी की तरह उसे ट्रेड
उसने पैसा तो मूव करना शुरू किया शहर में
और हर जो हर जनरल करता है लोकल बॉडीज को
वो एंपावर किया।
चाहे सिर्फ इसलिए इसलिए सियासी जमात कमजोर
हो जाए।
बिल्कुल ठीक है। लेकिन वो आ गया।
अब एम हमने फिर एक जबरदस्त दौर देखा।
कराची के अंदर डेवलपमेंट वर्क हुई। वो
ग्रीन लाइन आ गई।
फरान साहब वो भी जबरदस्त नहीं था। देखिए
वो भी ना पैसा आ गया और पैसा खर्च हो गया।
जिस तरह सीपक में पैसा आ गया और पैसा खर्च
हो गया। लेकिन अगर प्लानिंग से और तरतीब
से आता पैसा तो इंफ्रास्ट्रक्चर काम
तो ना इतने अंडरपास बनते ना इतने ओवरपास
बनते।
देखिए ये ये मैं नहीं कह रहा। ये शहरों के
एक्सपर्ट्स उस जमाने में भी कह रहे थे कि
बहुत अच्छा है कि पैसे आ रहे हैं। लेकिन
आप जब ब्रिजेस बनाते हैं तो आप कम्युनिटीज
के अंदर डिवाइड लाते हैं। और जब आप
डिवाइड्स लाते हैं जिस तरह अमेरिकन शहरों
में होता है कि ट्रेन के पटरी के ऊपर एक
अलग शहर, ट्रेन के पटरी के साउथ एक अलग
शहर। आप इस तरह के डिवाइड्स क्रिएट कर रहे
होते हैं। आप गेटवाइजेशन कर रहे होते हैं।
आप गरीब को गरीब इलाकों में बंद कर रहे
होते हैं। अमीर को सेपरेट कर रहे होते
हैं। कम्युनिटीज को कम्युनिटीज को आप बांट
रहे होते हैं। गैर फितरी तौर पे। एक तो
फितरी बंटवारा होता है कि यह फला का इलाका
है, ये फला का मीठा दर है, खारा दर है,
पंजाब कॉलोनी है या एक बोरी कम्युनिटी
रहती है। लेकिन फिर जब आप गैर फितरी तौर
पे शहर को डिवाइड करते हैं तो उसके फिर
नताय जो हैं वो फिर आप भुगतते हैं। यानी
कि आप गेटवाइज कर देते हैं एरियाज को।
सनलाइट से डिप्र्राइव कर देते हैं सर्टेन
एरियाज को। आप एक्सेस से डिप्र्राइव कर
देते हैं। कुछ भी था। कराची को
आर्टिफिशियली सही लॉन्ग लास्टिंग नहीं।
बिल्कुल ठीक है। लेकिन लेकिन उस दौर में
फरान साहब सारी चाइना कटिंग हुई। उस दौर
में सारी ग्रीन लॉस हुई।
उस दौर में सारी गेटवाइजेशन हुई। उस दौर
में सीट्स डले गए। एएनपी एमक्यूएम लेरी
मैं आ रहा था उस
जी कि सबसे बदतरीन गैंग वॉर्स उस दौर में
रिजल्ट हुई। लेकिन वो गैंग वॉर्स रिजल्ट
थी ऑफ अनदर पार्टी फाइटिंग बैक। जी।
एमकेएम की बदमाशी शहर में उरूच पे पहुंच
गई। वो बड़ा अच्छी मेरी माज़र अब्बास साहब
से बात हुई। तूने बोला यार एक तो वडेरे
हैं जो इंटीरियर सिंध में एक कराची में जो
सेक्टर इंचार्ज था वो भी एक वडेरा होता था
वो अपने इलाके का वडेरा होता था वो
बिल्कुल एक उसके इलाके में उसकी मर्जी के
बगैर कुछ नहीं होता मैंने कहा बिल्कुल सही
पता है एएनपी की ये आर्म्ड फ्रंट क्यों
बना था ये शाही सैयद ने कहानी सुनाई है और
एमक्यूएम के मैं उनका नाम नहीं लूंगा
क्योंकि एएम में नहीं है लेकिन एमक्यूएम
के एक साहब ने इसको कंफर्म किया है और
मैंने डबल कंफर्म किया था उस वक्त एएनपी
एमक्यूएम के साथ एक पैरेलल बबल की तरह
ऑपरेट करती थी इस अंडरस्टैंडिंग में कि
हमारा जब कोई मसला होगा ना तो तो हम आपके
ये जुडिशियल स्ट्रक्चर से मुस्तसना होंगे।
हम आपस में जिरगा करके या व्हाटएवर करके
आप हमारी बाउंड्रीज रिस्पेक्ट करेंगे। हम
आपकी रिस्पेक्ट करेंगे।
ठीक है? तो इस तरह दो एनपी मेंबर भाई थे
पश्तून उनकी कोई लड़ाई हो गई तो उनको थाने
लेके गए तो थाने वाले ने उनके साथ बदतमीजी
कर दी। तो उस जमाने में ये रिवाज था कि
उन्होंने एक्सेस के लिए एमक्यूएम से कहा।
तो एमक्यूएम ने एमक्यूएम के जो भी सेक्टर
या यूनिट या जो भी साहब थे उन्होंने बजाय
उनको फैसिलिटेट करने के उनके साथ और
बदतमीजी कर दी। तो उस वजह से उस रंज की
वजह से ये एएनपी में शाही सैयद फ्रंट आया
और ये अंडरस्टैंडिंग आई कि नहीं अब हमने
अपने मसले अपने हाथ में लेने और फिर वहां
से फिर ये चीज बलून होते फिर जुल्फकार
मिर्जा को ख्याल आया कि यार हमें भी अपने
तई कुछ लोग रखने हैं और फिर एक ट्राई
पार्टी चीज ऐसी हो गई कि ये उस जमाने में
मैं एक जगह स्नूकर खेलता था। तो वहां के
दो पिश्तून होते थे जो एक चाय संभालते थे
और एक उसकी बेसिक एडमिन करते थे। वो दोनों
मारे गए थे। बिकॉज़ वो बहुत दूर से पिश्तून
लगते थे। लंबे चौड़े गोरा था एक आदमी और
दूसरा भी मतलब ही लुक पिश्तून ही डाइड ऑन
द रोड्स गोइंग टू गेट रोटी वन ऑफ़ देम डाइड
गोइंग टू गेट रोटी एंड वन ऑफ़ देम डाइड
रैंडमली कमिंग बैक फ्रॉम समवेयर बिकॉज़
नंबर्स पूरे कर रहे थे वो 30 बंदा मारना
है 15 उर्दू स्पीकिंग लुक लाइक्स मारे गए
हैं तो 15 आज पश्तून मारने मतलब टेररिस्ट
की तरह लोगों को गिरा रहे होते थे और ये
भी आफ्टर माते ऑफ डिक्टेटोरियल इंटरवेंशन
आप जब भी एक ऑर्गेनिज्म अगर आप सियासत को
और सोसाइटी को एक ऑर्गनिज्म समझे है तो
उसके अंदर जब भी आप यह डिक्टेटर या एक
आरजी या एक फर्जी लिमिटेशन या एक्सेप्शन
इंट्रोड्यूस करते हैं ना तो दैट्स लाइक अ
कैंसर। आप एक कैंसर इंट्रोड्यूस करते हैं
उस ऑर्गेनिज्म में। फिर वो कैंसर स्प्रेड
करता है और वो अपने साइड इफेक्ट्स आपको
दिखाता है। तो वो यह गैंग वॉर ये एमक्यूएम
का ओवर मिलिटेंसी ओवर मिलिटेंसी, एएनपी की
पुशकै मिलिटेंसी यह सारी चीज़ें उस
इंट्रोडक्शन की वजह से ही है कि एक साहब
आए। उन्होंने सोचा कि मैं इस मुल्क के लिए
ठीक हूं। मैं वर्दी में पहन के इस मुल्क
को बताऊंगा क्या करना है, क्या नहीं करना
और यह लो पैसे। यह उसी का डायरेक्ट अंजाम
है। यह यह कोई अनफमेबल चीज नहीं है। उस
वक्त बैठे हुए लोग कह रहे थे। बहुत से लोग
ये कहते हैं कि एक डिक्टेटर के ने पैदा
किया और दूसरे ने खत्म कर दिया। मतलब बाय
द टाइम मुशर्रफ वेंट होम एमक्यूएम के लिए
इलेक्शन जितना बहुत मुश्किल हो चुका था।
इसीलिए 2013 के इंतखाबादात में अलताफ भाई
कितने नाराज हुए।
हालांकि बजाहिर तो एमक्यूएम जीत गई थी।
लेकिन उसी इलेक्शन की रात को हमने वो वाली
मीटिंग देखी है जिसमें कुछ बड़े अहम लोगों
की पिटाई भी हुई। नहीं उससे पहले आपने
देखा
वो तो लाइव मनाजर रात के 3:00 बजे की आपको
याद
उससे पहले आपने वो उनकी सेलिब्रेशन देखी
थी जो चार लोगों को वो डंडे मार के नचा
रहे थे
आपको याद है ना वो लाइव टीवी पे था टीवी
पे थे तो वो आपको मुझे बड़ी अच्छी तरह याद
है कि हम हैरान हो रहे थे यार इतना
ओवरवेल्मिंग मेजॉरिटी के साथ एमकेएम जीत
गई है मतलब जीत क्यों नहीं रही अल्ताफ भाई
काफी ज्यादा नाराज हैं
ही वास पेस्ट एंड ही वाज लाइक देयर वाज अ
डे ऑफ़ रेकनिंग फॉर हिम के भैया हम इलेक्शन
बहुत बुरी तरह हार गए हैं 2013 में
वो तो अलग बात है कि जीत गए वो तो अलग बात
है कि जीत गए और फिर फिर उसमें ज़हरा शाहिद
वाला केस हुआ और वो सारा जो पीटीआई ने फिर
तीन तलवार पे धरना दे दिया। सो पीटीआई हैड
बिकम न्यूसेंस मुझे एक अभी सिंग एमकेएम के
एमपीए हैं। बहुत वोकल हैं। 2013 के
इंतखाबादत के बाद सेंट्रल के ही हैं। उस
जमाने में भी थे। उन्होंने मुझे आके अगले
हफ्ते में मेरे दफ्तर में आके सीएनबीसी था
उस वक्त आके बताया फरहान भाई मेरे अपने घर
वालों ने पीटीआई को। मुझे याद है याद है
ना आपको? सो एमकेएम को मुशर्रफ साहब जी
इससे खत्म हो गया लेकिन एक और शख्स है
जिसने बहुत अहम किरदार अदा किया एमकेएम को
डिस्ट्रॉय करने में कहते हैं वो जरदारी
साहब उन्होंने उनको बोला यार बात सुनो
लड़ाई झगड़ा छोड़ो
रिलैक्स करो
आओ मिलके
एंजॉय करते हैं
हां हाउ मच ऑफ़ दैट इज ट्रू यार पता नहीं
हमने नाजाबाद के अंदर
पता नहीं
एमक्यूएम के एंपायर्स बिल्ड होते हुए देखे
सबसे पहले फरान साहब एमक्यूएम का मैं 2009
में टीवी में आया तो हमारी कराची बेस्ड
ऑफिस था
तो हमारे जितने भी पीएमएल लून वाले होते
थे उनसे तो डब्बे में मुलाकात होती थी
ठीक है
तो उनसे मुलाकात फ्यू एंड फार बिटवीन जब
कभी ट्रेवल कर रहे हैं कभी किसी वजह से
कोई आया हुआ है पांच तो पीएमएल के वोटर थे
कराची में तो वो लेके आ जाया करते थे ऑफिस
में और वो पांचों के पांचों माशाल्लाह
नवाजे गए हैं उसके बाद से उनमें से एक
निहाल हाशमी साहब होते थे लेकिन कोई काम
का
इस बात में नूर अली को सलाम है
हां कोई काम का अगर गेस्ट चाहिए होता था
लेकिन तो मजे का वो पीबीपी या एमक्यूएम का
होता था।
हम्म।
तो उनसे एक स्टार्ट डिफरेंस नजर आता था
यार। मतलब पीपल्स पार्टी का बंदा आके अपनी
टीवी पे बैठ के पहले अपनी घड़ी छुपा रहा
है। के भाई क्यों तो वो बड़े साहब ना देख
लें। अब उसकी क्या इंटरनल डायनामिक्स है
मुझे नहीं पता कि ये घड़ी कब ली। मुझे
नहीं पता कि फिर ये घड़ी ली। कैसे वो मुझे
नहीं पता। लेकिन मतलब मुझे याद है अब मैं
उनका नाम नहीं लूंगा। अब तो वो एक घड़ी
क्या वो घड़ी की दुकान ले सकते हैं। लेकिन
उस जमाने में वो आते थे, बैठते थे तो अपनी
घड़ी पहले छुपाते थे या उतार के अपनी जेब
में रख लिया करते थे। ये ये पीपल्स पार्टी
का अच्छा नीचे दो गाड़ियां साथ आ रही हैं।
10 करोड़ की एक गाड़ी है। या उस जमाने में
5 करोड़ की एक गाड़ी है जो आज 10 करोड़ की
है। दूसरी गाड़ी जो पीछे आ रही है उसके
अंदर चार बंदे पीछे बैठे हुए हैं। ये आम
सिलसिला हो गया था।
एमक्यूएम वाला जो है वो एक टूटी फूटी सी
गाड़ी में आ रहा है। अगर उसकी जान को कोई
100 फीसद खतरा है। हैदर अब्बास रिज़वी
जैसे आदमी को तो वो भी एक पार्क आर्मी से
ली हुई एक प्लेट गाड़ी के पीछे लगी हुई
है। एक प्लेट बाहर लगी हुई है क्योंकि
उसको बनाने के लिए उनके पास पैसे नहीं है।
और फिर मुझे याद है रजा हारून साहब ने
हमारे शो पे कहा था। और इन सब से मेरे
करीबी दोस्त हां इन सब से यार ताल्लुक बन
जाता था ना आप उनसे बार-बार बुला रहे हैं
उनसे बिफोर द शो बात कर रहे हैं आफ्टर द
शो बात कर रहे हैं और रिलेटेबल भी क्यों
रिलेटेबल लगते थे उन्होंने ऑन द शो शायद
कहा था और फिर उसके बाद हमने इसकी बात की
थी उन्होंने कहा था कि यार हम लोगों के
लिए करप्शन क्या है मतलब मैं घर ले लूं
मैं अपने बच्चों का फ्यूचर संभाल लूं मैं
यूनिवर्सिटी के पैसे जमा कर लूं भाई इसके
बाद तो मतलब सोच खत्म हो जाती है ना बोले
ये ₹1 अरब रुपए ₹2 अरब रुपए चार अरब ये ये
करप्ट ये तो ये ये समझ से बाहर नंबर्स
हैं। मतलब इसका बंदा करे तो करे क्या?
मतलब ये उनका कहना था उस जमाने में।
नहीं सही कह रहे थे।
नहीं और सही कह रहे थे और नजर आता था यार
कि मतलब ये द फैसल सदारी एंड द हैदर
अब्बास रिजवीज एंड द रजा हारून ऑफ़ दैट
टाइम वो चोरी कर लेते तो क्या कर लेते यार
मतलब मैं नहीं कह रहा कि की या नहीं की।
मैं कह रहा हूं लेकिन अगर उनके जो मतलब जो
उनके ज़हन का जो फदस्ट कॉर्नर था वो वो एक
वास द बिगिनिंग ऑफ़ द यूनिवर्स ऑफ
अब्सोल्यूट मिडिल क्लास ड्रीम कि यार मैं
मतलब दो वेकेशन कर सकूं जिंदगी में इसका
घर बना लूं जो
घर बना लूं उसके मैं एक और घर बना के
किराए पे दे दूं मैं अपने बच्चों के लिए
उनका फ्यूचर इस्टैब्लिश कर दूं ग्रीन
कार्ड मिल जाए मेरी बेटी को इस तरह की
चीजें थी ना
वीजा लग जाए
के मैं बैंक ले लूं बैंक से अपने आप को दो
अरब रुपए दे दूं दो अरब में से डेढ़ अरब
अगले दिन निकाल लूं। उससे फिर एक जहाज ले
लूं और उस जहाज के बाद गाड़ी ले लूं।
गाड़ी को रजिस्टर कराऊं एक मरे हुए आदमी
के नाम। यह चीज़
आते हैं उस लोगों को समझ में नहीं आया
कांटेक्ट मोइज़ की इस बात पे मैं पूरे
डिटेल में आऊंगा। मोइज़ लेकिन देन बिकम
व्हाट इज़ आई कॉल्ड द डारकेस्ट एरा ऑफ़
कराची। स्टार्टेड द डार्केस्ट एरा ऑफ़
कराची। 2007 राइट आफ्टर मुशर्रफ लेफ्ट। 89
के बाद से कराची में एक्सट्रीम वायलेंस।
एक्सट्रीम वायलेंस। काम उस वक्त भी नहीं
हो रहा है। एक्सट्रीम वायलेंस। लेकिन ये
एमकेएम को फ्री पास नहीं दे सकते। कि जिस
वक्त ये लोग हमारे पास आते थे ना उस वक्त
अल्ताफ हुसैन के जो जेबें जो एमक्यूएम के
स्ट्रक्चर को फंड करने वाले लोग थे
जो एमक्यूएम को फंड करने वाले लोग थे वो
उस वक्त भी अरबपति होना शुरू हो गए थे
और वो वो टीवी पे नहीं आया करते थे दे हैड
बेटर थिंग्स टू डू लेकिन वो जो आज भी
बदनाम जमाना है उस वक्त के चाइना कटर्स वो
उस वक्त से अमीर होना शुरू हो गए थे
और उन उनका जो तरकीब थी अमीर होने की वो
इससे तो क्रूड थी जो जो पीपल्स पार्टी ने
परफेक्ट की है लेकिन फिर भी वो वो
अंडरस्टैंडेबल थी भाई ये जमीन है ये पार्ट
होती थी। इसके चार प्लॉट काट दो। इस चार
प्लॉट में से दो मैं टावर बना दूंगा। हां
यहां पे 1 करोड़ का प्लॉट है। मैं 25-5 लाख
के बेच दूंगा यार।
मतलब बेच दूंगा ना उसके ना।
फिर वो प्लॉट अपने आप को लेके उन पे
बिल्डिंग बना के जोनिंग चेंज करके वहां पे
अरबपतिनेस बनना शुरू हो गई थी।
और वो एमकेएम को
एमक्यूएम की पार्टी तंजीम को फंड कर रही
थी। जिसकी वजह से अल्ताफ हुसैन साहब के दो
सेट ऑफ रूल्स थे। एक सेट ऑफ रूल्स उन
लोगों के लिए था जो अरबपति क्लास उभर के आ
रही थी और दूसरा सेट बाकि सब लोगों के लिए
था। लेकिन बाकी सब लोग 99% ऑफ़ एमक्यूएम
थे।
हां, वो 1 2% थे।
हां। वो जो वो लोग थे और वो बिल्कुल यू आर
राइट। वो एक बिल्कुल आपको एक वाज़ चेंज नज़र
आया। कुछ एमकेएम के लोगों के हुलिए ढुलिए,
जालों, ढालों और उनकी हर चीज में वो एक
वाज़ चेंज नज़र आया।
यार ये जो एमकेएम के एक और साहब हैं मैं
उनका नाम नहीं लूंगा क्योंकि मैं उनको
एम्बैरेस कर दूंगा। लेकिन वो एक दफा हमारे
शो पे आए थे। ये वासिद जलील साहब जो थे ना
वो थोड़े से एक तो ये थे भी गस्टापो और
फैसिस्ट। और इनको शौक भी था आपको सबक
सिखाने का। तो अगर आपने जरा ज्यादा टेढ़े
हाथों ले लिया एमक्यूएम वालों को तो अगली
दफा आपको सबक सिखाने के लिए वो एक कोई
मतलब समझिए अपनी तरफ से सबसे लाइट वेट
बंदा आपको भेजते थे और कहते थे नहीं ये
बड़े जबरदस्त भाई हैं। ये भाई जो हैं फला
जगह से ये तो भाई तो आपको बड़ा जबरदस्त
जवाब देंगे ये करेंगे वो करेंगे तो इस तरह
एक भाई को हमारे पास भेजा था जो आजकल
फ्रंट लाइन भाई हैं। तो वो सूट पहन के आए
थे तो जो सूट बेचने वाले होते हैं ना फला
साहब वो कभी-कभी एडवरटाइजिंग के लिए अपने
सूट का ब्रांड का नाम जो है वो यहां दो
टांकों से लगा देते हैं।
तो आपको वो खरीदने के बाद हटाना होता है।
तो उनका जो सूट था उसके यहां पे भी टांगा
था और यहां पे भी टांका था। वो दोनों लेके
हमारे हमारे शो पे बैठे हुए
वो वीडियो पे भी होगा अगर सीएनबीसी का
ऑनलाइन दैट वाज़ ह फर्स्ट सूट व्हिच इज़
ग्रेट बट एंड आई एम नॉट ट्राइंग टू मेक फन
ऑफ़ आई एम जस्ट सेइंग दैट इस तरह के लोग के
मतलब दे वर अवर्स टू
और एक और चीज शुरू हो गई थी मोइज़ एमकेएम
के अंदर बदतरीन दौर में भी 80 90ज में जो
भी ऊपर आ रहा होता था पढ़ा लिखा होता था
नस्तालिक होता था थोड़ा इंटेलेक्चुअली
जिंदा होता था। इस जमाने में बिल्कुल अलग
किस्म के लोग आना शुरू हुए जो कि उस
क्राइटेरिया पे भी पूरे नहीं उतरते थे। यह
भी एक
बात करने की तमीज रखता था। तमहीद बांधने
की तमीज था। रखता था। अपने ऐब छुपाने की
तमीज रखता था।
वो भी खत्म होता होना शुरू हो गया।
मतलब मैं बदमाश ना लगूं। हालांकि मैं
बदमाश हूं कि तमीज रखता था।
खैर
2000
13 के इलेक्शंस के बाद 2008 से पीपल्स
पार्टी सिंध और उसमें हुकूमत में आ गई। और
उसके बाद से कुछ लोग कहते हैं कि ये कराची
का तारीख तरीन दौर है। हमने उसमें बहुत
सारी चीजों को क्रॉनिकल करने की कोशिश भी
की है इन दिस डॉक्यूमेंट्री। अह मोइज़
इसमें तो कोई शक नहीं है कि कराची हैज़
रिग्रेस्ड।
कितना रिग्रेस किया है इसकी मतलब कोई
मैट्रिक तो है नहीं। मैं सिंपल सी बात ये
बता दूं कि आप मैं कोटा गया। कोटा वाज़
क्लीनर देन कराची। कोई कंपैरिजन नहीं है।
लेकिन मैं सिंपल सी बात बता रहा हूं।
सड़कें बेहतर थी। मुल्तान गए हैं आप।
मुल्तान तो बहुत पहले से बहुत बेहतर है।
पंजाब से तो मैं मुकाबला ही नहीं करता
भाई। मुल्तान पंजाब है बावरलपुर पंजाब है
नहीं
गुजरावाला साहवाल गुजरात
पंजाब है पंजाब से मुकाबला नहीं करता
शर्म का मुकाम नहीं है कि आप अगर एक मैं
नहीं करता
टर्शरी सिटी ऑफ़ जी मैं वही कह रहा हूं मैं
नहीं करता उससे मुकाबला मैं तो कोएटा से
मुकाबला कर रहा हूं हम अब काफी हद तक
बलस्तान का हिस्सा बनते जा रहे हैं तो
उससे भी मुकाबला नहीं है वो व्हाट डू यू
थिंक बहुत लोगों को समझ नहीं आता पीपल्स
पार्टी को क्या प्रॉब्लम है कराची के साथ
कोई प्रॉब्लम नहीं है पसंदीदा तरीन जगह है
रहने के लिए। पसंदीदा तरीन जगह है। यहां
पे
मतलब एक हाफवे हाउस की तरह इस शहर को
ट्रीट करने के लिए बहुत सारे लोग कॉल इट
होम नाउ। यहां पे देखिए पीपल्स पार्टी जो
है ना उसको आप ये एक ये गलतफहमी है कि अगर
आप समझते हैं कि पीपल्स पार्टी कैन डू
बेटर। पीपल्स पार्टी कांट डू बेटर। पीपल्स
पार्टी जो कर सकती है ना वह कर रही है।
पीपल्स पार्टी
अपने क्रिएटेड सिस्टम का मोहताज है। वो
सिस्टम जो है वो एक सियासी जमात कम और एक
माफियोसो स्ट्रक्चर ज्यादा है। और वो
सिस्टम बहुत ओल्ड स्कूल सिस्टम है कि
आपने अगर फला जॉब लेनी है तो आपने इतना
हिस्सा यहां डालना है। उस आधे अगर आप
आप आपका आपको जॉब दिलाने वाले ने पहले
इतना हिस्सा वहां डालना है। वोट अगर जमा
करने हैं तो यूनियन काउंसिल के लिए अगर
आपने उम्मीदवार खड़ा होना है तो ये करना।
अब वो स्ट्रक्चर बना बना के उसके अंदर जो
आप लूज करते हैं वो एफिशिएंसी करते हैं
ना। मतलब 50 60% ऑफ द वैल्यू ऑफ़ समथिंग तो
बढ़ गई। फिर जो बाकी बचा है उसको करने के
लिए अब जिस बंदे को बिठाया है उसको अहलियत
की वजह से तो नहीं बिठाया ना यार। उसको तो
इसलिए बिठाया इसलिए वो फला का कजन है, फला
का रिश्तेदार है, फला का साथी है, सपोर्टर
है या फला लॉयलिस्ट है या वह फला अंगूठा
लगा चुका है आपके लिए। तो वो जितना काम कर
सकता है वो करेगा। आई विल स्टॉप यू देर।
मोइज़ यह तो पूरे मुल्क में हो रहा है। इस
वक्त जितना यह पूरे मुल्क में हो रहा है,
साडा बंदा है। लगा दो।
नहीं यार ऐसा नहीं हो रहा।
अरे मोइज़ हो रहा है।
नहीं भाई मोइज़ नहीं या एक्सक्यूज मी।
कुछ लोग हैं उनको सारी वज़ारतें भी मिल गई
हैं। सारे मोहक भी मिल ऐसा हो रहा है। तो
हमेशा बता रहा है। लेकिन वो जो साडा बंदा
होने की अहलियत है ना उसमें कहीं ना कहीं
10 साल पहले ही सही थोड़ा बहुत मेरिट मिला
हुआ था। थोड़ा बहुत।
आई डिसग्री बट एनीवेयर। में एक्सेप्शनंस
होंगे और जो आप इशारा दे रहे हैं वो
एक्सेप्शन है। लेकिन वरना
सबसे बड़ी एक्सेप्शन है भाई तारीख साहब
देखिए मैं पीएमएल नून से कंपेयर करूंगा ना
मैं मतलब हां मैं अनइड से तो नहीं कंपेयर
करूंगा उनके तो बंदे ही बंदे हैं।
हां
लेकिन पीएमएल नून से अगर आप कंपेयर करें
तो यार उनके पास मैं उनके वकीलों से
कंपेयर करूंगा कि भाई सा बंदा या जज
लगेगा। यार वो 10 के 10 काबिल है। वो बहुत
काबिल नहीं होंगे। लेकिन वो 10 के 10
काबिल लोग हैं जिनमें से एक आप उठा के जज
बनाएंगे। वो कहेंगे सडा ब्यूरोक्रेट है
चीफ सेक्रेटरी लगेगा यार वो 10 के 10
काबिल लोग हैं। हमारा ब्यूरोक्रेट है
कमिश्नर लगेगा चल चीफ सेक्रेटरी तो हर जगह
के काबिल होंगे। हमारा ब्यूरोक्रेट है
फलाना का कमिश्नर लगेगा यार वो सब काबिल
हैं। वो सब एक बेसलाइन काबिल हैं। वो
सिविल सर्विस स्ट्रक्चर के थ्रू प्रॉपर्ली
हो के आए हैं। वो एक कंपेटिटिव स्कूलिंग
कंपेटिटिव
मतलब वो पिटिकल पार्टी के स्ट्रक्चर के
अंदर ही कंपटीशन है। यानी के पीएमएल नून
का जो लोकल बॉडीज का बंदा है
पंजाब में वो पहले दानियाल अजीज था। अब
एसन इकबाल के बेटे हैं। यार ये दोनों
काबिल लोग हैं। अहमद इकबाल मतलब ये काबिल
लोग हैं। दे नो व्हाट दे आर टॉकिंग अबाउट।
ठीक है।
आपका यहां पे देखिए पीपल्स पार्टी ना इनके
इनके बस की बात ही नहीं है। इनकी जो बेस्ट
पॉसिबल
फुट फॉरवर्ड है वो भी मीडियकर है। एट
बेस्ट पीपल्स पार्टी ने और ये आप कराची का
मसला कहते हैं। ये ये मिफा इस्माइल भी
आपके पास आके 10 दफा कह चुके हैं। भाई कौन
सा शहर बना दिया? बिल्कुल सही बात। कराची
से मसला है ना। आप कहते हैं कि अदराइजेशन
है कराची की। लाडकाना सही कर दिया।
नोडेरो सही कर दिया। हैदराबाद बेहतर कर
दिया। आप हैदराबाद गए? मैं हैदराबाद कोर्ट
के लिए जाता हूं। हैदराबाद के अंदर भी वही
प्रॉब्लम्स जो कि कराची के अंदर 10 साल
पहले हो चुकी हैं। उसी तरह की एब्सर्ड
प्लानिंग परमिट्स, एब्सर्ट बिल्डिंग
कंस्ट्रक्शन परमिट्स बिल्कुल वही हो रहा
है। और मतलब रोड जो हैं उनके अंदर पॉट
होल्स कम होंगे फॉर लैक ऑफ यूज़ और
व्हाटएवर। बट वही हाल है। और जो लोग रोड
से ट्रैवल करते हैं फ्रॉम कराची टू द
नॉर्थ ऑफ़ दिस कंट्री। वो आपको बताते हैं
कि यार आपकी गाड़ी आपको बताती है कि आप
सिंध से निकल गए हैं। वो शोर मचाना बंद कर
देते हैं।
अब्सोलुटली आपने एक बहुतेंट वर्ड यहां पे
यूज़ किया अदराइजेशन। मोहित मैं बड़ा ही
एंटी रेसिस्ट किस्म का आदमी अपने आप को
मुझे लगता है कोई भी शख्स जो अजबियत का
सौदा बेचता है वो बहुत खतरनाक आदमी है। तत
नजरी का भी शिकार है।
तंग नजरी का भी शिकार है। मैं अजबियत इज द
मोस्ट डर्टी ऑफ़ थिंग्स टू बी सो। सबसे
घटिया हल्की सस्ती चीज है बेचने की। मेरा
सवाल नहीं है। कराची के लेकिन लोगों का एक
सवाल होता है। कि क्या कराची के साथ
अदराइजेशन होती है? नहीं कि नहीं?
इस्लामाबाद से भी और पिंडी से भी।
नहीं हर जगह से होती है। लेकिन उसके
है ना? होती है। क्या वजह है इसकी?
सबसे बड़ा वजह तो कराची के लोगों का अपना
तासुब है। जो के दो जनरेशंस आपने लोगों के
साथ किया वो अब जवाब में एक एक पुशबैक आती
है। एक एक फितरी पुशबैक आती है। मतलब आपने
दो जनरेशन से मुराद क्या है आपकी? मतलब एक
तो जो रूलिंग जनरेशन थी पोस्ट पार्टीशन
जिसने बाय वर्चू ऑफ़ एजुकेशन एंड बाय वर्चू
ऑफ़ लैंडिंग इन कराची इट काइंड ऑफ़ टूक ओवर।
ठीक है? और वो टेक ओवर के बाद जिस हिकारत
से आपने बांग्लादेश को बंगाली को ट्रीट
किया जिस हिकारत से आपने पश्तून को ट्रीट
किया जिस हिकार से आपने पंजाबी को ट्रीट
किया जिस हिकारत से आपने सिंधी को ट्रीट
किया वो उस जमाने की डली हुई फर्ज
रिलेशनशिप्स जो है वो फिर अगली जनरेशन में
एक्चुअल इंटीग्रेशन बन जाती हैं दुनिया
में कहीं भी तीन जनरेशंस में एक बेसलाइन
इंटीग्रेशन हो जाती है। आपने इंटीग्रेशन
का उलट किया। आपने अदराइज किया। आपने
एक्सट्रीमली एक्सट्रीमली रेसिस बिहेवियर
मतलब यह जो उर्दू स्पीकिंग अशराफिया थी
उसका डायरेक्ट कंट्रीब्यूशन है थ्रू द एड
ऑफ़ अयूब खान इनटू कॉजिंग व्हाट हैपेंड इन
बंगाल जो बंगाली
एंड कराची का और इस्लामाबाद को कैपिटल
बनाने में भी कराची के ही लोगों का हाल
है। ये यहां की अदराइजेशन और फिर अब दूसरी
जनरेशन आती है तो उसके अंदर जब पुशबैक आया
इस पहली जनरेशन के लिए कि यार ये हु डू दे
थिंक दे आर तो वो पुशबैक फिर आपकी तरफ से
पुशबैक आया मिलिटेंसी में के वी विल शो यू
हु वी आर एंड देन द एमक्यूएम स्टार्टेड सो
यू डिड योरसेल्फ नो फेवर्स फॉर टू जनरेशंस
एंड इन जनरेशंस के दौरान आपका जो एजुकेशन
बाय डिस्ट्रिक्ट जो है वो कराची अगर टॉप
10 के अंदर पांच डिस्ट्रिक्ट्स आती होंगी
इन 1947 इन टर्म्स ऑफ़ क्वालिटी ऑफ़ एजुकेशन
अफोर्डेड वो टॉप 30 में नहीं आ रही थी
एमके क्यूएम के जमाने में और मुशरफ ज़दी ने
जो लास्ट एलिफ ऐलान के लिए सर्वे की थी
उसके अंदर जो पहली कराची की डिस्ट्रिक्ट
फीचर हुई थी वो मेरे ख्याल से सेंट्रल थी
और वो नंबर 57 थी तो
और जाहिर है वो सिंध की पहली डिस्ट्रिक्ट
थी फीचर होते हुए लेकिन
पता है आपको 91 में जब बेनजीर भुट्टो ने
हुकूमत में आई 88 में तो बेनजी भुट्टो की
स्पीच है उसमें शी इस रेफर्ड टू
डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल एंड सेइंग दिस इज़ द
मोस्ट एजुकेटेड डिस्ट्रिक्ट इन पाकिस्तान
तो यू डिस्ट्रयड इट एंड एंड यू प्लेड अ
पार्ट इन इट मतलब बिफोर अदर पीपल
स्टार्टेड अदराइजिंग यू अदराइज़्ड
योरसेल्फ, यू ट्राइड टू कून योरसेल्फ इन।
अ क्वेश्चन, हियर, यू कैन ओनली अदराइज़ विद
फ्रॉम अ पोजीशन ऑफ़ पावर?
यू हैड अ लॉट ऑफ़ पावर? यू हैड अ लॉट ऑफ़
पावर अंटिल द मिड 60, यू हैड अ लॉट ऑफ़
पावर। यू आर ओवर रिप्रेजेंटेड इन द
एनएमए केम के दौर में पावर तो है।
नहीं नहीं यू आर ओवर रिप्रेजेंटेड इन द
ब्यूरो।
और एमकेएम के दौर में भी एक तरह का पावर
तो है। है ना? अलताब भाई बुला रहे हैं
सबको। 90 आओ।
90 आओ।
एक पावर तो थी।
अबदा हुसैन साहिबा जो हैं सीढ़ी चढ़ के
जाके उनको पानी पिला रही हैं।
जी जी बिल्कुल ठीक है। समझ गया मैं। वो
पावर कब खत्म हुई?
यार यू नो व्हेन यू पुश टू मच व्हेन यू
ब्रेक द कैमल्स बैक तो
डू यू नीड डू यू नीड
अ लिसानी पार्टी टू व्हील दैट पावर
यस इन अ सिटी लाइक कराची जिसको जो नसल्लड
है इन अ प्रोविंस लाइक सिंध जहां 50% ऑफ़ द
पपुलेशन एक शहर में रहती है वहां पे फितरी
तौर पे लिसानी पॉलिटिक्स ही होंगी लेकिन
उस लिसानी पार्टी को कुछ सबक सीख के अपने
पास्ट को पीछे छोड़ के गैर लिसानी होते
ग्रेजुएट करके एक बेहतर पार्टी बन जाना
होना चाहिए था दो जनरेशंस में। हां, वो
नहीं बनी। यह लेकिन शुरुआत पॉलिटिक्स की
लिसानी ही होती उस जमाने में। यस बिकॉज़
एथनोलिंग्विस्टिक लाइंस वाज़ द फ्रैक्चर ऑफ़
दिस सिटी एट द टाइम। उसके अलावा पॉलिटिक्स
कर ली थी ना जमात ने। इस्लाम के नाम पे कर
ली थी मिडिल क्लास पॉलिटिक्स।
उसी को धोया ना एमक्यूएम ने आके कि यार ये
ये तकल्लुफ का अभी हमारे पास टाइम नहीं
है। जो एक्चुअल बात है वो असम है।
तो वो तो एक बहुत नेचुरल स्प्लिट था ना।
हां उसको तूल दिया उस वक्त की मिलिट्री
हुकूमतों ने। लेकिन स्प्लिट तो वही था और
स्प्लिट से ही उगती है ना पॉलिटिक्स
पॉलिटिकल पार्टीज आर अ प्रोसेस ऑफ़ अ
सोसाइटी मतलब व्हाट इज़ द मोस्ट बिगेस्ट
नीड इन दैट सोसाइटी एंड व्हाट इज़ द
बिगेस्ट रिफ्ट इन दैट सोसाइटी तो दैट वाज़
द आंसर टू दैट रिफ्ट एट द टाइम इट कुड हैव
ग्रेजुएटेड एंड मैच्योर्ड इंटू अ बेटर
पॉलिटिकल पार्टी व्हिच इट ट्राइड फ्रॉम
मुहाजिर टू मुताहिदा बट दैट वाज़ अ
आर्टिफिशियल ग्रेजुएशन सबको पता है। मोइज़
इस वक्त तो उस लिसानी पार्टी का आपको जो
हाल है आपको पता है वह टॉप थ्री में भी
नहीं आ रहे थे 2000 24 के इलेक्शंस में।
हां अह और बहुत अच्छा गाना चलता था।
पीपल्स पार्टी का भी वो जो भुट्टो वाली
सीट है उसके अंदर भी वो टीएलपी हां तीसरे
नंबर पे हां तीसरे नंबर पे। सो वही एक बात
तो बिल्कुल क्लियर है कि इस वक्त
जो दोनों पार्टियां हुकूमत में हैं
एमक्यूएम पीपल्स पार्टी कराची वालों ने
उनको वोट नहीं दिया।
जी क्लियर है? हां। क्या इस चीज की भी सजा
मिलती है कराची को? नहीं। कराची एम कराची
वोट नहीं देता पीपल्स पार्टी।
नहीं नहीं नहीं अगर आप वोट देते भी तो कोई
बहुत ज्यादा फर्क नहीं होता। फर्क ये होता
कि आपके चार पांच लोगों को नौकरियां मिल
जाती। देखिए पीपल्स पार्टी का स्ट्रक्चर
ही है। फरान साहब ये जो हम देखते हैं ना
रजा रब्बानी, शरीर रहमान, कमर जमान,
कायरा, नदीम अजलचंद ये डिस्ट्रक्शंस हैं।
यह यह एक मतलब आई डोंट वांट टू गिव द
एग्जांपल।
हां।
आई डोंट वांट टू गिव दैट एग्जांपल।
आई नो आई नो व्हाट एग्जांपल डोंट गिव इट।
हमारे कल्चरली वो अप्रोप्रियट नहीं है।
बट वो वो सताई एक एक मेकअप फसा है।
वो एक एक्चुअली वो एक बेवकूफ बनाने का एक
एक तरकीब है।
फ्रंट है
और फरतुल्ला बाबर मतलब इस तरह के लोग जो
बातें मतलब गुफ्तार की गाजी बातें करते
हैं। आपको लगेगा यार दिस इज द मजनरेशनल
डेमोक्रेटिक पार्टी। मतलब हकीकत ये है कि
उनको सुनवाई के लिए बुलाया भी नहीं जाता
इन द एक्चुअल प्रोसेस।
यार देखें
थोड़ा पॉलिटिकल हकीकत की बात करते हैं। फिर
थोड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव और दूसरी जो आप
डॉक्यूमेंट्स के थदे के थदे लेके बैठे हुए
हैं।
हकीकत ये है फरहान साहब के आई डोंट नो ये
कब से है। लेकिन जब से पीपल्स पार्टी की
18वीं तरमीम पास हुई और उनको उनके सूबे
में एक्चुअली सीरियस मनी आना शुरू हुआ। जब
से लेके 2018 तक की एक जीआईटी कायम की गई
थी ये मालूम करने के यानी 2010 से लेके
2018 के पीरियड के अंदर कि यह मतलब पैसा
कहां जा रहा है और क्यों जा रहा है और
क्या हो रहा है। तो आसिफ अली ज़दारी गेट
ज़दारी मिशन भी चल रही थी क्योंकि ज़दारी
साहब ने एक तारीखी स्पीच दे दी थी वो ईंट
से ईंट बजाने वाली जिसके बाद वो
होशियार होशियार होशियार
जिसके बाद वो अपनी ईंटें लेके दुबई चले गए
थे। लेकिन उन्होंने वो तुम तीन साल के लिए
हो। वो हम कई सालों के लिए हैं और तो वो
उसके उसके बाद ये सिलसिला शुरू हुआ था
और नहीं वो सच कह रहे थे और उनके खिलाफ जो
ये सिलसिला शुरू हुआ था वो बदनियती पर
मबनी था उन लोगों की तरफ से उनको सबक
सिखाने के लिए था उनके उनको उनके मंतकी
अंजाम तक पहुंचाने के लिए नहीं था
नहीं था अजीब
और हमेशा यही होता है या फिर उनको काबू
में लाने के लिए था या फिर
एक्चुअली मंतकी अंजाम तक पहुंचाने के लिए
ही होगा लेकिन क्योंकि वो सिर्फ तीन साल
के लिए ही थे तो फिर या छ साल के लिए ही
थे तो फिर जो अगले साहब आए उन्होंने उस
मंतकी अंजाम तक पहुंचाने को तब्दील कर
दिया।
पता चला
अंजाम को तब्दील कर दिया।
अब हमारा हम है मंतकी अंजाम।
क्या क्या पता चला
यार वो बशीर मेमन वाली एफआईए की
इन्वेस्टिगेशंस थी। जेआईटी बनी अच्छा ये
देखिए मैं ये नहीं कहता ये बहुत नेक नियती
से बनी है। एक साकिब निसार को कहीं से
ख्याल आया हुआ है कि जी ये स्लैकनेस हो
रही है। ये फेक अकाउंट्स फेक अकाउंट्स उभर
के आती हैं सामने।
वाह व्हाट अ स्टोरी। अब वो फेक अकाउंट्स
क्या है कि भाई एक रे वाला है उसके अकाउंट
में से ₹8 अरब रुपए घूम रहे हैं। फालूदे
वाला
फालूदे वाला है। एक एक कहीं का वो क्या वो
मदनी चैनल का एंप्लई है। मदनी चैनल का
मुलाजिम है। वायर बॉय है। क्या है उसके
अकाउंट में से डेढ़ अरब घूम रहे हैं। ये
सब लोगों को जाके पकड़ती है पुलिस। कहते
हैं क्या? अच्छा वो एक खातून थी। उन्होंने
कहा 8 अरब मैंने आज तक 8 अरबी नहीं देखे।
ये ये सुप्रीम कोर्ट में जाके उन्होंने
कहा था। अ मतलब गरीब आम लोग उनके अकाउंट्स
में पैसे ऐसे घूम रहे हैं जैसे पता नहीं
समझ ही नहीं आ रही। अच्छा पैसे आ रहे हैं।
उन्हें खुद भी नहीं पता है।
नहीं उनको खुद भी नहीं पता है। एक साहब तो
दो साल पहले वफात पा चुके हैं।
अभी उनकी बात करेंगे वो बहुत बहुत
इंटरेस्टिंग है।
तो इस तरह की चीजों की इन्वेस्टिगेशन हुई
और ये एक सबक अब देखिए ये ये कोर्ट में
प्रूव नहीं हुआ। ये वो केसेस हैं जो खत्म
कर दिए गए। यही वो केसेस हैं जो नैब के
आपके पीछे पड़े जिसको खत्म करने के लिए
डीलें काटी गई। जिसको खत्म करने के लिए आप
ताकत से चिमटेड रहे। जिसको खत्म करके फिर
आपने सोचा कि अब हम इलेक्शन की डील कर
सकते हैं या नहीं कर सकते। 2022 में जब ये
लोग पावर में आए तो एक शबाज शरीफ साहब के
खिलाफ जो टीटी वाले केसेस थे
जिसके अंदर मतलब सबूत यार एक सबूत होती है
कि शेख रशीद के बिस्तर के नीचे से AK-47
निकली या जावेद हाशमी ने भैंस चोरी कर ली।
एक ही होता है। इस तरह का केस होता है या
ईमान और हादी ने महारानी बलोच की ट्वीट
पढ़ ली।
या पुलिस वाला जो है वो मेन नाइंथ की
प्लानिंग के अंदर टेबल के नीचे बैठा होता
है।
ये केसेस अपने मंतकी अंजाम तक पहुंच जाता
है।
अब एक केस है जो कि तय दर तय लेयर बाय
लेयर क्लीनिकली एस्टैब्लिश कर रहा है के
गिल्ट किसकी है? कि यह पैसा है। नहीं
गिल्ट नहीं इल्जाम इस्टैब्लिश कर रहा है
कि यह पैसा है। यह ₹1.5 अरब है। यह ₹8 अरब
रुपया है। यह ₹ अरब है।
हम
ये आपके कैप्चरर्ड बैंक में से निकलता है।
जिस जमीन को गिरवी रख के निकलता है वो
जमीन ऑलरेडी कहीं और गिरवी है। वो पैसा
निकल के जिसके पास आता है, जिस कंपनी के
पास आता है, उसके आप मालिक हैं या मालिक
रह चुके हैं। उस कंपनी ने आज तक कोई
कारोबार नहीं किया है। जैसे ही पैसा उसके
पास आता है, ₹1 अरब रुपया कैश में निकल
जाता है उसके अंदर से।
उफ ₹1 अरब कैश
वो पैसा इस्तेमाल होता है आप ही के कामों
के लिए। वो पैसा उस अकाउंट के अंदर जो
दूसरी फेक अकाउंट है उसमें पैसा ज़ैन मलिक
डाल रहा है। बहरिया टाउन का मुलाजिम डाल
रहा है। कैश बॉयज जो है वो वादे कर रहे
हैं कि हां हमसे कहा गया था 60 करोड़ इधर
डालो, 80 करोड़ उधर डालो। अब इल्जामात ये
हैं। इल्जामात ये हैं कि आपने दो मिसबिशी
पजे गाड़ियां ली जो आपके नाम पे रजिस्टर्ड
है।
माय गॉड
जिनकी पहले ड्यूटी देती है। एक ये
जरा समझाएं मुद ये बहुत इंटरेस्टिंग है।
भाई ये इल्जाम है।
ये इल्जाम थे। जो इल्जाम अपने मंतकी अंजाम
तक नहीं पहुंच सके क्योंकि इन्होंने वो
टीटी वाले केसेस और ये जरदारी साहब के
खिलाफ वाले केसेस नैब के कवानीन के अंदर
त्रामीम कर कर के और प्रोसेस के अंदर
तब्दीलियां कर
जिस तरह हमने देखा और प्रोसक्यूशन
प्रोसकटर अपना लगा के मतलब एक प्रोसकटर
है। वो आपके खिलाफ ये केस चला रहे हैं। एक
रात को उन्हें फोन आता है यार आप नहीं आना
कल से।
और कल से जो साहब आ रहे हैं वो कहते हैं
ये तो केस ही नहीं बनता था।
ये तो केस नहीं बनता।
हां हम हम दिलचस्पी नहीं रखते।
अब हुकूमत में आ गए ना? खत्म हो गई ना
बात।
अच्छा तो वो केस क्या है? वो केस फला साहब
आई डोंट वांट टू आई डोंट वांट टू मतलब ये
सारी चीजें पब्लिक डोमेन में है।
लेकिन जिस तरह मैंने कहा एक बैंक है वो
बैंक फला साहब चला रहे हैं। आप सिख
इंडस्ट्रीज के नाम पे अपने नाम के तीन
शुगर मिलों को पहले तो ₹4 अरब दिलवाते
हैं। वो सिख शुगर मिलों से वो तीन चार अरब
निकालते हैं। फिर आप अपने एक पसंदीदा अरबी
को वो पैसा भेजते हैं इललीगली। फिर वो
पसंदीदा अरबी उन पैसों से एक बैंक खरीद
लेता है। फिर वो आपका बैंक हो जाता है।
फिर उस पसंदीदा अरबी के थ्रू आप अपना बैंक
का प्रेसिडेंट लगाते हैं। फिर वो बैंक का
प्रेसिडेंट जो है वो ये 2030 अकाउंट्स खोल
देता है। जिनके केवाईसी नो योर कस्टमर
फॉर्म के पीछे लिखा होता है भाई रिफर्ड
बाय द
प्रेसिडेंट। नहीं प्रेसिडेंट नहीं उनका
नाम मतलब लेकिन प्रेसिडेंट
हम
वो अकाउंट्स खुल जाती हैं तो यह पैसे जो
हैं यह उन अकाउंट्स के अंदर फ्लड होते हैं
और फिर आपके रेस्टोरेंट के खर्चे वो पैसे
दे रहे हैं। आप टिकट एयरलाइन टिकट एयरलाइन
टिकट वो पैसे दे रहे हैं। आपको जहाज चाहिए
यार
गाड़ी की ड्यूटी का तो बताओ मुझे जो मर
गया बंदा वो यार वो वो वो वो दिस इज लिमिट
तोशाखाना तो पता है ना सबको इमरान खान
वाला तोशाखाना
इरान खान वाला तोशाखाना एक ही बात हो रही
है
दो चीजें भैया
एक गाड़ी आती है दो
दो गाड़ियां
यूएई जो है वो आपको गिफ्ट करता है ये
बुलेट प्रूफ Lexus 570 बुलेट प्रूफ BMW
760 छोटी चीज़ नहीं
ओनली द बेस्ट फॉर द बिग बॉस वो गाड़ियां
तोशाखाने में देखें तोशाखाने का रूल ये है
कि जो भी गिफ्ट आएगा उस वक्त रूल था कि
उसके के 15% वैल्यू में अशर अशर में आप ले
जाओ। बहुत अच्छे-अच्छे लोग
गाड़ी नहीं लेके जा सकते।
लेकिन गाड़ी नहीं ले जा सकते। गाड़ी अगर
आएगी तो वो कैबिनेट पूल में जाएगी।
गाड़ी आती है साहब के नाम। साहब के लिए
तोहफा वो कैबिनेट पूल में नहीं जाती।
स्पेशल परमिशन मिलती है उस वक्त के
प्रेसिडेंट से या प्राइम जो भी अथॉरिटी
हैं उनसे परमिशन मिलती है। नहीं आप रख
लें। आप रखने के लिए इस गाड़ी की जो
असेस्ट वैल्यू है उसका 15% देना है
जो कि ₹1.5 करोड़ है।
नहीं नहीं वो वो अलग है।
अच्छा वो अलग है।
असेस्ट वैल्यू कम है।
देखिए एक्चुअली तो 20 करोड़ की गाड़ी है
लेट्स से या 10 करोड़ की उसकी असेस्ट
वैल्यू भी पांच
क्या?
उस पांच का भी 15% देना है।
वो 15% भी जेब वेब से नहीं देना।
वो 15% भी एक छाबड़ी वाले के अकाउंट में
से आ रहे हैं। पैसे
वो बहुत
उनके पैसे दे रहे हैं। और यह फिर गाड़ियां
आपके असासों के हजम में डिक्लेयर्ड है।
सही
आप इस इल्जाम से निकल जाते हैं पाकिस्तान
में ये इल्जाम जो है ना इसमें हम दिलचस्पी
नहीं रखते अच्छा एक और चीज़ एक आई
एक और एक वो मरे हुए बंदा अभी आ रहा है
फिर आप समझते हैं यार ये दो गाड़ियां मेरे
लिए काफी नहीं है मतलब मैं मुझे दो और
चाहिए तो दो गाड़ियां आप चाइना से लेते
हैं चाइना से फिट कराते हैं बुलेट प्रूफ
कराते हैं
midsbi
मतलब उन गाड़ियों की msubशी बुलेट प्रूफ
व्हीकल्स आप यूएई से पेमेंट करते हैं
चाइना को जिन साहब के नाम पेमेंट करते हैं
वह भी आपके ग्रुप के वो आ जाती हैं
गाड़ियां उनकी 1426 मिलियन कस्टम्स ड्यूटी
असेस होती है अब ये गाड़ियां तो खाने वाली
नहीं है या
नहीं ये खरीदी हुई है
खरीदी हुई है अच्छा ये आपके बाद में
असासों में ऐड हुई ये भी ये आप डिक्लेअर
करते हैं कि मेरी है तो इनकी जब कस्टम्स
ड्यूटी पेमेंट करने का वक्त आता है तो
कस्टम चालान बनता है भाई ₹1 करोड़ इन पे
ड्यूटी बनती है
तो वो ड्यूटी पे करते हैं कैश में एनबीपी
की ब्रांच पे एक मोहम्मद इदरीस साहब
ठीक है।
अ मोहम्मद इदरीस साहब की फैमिली से जब
जाके पूछा जाता है कि भाई ये कैश कहां से
आया? तो एक बिल्कुल फकीर सिचुएशन का घर और
वो फैमिली कहती है कि इदरीस साहब का इस
पेमेंट से 2 साल पहले इंतकाल हो गया था।
ये गाड़ियां जो हैं ये फिर ज़रदारी साहब के
असासों में जमा हो जाती हैं। अब यार इसको
कहते हैं इल्जाम।
अगर आप मुझसे कहें ना इल्जाम क्या होता
है? तो मैं कहूंगा यार यह इल्जाम है। ये
कह देना कि वो मैं भाग रहा था और फला मतलब
वो एनी शाहिद ने कह दिया कि वो फरान मलिक
था और फरान मलिक की जिंदगी के तीन महीने
जाया कर दो। ये ये एक अलग इल्जाम होता है।
लेकिन इसको कहते हैं इल्जाम। अब ये मैं
डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है, एविडेंस है,
कोलबोरेशन है, सब कुछ है।
और रेल है पूरी।
आप ये नंबर्स देखें यार।
वही पैसा कनेक्ट हो रहा है।
अच्छा फिर वो जो पूरी फैमिली एंडिंग इट
कॉक्स लाइक अ डार्क इफ इट स्विम्स लाइक अ
डार्क।
अच्छा फिर हमारे भाई लोग आते हैं। वो
इन्वेस्टिगेट करते हैं ओमनी ग्रुप को। वो
किस लेवल पे इन्वेस्टिगेट करते हैं फरहान
साहब यूबीएल ओमनी एक प्रोडक्ट था यूबी
ओमनी की ब्रांच पे रेड कर दी
यार वो तो बहुत हिस्टोरिक दिन है यार वो
हिस्टोरिक दिन है वो
उसने यूबी ओमनी की वो खबर फिर से नहीं चली
यार वो बहुत हिस्टोरिक दिन है
पूरी दुनिया आई वाज शॉक्ड मैंने कहा ये
यूबीएल पे क्यों रेड हो रहा है यार यूबी
वास अ प्राइवेट बैंक एंड बाय द वे फॉरेन
मनी एंड आई एम लाइक यूबीएल ओमनी एंड दे दे
रेडेड इट बिकॉज़ नहीं ओमनी ओमनी मतलब ये भी
वही होगा पकड़ लो तो यार ये हमारा लेवल ऑफ़
इन्वेस्टिगेशन है। यह हमारा लेवल ऑफ़
सीरियसनेस है। और जब हम एक्चुअली कोई काम
कर बैठते हैं अ ये जो जॉइंट इन जॉइंट
इन्वेस्टिगेशन टीम होती है ना यार यू अगर
सुप्रीम कोर्ट जिस भी नियत से हो रहा है।
मैं नहीं कहता ये बहुत नेक नियती से ये
इन्वेस्टिगेशन हुई थी। लेकिन यार यू पुट
टुगेदर द बेस्ट पीपल यू कुड फाइंड। यू पुट
देम अंडर दी एफआईएस एजेस व्हिच इज़ एन
एक्चुअली ट्रेंड ऑर्गेनाइजेशन।
बशीर मेमन ग्रेट ग्रेट। जस्ट बशीर मेमन
यार एफआईए का जो इंस्पेक्टर होता है जो कि
ये एनसीसीआईए टाइप हरकतों के अंदर नहीं
फंसा हुआ होता उसकी जो ट्रेनिंग होती है
ना दे आर एक्चुअली फॉरेंसिक पुलिसमैन नैब
के लोग इनके सामने
बौने होते हैं
ठीक है मतलब आप किसी को डंडा मार के या
तंग करके या 13 घंटे बिठा के आप उनके अंदर
से जो बात निकाल सके वो नैब निकाल सके
लेकिन जो स्ट्रक्चर नैब इन्वेस्टिगेशन का
होता है वो एक उसकी क्वालिटी एक मजाक होती
है कंपेयर टू टू एफआईआई एन एफआईए अ पुलिस
इन्वेस्टिगेशन और ये जो इन्वेस्टिगेशंस थी
यार ये आप पढ़ें आपको आपके कानों में से
दोहा निकलेगा कुतुब
अच्छा और इनके अंदर ना हर पैराग्राफ के
बाद लिखा हुआ है एक्चुअली जो असली मवाद है
ना वो फला रिपोर्ट में है वो
कॉन्फिडेंशियल है वो पढ़े
एक्चुअली जो असली मवाद है ना इसके बारे
में वो इसके फला रिपोर्ट में है वो पढ़े
कॉन्फिडेंशियल द टिप ऑफ द आइसबर्ग
वो मुझे नहीं मिली मतलब वो कॉन्फिडेंशियल
है ये तो ये तो पब्लिक डोमेन में आई थी ना
सुप्रीम कोर्ट के अंदर सबमिट हुई थी ये वो
इंडेक्स है जो 25 और रिपोर्टों को रेफरेंस
करती है
वही इस तरह रिपोर्ट मैंने नहीं पढ़ी दो
गाड़ियां ट्रैवल
हां
प्लॉट की पेमेंट
खाने की पेमेंट पेमेंट मतलब खाना आप खा
रहे हैं सबसे मजे की वो है कि जो जेवी है
यार वो तो बहुत ही मजे का है
हां एक वो जो पार्थनॉन और पार्क
parklin
ब्यूटीफुल
एक कंपनी बनती है जिसका ना सर ना पैर
मोइस
वो जेवी कर लेती है एक ऐसी कंपनी से जिसका
एक असासा है
मोइस एक चीज जो आपने मेरे केस के दौरान भी
बड़ी मुझे पहली दफा सुने मेंिया
कि मतलब ये काम इस नियत से ही किया गया हो
तो बजाहिर प्राइफेशिया
नहीं लगा सकते
नहीं मैं नहीं लगा रहा मैं
यार देखिए एक इल्जाम है हम एक इल्जाम की
इल्जाम की नौइयत बयान कर रहे हैं इस वक्त
के एक होता है
क्वालिटी ऑफ़ इल्जाम
एक होता है बकरी चोरी
और एक पुलिस वाला टेबल के नीचे छुप के
वादा कर रहा है मैं अल्लाह को हाजिर नाजिर
जान के कहता हूं कि मैंने ये सुना
हां
वो वो उससे ज्यादा बड़ा इल्जाम नहीं लग
रहा
इस बेसिस पे यासमीन राशिद दो साल से जेल
में है
कन्विक्ट हो गई है
दूसरी तरफ आप इल्जाम लगाते हैं सुप्रीम
कोर्ट की एजेस में एक इन्वेस्टिगेशन करके
के जो कि तय दर तय रसीद बाय रसीद यह
इस्टैब्लिश करता है कि भाई यह फला साहब
हैं। यह फला साहब आपके मालिशी हैं। आप
मानते हैं आपके मालिशी हैं। इनके अकाउंट
में से इतने अरब रुपए घूमे हैं। फला साहब
हैं। इन्होंने आपकी गाड़ी की पेमेंट की
थी। उसके बाद आपने अपने असासों में ये
गाड़ी डिक्लेअर की। साहब जो है 2 साल पहले
वफात पा चुके हैं। यार फरान साहब इसका कोई
जवाब तो होता है ना। अब ये ये देखिए ये
मैं मोटी मोटी बातें कर रहा हूं। कि आप दो
दिन इस इस चला सकते मैं एक सवाल करता हूं।
लेकिन मैं आपको यह बताना चाह रहा था ये एक
सिस्टम है।
मैं समझ गया और लेकिन लेकिन इसके अगर आप
सिंध के पॉलिटिशियन से बात करें ना तो वो
इस सिस्टम से इतने अलील हैं कि वो कहते
हैं कि ये अब इतना इंट्रेंस्ड है। तीन
साइकिल्स ऑफ इलेक्शंस में कुछ है ना कि
अगर मैं अपने हल्के को नेक नियती से भी
रिप्रेजेंट करना चाहूं तो मैं इस सिस्टम
से मुस्तसना हो के नहीं कर सकता। क्योंकि
मेरा अंडरलिंग पीपल्स पार्टी वाले उठा के
मेरे अंडरलिंग को मेरे खिलाफ जितवा
सरकार में हमने यह्टब्लिश किया है और
और वो सिस्टम जो है चलता रहेगा और उसमें
कोई रिपोर्टिंग कुछ भी नहीं है। और एक
मतलब बेसिकली इन अ वे वडेरास को भी
डिस्ट्रॉय कर जो
वडेरा कुछ नहीं है। कुछ नहीं है।
देखिए एक वडेरा है जिसने अपना हल्के का
वोट लेके बैठा हुआ है। उसके ऊपर एक मॉनिटर
है। क्लास मॉनिटर लगा दिया है। वो वो असल
बंदा है।
वो एक्चुअल पावर है। वो रिपोर्ट करता है
कहीं और। सिस्टम को
हां। वो सिस्टम को भी रिपोर्ट करता है
कहीं और। हां
उसका पावर स्ट्रक्चर ऑफ़ द पीपल्स पार्टी
से कोई ताल्लुक नहीं है। लेकिन वो सिस्टम
क्या है? बैंक सिं बैंक आपने बना दिया। एक
बैंक काफी नहीं था दूसरा बैंक बना दिया।
वो बैंक अब आपके डायरेक्टली चीफ मिनिस्टर
के अंडर आ रहा है। वो लोनस राइड कर रहा है
टू एलिंग इंडस्ट्रीज। उन एलिंग इंडस्ट्रीज
के लोनस से आप गिरवी रखवा के जहाज ले रहे
हैं। जहाज जो है वो आप अपने मतलब जहाज की
मैनिफेस्ट होती है ना यार फरान साहब। मतलब
आप जितने भी बड़े आदमी हो लिखना तो होता
है ना फला साहब जा रहे हैं। अब वो फला
साहब 60 दफा गए हैं। फला साहब 50 दफा गए
हैं। वो दूध लेने गया हुआ है जहाज। वो
खाना खाने गए हुए हैं मोइज़ लेकिन ये तो
फिर एक बड़ा इसके ऊपर लोग फिर सवाल करते
हैं ना कि मोइज़ और ये तो आपने जरदारी साहब
की और अभी जेआईटी और फेक अकाउंट्स केस की
बात की लेकिन मोइज़ क्या आपको पता चला कि
एवन फील्ड के अपार्टमेंट्स कैसे खरीदे गए
वो भी तो नहीं पता चला आपको आज तक यार
नहीं पता चल गया था ना मतलब जो इल्जाम था
वो पता चल गया था किस तरह खरीदे गए लेकिन
पता तो नहीं चला कुछ हुआ तो नहीं यार फरान
साहब मैं एक बात बताऊं आपको पता है एवन
फील्ड का इल्जाम जब प्रूव हुआ था ना कोर्ट
में बाद नजर बगैर ट्रायल के जो कि गैर
जरूरी था। और एनfield का इल्जाम फिर जब
नैब के अंदर
नैब केस
फाइनली अप्रूव हुआ था नैब ट्रायल में तो
वो एसेट्स बिय्ड मींस प्रूव हुआ था। वो
स्ट्रक्चर ऑफ़ करप्शन प्रूव नहीं हुई थी।
सही बात।
इलिसिस गेंस नहीं प्रूव हुई थी।
ठीक है?
अब मैं अगर आउट ऑन अ लिम जाके आपको बताऊं
कि मेरे ख्याल में शरीफ फैमिली की क्या
करप्शन थी या किस तरह से इतना माल अमैस
हुआ। वो वो करप्शन थी जो हर आदमी करता है
एक अलग लेवल पे कि अगर कोई रेगुलेशन या
पॉलिसी को अफेक्ट कर पाए तो उसको अफेक्ट
करके टैक्स रिलीफ लेके टैक्स छुपा के
टैक्स चुरा के पैसा घुमा के बाहर का पैसा
बाहर रिसीव करके इस तरह करके ज्यादातर जिस
तरह पैसा
भी करते हैं
मेरे ख्याल में दिस वास द गेम
एक्चुअल डायरेक्ट किकबक्स मतलब वही होंगी
जो वो टीटी वाले इल्जामात थे उसमें उसमें
और हुदैबिया में थी। लेकिन आप कहें ना भाई
बल्क ऑफ द फैमिली एंपायर किस चीज से बन
रहा है? तो आप कहीं इशारा कर सकते हैं ना
यार भाई इनके पास जमीनें हैं। इनके पास
मिल हैं, इनके पास स्टील है। आप ये कह
सकते हैं ना भाई कुछ ना कुछ है। इसके ₹10
बनने थे। ₹100 बन गए। ये या तो आप खुदा की
देन कह लें या आप द राइट ऑफ़ द पावरफुल इन
पाकिस्तान कह लें। लेकिन यार यहां पे तो
कोई सीन ही नहीं है ना यार। कोई काम ही
नहीं है ना।
मुझे जाफर यहां पे एक सवाल आता है वो
इमरान खान साहब जेल में है आजकल। लेकिन जब
वो अपने उनका सेम पेज का पीरियड था। तो वो
जब वो पेट खत्म हुआ तो एक बड़ा तारीख
जुमला कहते थे। कहते थे मुझे लगता था कि
ये लोग वाकई इन चोरों के खिलाफ है।
वाज़ ही दैट नाइफ?
यस ओके लाइफ वाज़ अ शॉर्ट एंड डायरेक्ट
आंसर।
नहीं अब्सोलुटली। इमरान खान इफ ही हैज़ नॉट
लर्न हिज़ लेसन।
इफ ही गेट्स अनदर चांस। एंड इफ ही हैज़ नॉट
लर्न दिस लेसन प्रॉपर्ली।
या
कि इस मुल्क के
पावर स्ट्रक्चर क्या है?
और इस मुल्क का एक्चुअल प्रॉब्लम क्या वो
तो अब समझ में आ गया है। वो तो बड़ा
नहीं नहीं अगर मेरे साथ प्रॉब्लम है तो आप
अगर यह समझ ये तो समझ आ गया।
यह तो समझ में आ गया।
लेकिन अगर स्ट्रक्चरली नहीं समझ आया कि
भाई ये इस मुल्क को ठीक इसलिए नहीं करेंगे
इसलिए कि ये मुल्क जिंदा इनके लिए है। ये
मुल्क के लिए जिंदा नहीं है।
ये सारे लोग
मुझे समझ में आ रहा है।
भाई आप अभी ये ये औरंगजेब साहब को निकालने
की बातें शुरू हो गई है। क्यों हुई है?
क्योंकि अनपॉपुलर वैसे ही हैं। आवाम के
अंदर रूट्स नहीं है और जो काम करना पड़
रहा है मिनिमम कि भाई ताजर को टैक्स कर दो
यार उस स्ट्रक्चर के अंदर अपने आप को ले
आओ वो वो हो नहीं पाएगा। तो नतीजतन आप ही
कमर तोड़ेंगे सेल्स टैक्स के ऊपर और जोर
लगाएंगे पेट्रोलियम लेवी के ऊपर और पैर रख
देंगे। लेकिन इस तरह मुल्क नहीं चलते।
नहीं चलेगा।
और ये जब पता चल जाता है दो-ती सालों में
सारी कोशिशें वशिशें करके तो फिर मुश्किल
काम करने होते हैं। मुश्किल काम के लिए
आवाम से मैंडेट की जरूरत होती है। मैंडेट
पहले दिन से नहीं थी। तो फिर बस यही होता
है म्यूजिकिकल चेयर्स और यार फरान साहब
इन्होंने जो मिडिल क्लास की कमर तोड़ी है
ड्यूरिंग द इमरान खान एरा वि द डॉलर एंड द
वे इट वेंट और इससे पहले ड्यूरिंग द इसाक
डार एरा विथ द डॉलर एंड द वे इट वेंट
बिकॉज़ ऑफ़ दिस डॉलर मैकेन मैकेनेशंस
जो परचेसिंग पावर पैरिटी है मिडिल क्लास
की वो वो है जो 2016 में थी
जो प्राइसेस हैं वो ऐसी हैं कि आप कहीं भी
दुनिया में चले जाए आपको कोई चीज सस्ती
नहीं लगती आपकी अगर ये कमर फिर से टूटेगी
अभी फिर से रियल की बात हो रही है। अभी
फिर से 10-15% ओवर इनफ्लेटेड करेंसी की
बात कर रहे हैं। यह आप अगर एक दफा और कर
देंगे तो किसी एक मिडिल क्लास इंसान को आप
आधी लाइन का लॉजिक भी नहीं दे सकेंगे कि
इस मुल्क के फ्यूचर तुम्हारे लिए इस मुल्क
में फ्यूचर जो है फना है या फलाना है। आई
विल टेल यू समथिंग अभी एक फ्रीलांसर्स को
टैक्स करने की बात हो रही है। आई नो हम
अपने टॉपिक से थोड़ा एग्रेस कर रहे हैं।
ग्रेट गाय बहुत अच्छा आदमी है। पूरी
फैमिली को भी सपोर्ट करता है। उसका मुझे
मजा है। फरान भाई कि ये जो ये टैक्स
मेजर्स की बात कर रहे हैं। अगर ये टैक्स
मेजर्स इंप्लीमेंट हो गए मैं पाकिस्तान
छोड़ दूंगा। कह रहा है मैं नहीं रह सकता।
इट विल बिकम अनअफोर्डेबल फॉर मी टू लिव इन
दिस कंट्री। सो अगेन इट्स इट इज़ केओस देयर
बट कमिंग बैक टू सिंध एंड पीपल्स पार्टी।
एक इस वक्त लोग बहुत सारे यह सवाल करेंगे
कि इस वक्त पीपल्स पार्टी पे 18वीं तरमीम
को लेके एक प्रेशर है। इसीलिए रफ्तार बैठ
के ये बात कर रहा है। रफ्तार इसलिए अभी
बैठ के ये बात कर रहा है। प्रॉब्लम यह है
कि इस मुल्क में अब जर्नलिज्म करने का कोई
टाइम नहीं बचा है। हां। हर वक्त कोई किसी
का हर वक्त किसी ना किसी का वक्त होता है।
हां। हर वक्त किसी का। मैं मैं बड़े
फ़क्चुअली बता सकता हूं कि मैंने कब-कब
क्या-क्या चीजें हम लोगों ने रफ्तार पे
डाली है और हर एक के रिएक्शन में उस
पार्टी की तरफ कहती है ये वक्त नहीं है ये
करने का। तो मुझे तो लगता है कि अब
जर्नलिज्म करने का कोई वक्त नहीं है।
अपनी बात करने का कोई वक्त नहीं है। आवाम
के मफाद का एजेंडा उठाने का कोई भी वक्त
नहीं है इस मुल्क में। लेकिन मोइस डू यू
थिंक कि इस वक्त जो सेटअप है और जरदारी
साहब जितने इंट्रेंज्ड हैं इज एनी वे
एनीवन कैन अफोर्ड टू
पिस हिम ऑफ जरदारी साहब को नाराज करना
अफोर्ड कर सकता है ये पूरा सेट सेटअप? भाई
इस सवाल से पहले फिर आपने यह जायजा लेना
है कि ज़दारी साहब कितने पॉपुलर हैं?
पॉपुलर है।
हां, आई डोंट नो।
अगर जजाई साहब बिल्कुल भी पॉपुलर नहीं है
हम।
और अगर यह सिस्टम बस एक पावर बेस्ड सिस्टम
है तो पावर तो इससे ज्यादा है वहां पे।
हम
व्हाट दैट इज अ वेरी वेरी वेरी
इंटरेस्टिंग। तो अगर पावर पावर की लड़ाई
है तो फिर तो हो सकता है
वो व्हिच वन इज इट
लेकिन अभी तक हो तो नहीं पाया
नहीं क्योंकि वो लड़ाई लेने का शौक नहीं
रखते ना क्योंकि वो जो अगर ये शतरंज का
खेल है तो बोर्ड तो किसी और के पास है ना
वो जेल में बैठा है खिलाड़ी तो बाकी सब
हैं
इस खेल में तायने मरातिब है जरूरी शातिर
की इनायत से तू फर्जी में प्यादा बेचारा
प्यादा तो है मोहरा नाचीज़
पर फर्जी से भी पोशीदा है शातिर का इरादा।
क्या बात है।
तो आई थिंक ये यू नो ये फर्जी और प्यादे
की लड़ाई है।
बट द चेस प्लेयर्स इन जेल
आई एंड आई डोंट से दैट ही हैज़ द पावर राइट
नाउ।
बट ये अगर लड़ाई पे बात आई ना तो ये दीज़ आर
टू पीसेस इन अ चेस पज़ल एंड वन इज़
स्ट्रोंगर दैन द अदर एंड दे नो इट।
वन इज़ स्ट्रोंगर देन अदर क्लियर।
ऑफ़ कोर्स दे। ऑफकोर्स दे।
ऑफ़ कोर्स दे। हैवंट यू फल्ट इट? आई हैव
फेल्ट इट। या या आया फेल्ट इट नहीं लेकिन
सवाल यह पैदा होता है कि
इसके अंदर एक चीज इस्तेमाल होती है वो
होती है कराची को सूबा बनाया जाएगा एनवी
इरान साहब अगर पीटीआई के उभरने के बगैर ये
कोई भी चीज हो सकती है ना तो ये कल हो
जाएगी
सिर्फ ये है क्योंकि एक्चुअल लड़ाई कोई
लड़ाई नहीं है मतलब ये ये इनके दिलों में
तेल नहीं है दे कांट टेक दिस फाइट हां
मतलब ये
इनके बस सी बात है
टू फाइट वि द पीपल दैट वांट द 28थ
अमेंडमेंट। तो ये तो बहुत क्लियर है।
हां मतलब अगर वो चाहेंगे तो ये कुछ भी
नहीं कर सकते।
तो फर्क बस ये है कि इनके शोर मचाने से ये
पीटीआई की गोद में तो नहीं बैठ जाएंगे।
पीटीआई इनको अपनी गोद में तो नहीं ले
लेगी। ये नो आई डोंट
नो। अब क्योंकि दैट कांट हैपन। या फिर वो
स्क्रू टाइट करके इंश्योर कर देंगे कि दैट
कांट हैपन। तो फिर सवाल ये है कि क्या ये
खुद इतना शोर तो नहीं मचा सकते? और मेरे
ख्याल में ये नहीं मचा सकते।
नहीं मचा सकते। मेरे ख्याल में इनको कराची
के अंदर अगर कल पीपल्स पार्टी की हुकूमत
देखिए एक तो हम 18वीं तरमीम को ऑन द रेड
एक बात कर लें। 18वीं तरमीम वाज़ गुड फॉर द
कंट्री। 18वीं तरमीम एक मिड वे स्पॉट था।
उसके बाद 18वीं तरमीम के थ्रू ही
प्रोविंशियल फाइनेंस कमीशन आके 14A को अमल
में लाके जो पूरी दुनिया में होता है कि
भाई शहर का मेयर हो।
एक इजलास नहीं हुआ। शहर का मेयर हो, शहर
का काबिल मेयर हो, फाल मेयर हो, मफाल
मकामी हुकूमत हो, आपकी गली के सामने अगर
कचरा जमा हो रहा हो, तो जो जवाबदेह हो
कोने पे खड़ा यूनियन काउंसलर हो, असेंबली
में बैठा लोकल गवर्नमेंट मिनिस्टर ना हो।
मतलब ये तो सिंपल बातें है ना। ये कितनी
दफा रट सुनाएगा कोई?
लेकिन ये पैसा अगर नीचे डिवॉल्व हो जाता
तो फिर यहां इस इस बैग में थोड़ी जाता
यार।
मोइज़ आई वांटेड टू टॉक अबाउट द मेयर
एज वेल। बट बिफोर दैट मैं उसको थोड़ा सा
कंक्लूड कर दूं। तो आप इस वक्त इट इज
एनीवनस गेम राइट नाउ यू थिंक कुछ भी हो
सकता है मतलब पीटीआई के अलावा इट्स एनीवन
हां पीटीआई के अलावा कि कुछ भी हो सकता है
इस वक्त
यार मैं एक और चीज कहता हूं अगर कोई आधी
पॉपुलर जमात होती ना इस शहर में
सुबह छोड़ दें
इस शहर में आधी पॉपुलर भी कोई जमात होती
जितनी जेयूआईएफ की इंटीरियर सिंध में
सपोर्ट है
उतनी सपोर्ट अगर किसी की भी इस शहर में
होती ना पीटीआई के अलावा और वह टीएलपी
नहीं होती क्योंकि टीएलपी का भी पता कर
चुका है। हां। तो यह मामला बहुत पहले हो
चुका होता। और यह व्हेन पुश कम्स टू शेव
देखिए
जमात इस्लामी
विफाक का दिवालिया निकल चुका है।
हां हां
पैसे चाहिए
पैसे कहां है? सुबह के पास है।
कुछ ना कुछ तो इसका होगा।
नहीं वो लेकिन स्पेंडिंग भी तो बेतहाशा
है। स्ट्रक्चरली वी आर ऑफ़
नहीं नहीं यार वो एक अलग बात है। लेकिन
ईजीएस्ट पैसा कहां से तोड़ा जा सकता है।
पीएल पीएल लगाए जा रहे हैं। लगाए जा रहे
हैं।
नहीं लेकिन 350 अरब रुपए हैं ना इनकी जेब
में मतलब सिंध की मतलब
बिलकुल ठीक है। मोह
लोग कमेंट्स करेंगे यार फ्रांस देखिए एक
तो कल्चर ऑफ करप्शन की वजह से ये ये ऐसा
नहीं है कि भाई 10 अरबपति हैं और बाकी सब
फकीर हैं। हां हां यह पैसा फ्लो डाउन ये
सिस्टम का स्ट्रक्चर एक ब्यूटीफुल कोन है।
तो ऊपर जो है वो क्रीम है। मतलब दसियों
अरब फिर अरब फिर दसियों सैकड़ों करोड़ फिर
दसियों करोड़। फिर नीचे भी इतने करोड़ हैं
कि एक ब्लॉक फाइव क्लिफ्टन जिसकी सड़क आज
से 15 साल पहले आखिरी बार बनी थी। जिसके
सामने कूड़े का अंबार है घर के वो क्योंकि
कॉर्नर पे बैठा 2000 गज का घर है 70 करोड़
का बिक रहा है।
मोहित 70 करोड़ का वो घर बिक रहा है। ना
उसमें पानी आता है ना उसमें बिजली आती है।
मतलब उसकी उसकी लाइन लॉसेस उस द लास्ट
टाइम इट सॉ लाइन वाटर वास 20 इयर्स एगो
7700 मिलियन।
बॉयज आप क्लिफ्टन की बात कर रहे हैं।
डीएचए फेज एट में इस वक्त आप हजार गज 500
गज का कोई घर देखें। 20 करोड़, 25 करोड़,
40 करोड़, 50 करोड़, 70 करोड़। साहब ये ये
घर जो हैं जो आप बात कर रहे हैं वो
इंफ्रास्ट्रक्चरली कराची का बेस्ट एरिया
है। वो सिक्योरिटी वाइज कराची का बेस्ट
एरिया है। वो प्रॉमिस वाइज कराची का बेस्ट
एरिया है वो कराची की कल है। तो आप वहां
पे कह सकते हैं कि यार जितने का होना
चाहिए उससे दुगना है। क्योंकि ब्लैक मनी
बाय कर रहा है। सही है? लेकिन इस इलाके
में जिसकी मैं बात कर रहा हूं। हो चुकी
है। वहां पे ना सिक्योरिटी है। रात में
हीरोइनची आके आपकी गाड़ी के हब कैप्स ले
जाते हैं। ना क्लनलीनेस है। रोड के ऊपर
कचरे का अंबार है। लेकिन क्योंकि पैसा
कहीं ना कहीं तो जाना है और उसको पेपर पे
4 करोड़ दिखना है और एक्चुअली 70 करोड़
होना है। तो वो पैसा फिर इस घर में जा रहा
है। इस घर की कीमत किसी भी मयार से 70
करोड़ नहीं हो सकती।
और वो किसी प्रोडक्टिव में तो जा नहीं
रहा।
जा नहीं सकता ना। कहीं ना कहीं से तो
डिक्लेअर होना चाहिए।
वही हम लोग रेंटल के लिए जगह देख रहे थे।
जी।
और मैं यही शहीद मिल्लत पे एक बिल्डिंग
में गया। उस बिल्डिंग के अंदर रियलस्टेट
एजेंडे हमें दिखाने शुरू किए घर ऑफिसिसेस।
तो उसने एक दिखाया, दो दिखाया, तीन
दिखाया। मैं थक गया। मैंने कहा भाई कितने
दफ्तर हैं तुम्हारे पास? कह रहा है फरहान
भाई हमारे स्टेट के पास 35 ऑफिसिसेस हैं
इस बिल्डिंग में। उसके बाद मैंने पूछा
स्टेट क्या करता है? तो उसप जो उन्होंने
जवाब दिया मैं यहां नशर नहीं कर सकता।
मोहित ने मुझे सख्ती से मना किया है। आप
ये मत बताइएगा कि उसने क्या जवाब दिया था।
लेकिन आप डीएम करके पूछ सकते हो।
तो वो जो उसने जवाब दिया मोइज़ वो आपको जो
मैं बता ही चुका हूं मोइज़ वो जवाब
यार वो जब देखिए
वो सबसे जावे जवाब है वो
जवाब में एक पूरी किताब
किताब है
देखिए
मतलब 5 6 करोड़ का एक ऑफिस है वो
35 दो ढाई अरब एक अननोन बंदा जो तौहीद
कमर्शियल पे बैठता है
आपका ये जो ऑफिस है
इसकी जो रेंटल रिटर्न है वो थोड़ी सी
कुछ थोड़ी सी लॉजिकल है
हां
नहीं थोड़ी सी लॉजिकल है
थोड़ी सी हां
लेकिन जो इस 70 करोड़ के घर की रेंटल
रिटर्न होगी फानसान साहब है
वो 2% होगी
रुपए की कदर हर साल 11स गिर रही है
आपको 2स वापस दे रहा है
तो यह कौन सी इन्वेस्टमेंट है भाई
कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है
और डीएचए फेज एट की जो आप घरों की बात कर
रहे हैं या इमार के अंदर जो घर बिक रहे
हैं इमार के अंदर जो घर बिक रहा है वो
मेंटेनेंस कॉस्ट के बाद 2% भी रिटर्न नहीं
दे रहा
गॉड 2% भी रिटर्न नहीं दे रहा बेस्ट प्लेस
टू लिव इन कराची
बेस्ट प्लेस टू लिव इन कराची 2% रिटर्न भी
नहीं दे रहा क्यों खरीद रहे हैं भाई
क्यों खरीद रहे हैं
व्हाई आर पीपल बाइंग
भाई साहब मैं आपको मैंने थोड़ी सी रिसर्च
की थी डॉलर रिटर्न 2011 से 2010 से मैंने
जरा 18वीं तरमीम के बाद से जरा रियलस्टेट
को स्टडी किया है। स्टॉक मार्केट 9.2%
डॉलर बेस्ड रियलस्टेट 8.2%
एसएपी 500 7.2%
व्हाई वुड एनीवन इन्वेस्ट टू गेट 8.2% एंड
बाय द वे मोइज़ एक बहुत खतरनाक चीज। आई नो
ये हमारी टॉपिक ऑफ़ डिस्कशन नहीं है। लेकिन
मोहित पीएसएक्स का तो आपकी वो 100 कंपनीज़
है उनका रिटर्न मेजर होता है ना। मोहित
रियल स्टेट में जो बहरिया टाउन में
सैकड़ों अरबों रुपए फंस गए। डीएचए सिटी
में फंस गए उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। कोई
ये ये 8.2% पता नहीं किस तरह का रिटर्न
है।
ये 8.2% के अंदर डिस्काउंट नहीं है।
डिस्काउंट नहीं है उस चीज का आना चाहिए।
हां नहीं एडजस्टेड है या आपने बस एक फज़ ले
लिया किसी जगह। वो है जो सक्सेसफुल है।
जो सक्सेसफुल है जो इतने ही लोग बर्बाद हो
गए उसको कहीं अकाउंट नहीं कर रहे आप रियल
स्टेट में क्योंकि वो डाटा ही नहीं है।
आपने गोल्ड किया?
गोल्ड गोल्ड इज़ परहैप्स बेटर देन ऑल ऑफ़
दिस।
आप सोचें यार जो जो दुनिया के बेस्ट
इन्वेस्टर्स कहते हैं दुनिया की लेज़िएस्ट
इन्वेस्टमेंट है।
लेजी वो वो इससे बेहतर है।
जो दुनिया के बेस्ट इन्वेस्टर्स कहते हैं
कि वर्ल्ड्स वर्स्ट इन्वेस्टमेंट है
क्योंकि प्रोडक्टिव नहीं है। वो इन सब से
बेहतर है।
मैं वही आपसे पूछना ये चाह रहा हूं मोहित।
आपके पास सिवाय इसके कि आप काला पैसा
छुपाने का एक काला कुआं है। उसके अलावा
क्या सेंस है कि मैं रियल स्टेट में पैसे
लगाता हूं।
नो सेंस।
अब्सोलुटली रेंटल यील्ड है ना जॉब्स
क्रिएट हो रही है। मोइज़ मैं आपको इतनी
जबरदस्त स्टोरी है। साजगार इंजीनियरिंग
जिसने जो पहले रक्षा बनाती थी और अब ये
हवल की गाड़ियां बना रही है। आपने देखी
होंगी। सर
जरूरत से ज्यादा ओवर प्रिस्राइब्ड है।
हां
मोहज़ इन्होंने
2022 में एक प्लांट लगाया। शायद ढाई से 3
अरब की उसकी कॉस्ट थी। मोहित उस ढाई अरब
के प्लांट को लगा के वो प्रॉफिट्स में ही
10 टाइम्स ज्यादा कमा चुके हैं चार साल
में।
दैट्स इन बिनेस।
दैट्स द डिविडेंड मतलब द लैंड इज नॉट द
प्ले इन अ फैक्ट्री।
लैंड शुड नॉट बी अ प्ले इन द फैक्ट्री।
लैंड इज अ प्ले एवरीथिंग।
ये आप आईएमएफ के दूसरे कंपाउंड प्रोग्राम
के अंदर तवातुर से गए हुए हैं। ये ये
स्टोरी क्यों एक्सिस्ट करती है कि एक
कैटेगरी है नॉन फाइल।
यस। ये स्टोरी क्या कैटेगरी है?
ये स्टोरी क्यों एक्सिस्ट करती है कि यार
जमीन एक्चुअली ₹10 की है। लिखेंगे ₹2 की।
ये स्टोरीज क्यों एक्सिस्ट करती है?
मोइज ये जो
और सैलरी क्लास का टॉप टैक्स ब्रैकेट 45%
लेकिन आप आपकी बात से मैं इतना इसमें ये
नाउ आपकी बात से मैं कनेक्ट कर रहा हूं।
मोइज आपने कहा लाहौर में इस लेवल का नहीं
है। मोइज आप लाहौर में कराची में जितने का
तुम आप इमार का फ्लैट लेते हैं ना या कहीं
भी कोई शहीद मिलता है कोई फ्लैट। आप लाहौर
में 500 गज का डीएचए में घर ले ले लेते।
आपने वो घर देखा है?
बेहतरीन घर होगा।
आपने उस घर की खिड़की से खिड़की से मनाज़र
क्या होता है? देखें। मतलब एक हरियाली भरा
बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर का एक तो वो हमें
डीएचए भी ठीक नहीं मिला।
वालों की कराची वालों का गिला होता है ना
प्रॉपर खूबसूरत जगह पे खूबसूरत
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ आपको एक घर कराची
से आधी कीमत में मिलता है क्यों क्योंकि
वो जो पेपर पे लिखा है उतने का है ये
क्योंकि ये जो यहां का स्कैम है ना इस
स्कैम को कैच अप नहीं कर पाए वहां पे
नहीं मनी देयर इज़ मोइश देयर इज मोर मनी
चेसिंग देयर इज मोर मनी अवेलेबल मोर ब्लैक
मनी अवेलेबल ये है इसका सबसे बड़ा
नहीं अब्सोलुटली
ज्यादा काला पैसा अवेलेबल
मैं कह रहा हूं ज्यादा काला पैसा तो
अवेलेबल है लेकिन मैं कह रहा हूं कि उस
काला पैसे को पार्किंग के लिए जो जो
ब्रैकेट मिल रहा है ना कि है ₹2 की लिखा
₹1 लिखा ₹2 का है
वो लाहौर में नहीं है मतलब वो जो रिपोर्ट
में यार इस्लामाबाद में लाहौर में 10 20
30% का डिफरेंस है ये 100्स ऑफ़ पर्सेंट्स
का डिफरेंस नहीं है
नहीं आई थिंक डीएचएस शायद इस्लामाबाद में
तो एक्सेंपशन मिली थी पुराने रेट्स के ऊपर
अभी
यार वो एक्सेंपशन के बाद भी आधे का फर्क
होगा
अच्छा ये दसयियों का फर्क नहीं है कि के
किा क्रिक विस्टा का एक फ्लैट जो है वो ऑन
पेपर 2 करोड़ का है और एक्चुअली वो 18 करोड़
का ये डिफरेंसेस नहीं है।
ये भी हो सकता है। ये भी हो सकता है।
बिल्कुल हो सकता है। लेकिन मैं बात ये कह
रहा था कि एक बड़ी सिंपल सी बात है। मूवीस
व्हाट व्हाट व्हाट पाकिस्तान की 50 फीसद
आबादी रहती है एक कमरे के मकान में। एक
कमरे के मकान में
और वो भी मकान नहीं है।
मकान क्या है?
नहीं जो भी है वो स्ट्रक्चर ड्वेलिंग नहीं
है।
अनस्ट्रलिंग है।
कराची में सबसे ज्यादा लोग हैं कंपेयर टू
एनी अदर सिटी लाइक इट।
जो रेंट पे रहते हैं। कराची के सिर्फ 50
से 60% लोगों के पास अपने घर हैं। दिल्ली
में, मुंबई में, बाकी शहरों को तो छोड़
दें। 86% 90% होम ओनर्स हैं। कराची में ये
ये परसेंटेज ऑलमोस्ट हाफ है। इसी वजह से
है। सो दिस ऑल ऑफ़ दिस सिस्टम हैज़ डन। एक
और जो मतलब ये तो बड़ा एक अनइटेंडेड
कॉन्सिक्वेंस है कि इसने कराची वालों की
रेंज से घरों और उन चीजों को भी निकाल के
बाहर कर दिया। और उसके जो एंसिलरी स्ट्रेस
पॉइंट्स होते हैं टू फैमिली लाइफ वो एक वो
तो अनडॉक्यूमेंटेड है। मतलब कि एक आदमी
अपनी रेंट पे पूरी जिंदगी रह रहा है। उसकी
क्या स्ट्रेसेस हैं जिंदगी की? उसकी
फैमिली पे क्या स्ट्रेससेस है?
बैंक सेलेक्ट पैसे नहीं देते।
अननोन ऑफ़ अनहर्ड ऑफ़ ए प्रॉपर फाइनेंसिंग।
फाइनेंसिंग 11% पे अगर कंपाउंड इंटरेस्ट
पे आप करेंगे तो आप क्या लेंगे?
क्या लेंगे यार?
20 साल के लिए 11% पे लूम है। मतलब
अपने घर की कीमत जो है वो आप इंटरेस्ट पे
दें।
नो सेंस।
वो भी मिल किसको रही है जो कि बैंक के
अंदर खुद ही काम कर।
जो भी बैंक के अंदर खुद काम कर कमिंग बैक
टू दिस।
कराची
बहुत ही इंपॉर्टेंट सवाल लोग होते हैं।
कराची का कोई मुस्तकबिल नहीं है। लोग कह
रहे हैं यार इस मुल्क का जो मुस्तकबिल ये
देखें ये वेयर आर वी हेडेड फरान साहब आपने
मुझसे अगर आप 10 साल पहले पूछते कि
तुम्हारे कल की क्या उम्मीद है? तो मैं
आपको कह सकता था कि मेरी दुबई से बेहतर
जिंदगी मैं अपने लिए कराची में देखता हूं।
अह बिकॉज़ ऑफ़ व्हाट आई कुड अर्न, बिकॉज़ ऑफ़
व्हाट आई कुड डू विद माई
डिस्पोजेबल इनकम। मैं आज यह नहीं कह सकता
और जब यह इस दफा वाली हिट लगेगी तो उसके
बाद तो कराची में रहना सेंस बनता है या
नहीं बनता यही सवाल होगा और इस सवाल का
जवाब या इस सवाल का तसवुर भी मैं कर सकता
हूं क्योंकि मैं बहुत प्रिविलेज्ड हूं और
मैं बहुत लकी हूं और ना यह तस्सवुर मैं कर
सकता हूं या नहीं वो एक अलग बात है लेकिन
यह सवाल भी उठ सकता है कहीं पे मतलब आई
कांट गो एनीवेयर व्हाट कैन आई डू आई एम 40
इयर्स ओल्ड आई एम अ लॉयर हु
कुड हैव लेड क्लेम टू सम स्टैंडिंग आई डू
अ हाइली लोकलाइज़्ड एंड स्पेशलाइज़्ड लाइन
ऑफ़ वर्क आई अ लिटिगेटर और आई एम एन
एडवाइजर टू लॉज़ दैट आर हाइली स्पेशलाइज़्ड
व्हाट एम आई गोइंग टू डू व्हेन द पाउंड
वाज़ एट 110
आई हैड कंटेंपररीज़ हु हैड द सेम
प्रॉब्लम्स एज़ मी। जो मेरे साथ ग्रेजुएट
हुए थे उनकी लगभग वही प्रॉब्लम्स होती थी
जो मेरी होती बस थोड़ा क्वांटम में फर्क
होता था कि उनको 400 पाउंड की फिक्र है तो
मुझे उसके कंपैरेटिवली ₹400 की फिक्र है
जब हम 20 साल के होते थे यार आज वो सेकंड
होम्स को रेंट करें बीए बीएनबी पे या ना
करें मैं अपना फोन नहीं तब्दील कर सकता
बिल्कुल सही बात
मतलब और ऐसा नहीं है वो और ऐसा नहीं है कि
उनकी सक्सेस के क्वांटिफायर्स मुझसे फर्क
है
आप पीछे रह गए
मतलब ऐसा नहीं है कि वो वो मुझसे ज्यादा
अपने फील्ड्स में सक्सेसफुल है लेकिन बस
आप पीछे रह गए हमारी कुत खरीद का
मैग्नीट्यूड थोड़ी फर्क हो गया।
इट वाज़ लेकिन एक चीज आप आप लाहौर कब गए
लास्ट टाइम?
मैं एक्चुअली वीजा के बगैर गया था लाहौर।
अ लास्ट मेरे ख्याल से दिसंबर में गया था।
कैसे?
कैसा लगता है लाहौर जाके आप?
यार लगता है कि पता नहीं क्यों वीजा नहीं
मांगते। मुझे मुझे मतलब लगता है कि थैंक
यू फॉर लेडिंग मी इन।
यार एक तो बहुत खूबसूरत है। एक स्टोरीड
शहर है। एक वर्ल्ड सिटी यानी कि एक
एंशिएंट शहर है। हम तो हम तो एक मतलब
हादसाती तौर पे बने हुए शहर हैं। जिनकी एक
अलग हुस्न होता है। और क्योंकि सीसाइड शहर
हैं तो उनका कभी
पेड़ों दरख्तों का हुसन नहीं होता। लेकिन
एक अपनी स्टोरीज का हुस्न होता है। लेकिन
यार आप लाहौर के एक एवरेज सिटीजन से जो कि
हिकारत की नजर से ही पीएमएल नून को क्यों
ना देखें। लेकिन उसकी जो एक्सपेक्टेशन और
डेवलपमेंट है, उसकी जो एक्सपेक्टेशन और
डिलीवरी है, उसकी जो भाई ये ये कैनाल है,
इसको वो बड़ा कर रहे हैं। इसमें वो एक
होटल चलाएंगे। वो होटल जो है वो फिर एक
मतलब और ये गुफ्तगू क्यों हो रही है?
मैंने वो क्या कौन सी ऐप है? वो गाड़ी
वाली
इन ड्राइव।
हां इन ड्राइव। इन ड्राइव पे मैंने गाड़ी
बुक की है। तो मैं एंड सारा वेंट विद मी।
तो हम दोनों बात कर रहे हैं तो उसने सुन
लिया के वो कैनाल रोड के अंदर कोई खुदाई
हो रही थी। तो हमने कहा ये मतलब दिस इज द
फर्स्ट टाइम वी हैव सीन समथिंग ये ये पहली
दफा है कि हमने कोई चीज मतलब लेस दैन
परफेक्ट देखी है तो उसको इतनी चोट लगी दिल
पे वो उसने कहा कि सर ये अभी तो ये ठीक कर
रहे हैं इसको ये बड़ा करेंगे इसके अंदर एक
फ्लोटिंग होटल होगा यहां पे खाना खाएंगे
फिर चेयर लिफ्ट होगी य लिफ्ट आपको उठा के
वहां तक लेके जाएगी फिर ये होगा 40 अरब का
प्रोजेक्ट है अभी अप्रूव है मतलब वो ही
टूक प्राइड इन ह सिटी आप अपने किसी
कंटेंपररी वकील से बात करें तो दे यार दे
दे टॉक अबाउट द मॉर्निंग्स दे टॉक अबाउट द
ट्रीज दे दे टॉक अबाउट कि यार हमारे हाई
कोर्ट की बिल्डिंग देखो कैसी है। हम हमारी
सुबह कैसी गुजरती है। हमारे पैडल कोर्ट के
इर्द-गिर्द हरियाली देखो। मतलब हरकतें वही
है जो आपकी हैं। जाहिर है मतलब ओम वही है।
हां। लेकिन यार उनकी स्टोरी चेक करें।
मतलब उनकी आप मतलब ये पोलो ग्राउंड के
सामने जो पेड़ हैं उनको सेव करो। उनके
पेड़ देखें यार। 100-100 साल पुराने उनके
पेड़ हैं। कोई कॉर्नोकार्पस नहीं है। मतलब
जस्ट एक तो उनकी हेरिटेज एंड कल्चरल
प्रोटेक्शन जो है वो भी इट्स मच
स्ट्रांगर। देयर इज अ ग्रेटर प्राइड इन
देयर सिटी।
इमीग्रेंट सिटीज में एक काम होता है।
नहीं हमारा भी यार अच्छा खासा प्राइड होता
था यहां पे। फरहान साहब बड़े शौक से कहते
थे लाहौर एक गांव है। मतलब बड़े होते हुए
बड़े शौक से हमें बताया जाता था कि लाहौर
इज नथिंग।
और वो शायद उस वक्त वो दीवारें नहीं
खान फाउंडेशन ने इंप्रूव की थी। उनके
अंदरून शहर को रनोवेट नहीं हुआ था जो भी
था या फिर जो मतलब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं
था या जो भी था लेकिन द बेसिक्स वर देयर
राइट द बेसिक्स ऑफ़ दैट सिटी वर देयर बट इट
वाज़ अ टाउन कंपेयर टू कराची इट रियली वाज़
मतलब 18थ अमेंडमेंट के अगर दो एक्सट्रीम
आपको
एंड्स देखने है ना तो आप लाहौर देखें और
कराची देखें।
हां एक्सेस हां एक्सेस मनी
एक्सेस मनी टू द प्रोविंसेस के दो
एक्सट्रीम एंड्स एक्सट्रीम एंड्स देखने है
वो आप देखें। एक तो यह है कि मेरा बैंक और
दूसरा यह है कि मेरा शहर
बस लाहौर और कराची 18वीं तरमीम के द गुड
बैड एंड द अगली
लेकिन दोनों अगली है ना फरान साहब
दोनों अगली है एक शहर दोनों एक शहर को
आपने दोनों लेकिन वही अब लाहौर अब सिर्फ
अब ये बात पुरानी हो गई है आई थिंक पंजाब
में डेवलपमेंट बहुत और दूसरे शहरों में भी
फैल चुकी है
नहीं लेकिन और हर कोई फैला है
जब तक साथ की देन होगी ना डेवलपमेंट
जब तक स्ट्रक्चरली और फितरी नहीं होगी जब
तक यूनियन काउंसिल लेवल पे सही मेरिटेड
तरीके से एट द लोएस्ट लेवल पॉसिबल फैसले
नहीं होंगे जब तक साहब की देन होंगी जब तक
उसके दूर कोई साइड इफेक्ट्स होंगे जो हमें
आज नहीं नजर आ रहे
कराची मतलब ना मुझे
हम क्रिएटिव फील्ड में सोचने का काम है
दिमाग लगाना होता है और मेरे महीने की
बहुत ज्यादा सोच इस पे गुजरती है कि मेरे
बच्चे जो आते हैं बाइक्स पे आते हैं इनकी
पार्किंग का इंतजाम कैसे करूं
जो फीमेल स्टाफ है वो कैसे पहुंचेगी दफ्तर
उसके पास कोई रिस्पेक्टेबल तरीका नहीं
नहीं आने का जो दो चार बसें चल रही है वो
इतनी क्राउडेड होती है कि उसमें वो
बच्चियां मतलब कहती है भाई बस कर दो मतलब
यार फरहान साहब
कोई रिस्पेक्टेबल तरीका नहीं है कार पूल
कर
उसके बावजूद है उबर करूं इस मुल्क के
हुक्मरानों को दो वंस इन अ जनरेशन चांसेस
मिले
एक सीपक मिला जिसको अगर हम विंड पावर या
उस वक्त की सोलर पावर के बेसिस में
हार्मोनाइज करते और कोल पावर प्लांट्स
नहीं लगाते तो कम से कम इंफ्रास्ट्रक्चरली
आज हम इलेक्ट्रिक रेवोल्यूशन के बीच में
होते हैं। बिलकुल ठीक।
दूसरा जो मतलब गिफ्ट फ्रॉम गॉड मिला वह
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स एंड सोलराइजेशन मिला।
इसको भी आप टैक्स करके जो जो
आपका बचाव हो सकता है पेट्रोलियम बिल से
आपकी बचत हो सकती है। आपका कोई करना नहीं
था इसमें। आपने सीपक का पहला स्टेप लेके
अपनी इंडस्ट्री को रिन्यूएबल एनर्जी पे ना
लगा के पे लगा के आपने ये पहला स्टेप नहीं
लिया था कि आप कह सकते हैं कि भ ये मेरा
क्रेडिट है कि ये आज ये सिचुएशन आई है।
लेकिन दुनिया की टेक्नोलॉजिकली आपको ये
एडवांसमेंट की वजह से एक और वंस इन अ
जनरेशन चांस मिला है। आज आप उस पे खड़े
हैं।
आप ये जो खवातीन की ट्रांसपोर्ट की बात कर
रहे हैं। आप टू व्हीलर स्कूटीज को
सब्सिडाइज करके ग्रिड के अंदर से
सब्सिडाइज मीटर्स लगा के आप आज पेट्रोलियम
डिपेंडेंसी एंड पर्सनल डिपेंडेंसी ऑन अदर
ट्रांसपोर्ट खत्म कर सकते हैं। लेकिन नहीं
आप उल्टे रास्ते चल रहे हैं।
मोहित फाइनल क्वेश्चन बिलावल भुट्टो ने
गिल्गित बल्तिस्तान में अपनी तकरीर के
दौरान कहा साजिश हो रही है कि कराची को
वफाक से कंट्रोल किया जाए। बात लोग कर रहे
हैं कि शायद किसी एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट
से डराया जा रहा है बिलावल को। इज दैट अ
सशन?
इट्स अ सशन टू द पीपल्स पार्टी
बट इट्स नॉट अ सशन बट इट्स अ सशन टू द
पीपल्स सशन टू द पीपल्स पार्टी
भाई एक होता है पूरे मसले का हल
मेरे को याद है
और एक होता है पीपल्स पार्टी का हल पर
पीपल्स पार्टी का हल तो है ना मैं मैं
सपोर्ट नहीं कर रहा
लेकिन अब आप अब आप वाते देते रह
नहीं नहीं मैं सपोर्ट नहीं कर रहा मैं कोई
भी वॉइस कंट्रोल मूव टुवर्ड्स कैप्चर ऑफ
एनी रिसोर्स बिकॉज़ मैं बिल्कुल भी सपोर्ट
नहीं कर सकता और बहुत तकलीफ होती है ये
कहते हुए लेकिन जैसे भी हैं कम से कम एक
डेमोग्रेटिक सिस्टम के पुतला ही सही लेकिन
पुतला तो है
तो
मैं बड़ा क्लियर हूं उसमें आई एग्री विथ
यू बट
यू डू यू थिंक इट्स गोना हैपन
आई आई वांट टू सी इट हैपन बिकॉज़ आई वांट
टू सी इट हैपन आई रियली वांट टू सी इट
हैपन बिकॉज़ दिस इज़ द स्ट्रॉ दैट विल ब्रेक
द कैमल्स
दिस इज़ द स्ट्रॉ आई थिंक व्हाई दैट्स
दैट्स दैट्स दैट्स अ वेरी इम्पोर्टेन्ट
पॉइंट दैट यू हैव मेड ये एक बड़ी पिक्चर का
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इट हैप्स। थैंक यू वै मच फॉर टेकिंग। थैंक
यू ऑलवेज प्लेजर प्लेजर ऑन। थैंक यू।
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इस वीडियो में कराची की मौजूदा स्थिति, उसके ऐतिहासिक पतन, और राजनीतिक कारणों पर चर्चा की गई है। वकील और विश्लेषक अब्दुल मोइज जाफरी के साथ बातचीत के दौरान, कराची के बुनियादी ढांचे के क्षरण, 'अदराइजेशन' (सांप्रदायिकता), और राजनीतिक दलों (जैसे पीपल्स पार्टी और एमक्यूएम) की कार्यप्रणाली पर विस्तार से रोशनी डाली गई है। चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि कैसे कराची, जो कभी एक अंतरराष्ट्रीय महानगर था, अब खराब प्रशासनिक निर्णयों और भ्रष्टाचार के कारण अपने मूल स्वरूप को खो चुका है।
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